क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में बीते 24 घंटे किसी भयावह सपने से कम नहीं रहे। जिस बाजार को कुछ साल पहले भविष्य की मुद्रा कहा जा रहा था, वही बाजार अचानक निवेशकों के लिए सबसे बड़ा डर बन गया है। एक ही दिन में वैश्विक क्रिप्टो बाजार में ऐसा भूचाल आया कि लाखों निवेशकों की वर्षों की कमाई पलभर में मिट्टी में मिल गई। आंकड़े बताते हैं कि 24 घंटे के भीतर क्रिप्टो मार्केट का कुल मूल्य लगभग 10 प्रतिशत तक गिर गया, जिससे दुनियाभर में करीब 18 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई।

यह गिरावट सिर्फ किसी एक डिजिटल करेंसी तक सीमित नहीं रही। बिटकॉइन, जिसे क्रिप्टो दुनिया का डिजिटल सोना कहा जाता है, से लेकर इथेरियम और बाइनेंस जैसी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी भी इस तूफान में बुरी तरह फंस गईं। बाजार में अचानक बिकवाली की ऐसी होड़ मच गई कि हर तरफ डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया।
शुक्रवार सुबह करीब 8:30 बजे के आंकड़ों पर नजर डालें तो वैश्विक क्रिप्टो बाजार का कुल मार्केट कैप लगभग 2.24 ट्रिलियन डॉलर पर आ चुका था। यह वही बाजार है जो कुछ महीने पहले 4 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर की ऊंचाइयों को छू रहा था। इस तेज गिरावट ने यह साफ कर दिया कि क्रिप्टो बाजार की अस्थिरता अब भी उतनी ही खतरनाक है, जितनी इसके शुरुआती दिनों में थी।
बिटकॉइन की हालत इस गिरावट की सबसे बड़ी मिसाल बनकर सामने आई। साल 2026 की शुरुआत से ही बिटकॉइन लगातार दबाव में रहा है। यह अब तक 20 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है। अक्टूबर में जब बिटकॉइन ने 1,24,000 डॉलर का ऐतिहासिक स्तर छुआ था, तब निवेशकों में उत्साह चरम पर था। लेकिन कुछ ही महीनों में इसकी कीमत आधे से भी कम रह गई।
शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे बिटकॉइन लगभग 65,500 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था। दिलचस्प बात यह है कि यह स्तर उस समय से भी नीचे चला गया है, जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत हुई थी। यानी चुनावी वादों और डिजिटल संपत्तियों को लेकर सकारात्मक संकेतों के बावजूद बिटकॉइन ने अपने सारे फायदे गंवा दिए।
बिटकॉइन को लंबे समय से डिजिटल सोने की संज्ञा दी जाती रही है। सोने की तरह ही बिटकॉइन भी कोई ब्याज, डिविडेंड या निश्चित मुनाफा नहीं देता। इसकी कीमत पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि निवेशक इसे खरीदने के लिए कितनी कीमत चुकाने को तैयार हैं। यही वजह है कि जब बाजार में भरोसा डगमगाता है, तो इसकी कीमतें बेहद तेजी से गिरती हैं।
हालिया सत्र में बिटकॉइन ने भारी उतार-चढ़ाव दिखाया। एक समय यह 60,000 डॉलर के करीब तक फिसल गया था। बाद में इसमें मामूली रिकवरी जरूर देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर बाजार की दिशा नकारात्मक ही बनी रही। इस अस्थिरता ने छोटे निवेशकों के साथ-साथ बड़े संस्थागत निवेशकों को भी चिंता में डाल दिया है।
क्रिप्टो बाजार की इस गिरावट का असर सिर्फ डिजिटल मुद्राओं तक सीमित नहीं रहा। उन कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखा गया, जिनके पास बिटकॉइन या अन्य डिजिटल संपत्तियों का बड़ा भंडार है। पिछले साल कई सार्वजनिक कंपनियों ने क्रिप्टो में भारी निवेश किया था। उस समय माहौल ऐसा था कि डिजिटल एसेट्स को भविष्य का मजबूत विकल्प माना जा रहा था।
