सोने और चांदी की कीमतों में 2025 का साल निवेशकों और अर्थशास्त्रियों के लिए बेहद उत्साहजनक रहा। सोने की कीमत में इस वर्ष 70 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। यह पिछले 46 वर्षों में सोने का सबसे अच्छा प्रदर्शन माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं और आर्थिक संकटों के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर दौड़ रहे हैं और सोना