लेकिन अब वही निवेश कंपनियों के लिए सिरदर्द बनता नजर आ रहा है। जैसे-जैसे बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी की कीमतें गिरती गईं, वैसे-वैसे इन कंपनियों के शेयर भी दबाव में आ गए। इससे यह साफ हो गया कि क्रिप्टो बाजार की उथल-पुथल पूरे वित्तीय इकोसिस्टम को प्रभावित कर सकती है।
इस भारी गिरावट के पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व को माना जा रहा है। निवेशकों में यह अनिश्चितता बनी हुई है कि फेडरल रिजर्व आने वाले समय में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाएगा। अगर ब्याज दरें ऊंची रहती हैं या उम्मीद से कम कटौती होती है, तो जोखिम वाली संपत्तियों से पैसा निकलना तय माना जाता है।
इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों के बढ़ते मूल्यांकन को लेकर भी बाजार में चिंता है। निवेशक अब जोखिम भरी संपत्तियों से दूरी बनाने लगे हैं और सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी वजह से बिटकॉइन नवंबर 2024 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
क्रिप्टो बाजार में बिकवाली उस समय और तेज हो गई, जब डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वॉर्श को अगले फेडरल रिजर्व चेयरमैन के रूप में नामित किया। विश्लेषकों का मानना है कि वॉर्श की नियुक्ति से फेड की मौद्रिक नीति सख्त हो सकती है और उसका बैलेंस शीट छोटा किया जा सकता है। यह स्थिति क्रिप्टो जैसी सट्टा संपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती है।
नतीजतन, निवेशकों ने तेजी से क्रिप्टो बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया। इस सामूहिक घबराहट ने बाजार को और नीचे धकेल दिया। यह वही बाजार है जिसने ट्रंप के चुनाव जीतने के बाद जबरदस्त तेजी दिखाई थी, लेकिन अब उसने उन सभी फायदों को पूरी तरह मिटा दिया है।
इस पूरे संकट की सबसे स्पष्ट तस्वीर फीयर एंड ग्रीड इंडेक्स में देखने को मिली। यह इंडेक्स निवेशकों की भावनाओं को दर्शाता है। पिछले महीने तक यह 49 के स्तर पर था, जो संतुलित स्थिति को दिखाता है। लेकिन अब यह गिरकर महज 5 पर आ गया है, जिसे एक्सट्रीम फीयर की श्रेणी में रखा जाता है।
फीयर एंड ग्रीड इंडेक्स का 5 पर पहुंचना यह बताता है कि निवेशकों में जबरदस्त डर है। लोग जोखिम लेने से बच रहे हैं और जल्द से जल्द अपनी पूंजी सुरक्षित करना चाहते हैं। यह स्तर नवंबर 2025 के बाद सबसे निचला है। इसके उलट, नवंबर 2025 में यह इंडेक्स 76 तक पहुंच गया था, जो अत्यधिक लालच और खरीदारी के उत्साह को दर्शाता था।
इस बदलाव से साफ है कि क्रिप्टो बाजार भावनाओं पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है। जब भरोसा होता है, तो पैसा बाढ़ की तरह आता है और जब डर हावी होता है, तो वही पैसा तेजी से बाहर निकल जाता है।
यह गिरावट एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या क्रिप्टोकरेंसी वास्तव में सुरक्षित निवेश का विकल्प है या अब भी यह एक अत्यधिक जोखिम भरा बाजार बना हुआ है। विशेषज्ञ मानते हैं कि क्रिप्टो में लंबी अवधि की संभावनाएं जरूर हैं, लेकिन इसकी अस्थिरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
निवेशकों के लिए यह समय आत्ममंथन का है। बिना समझे और सिर्फ मुनाफे के लालच में किया गया निवेश कितना खतरनाक हो सकता है, इसका यह सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या क्रिप्टो बाजार इस झटके से उबर पाता है या यह गिरावट किसी बड़े बदलाव की शुरुआत है।
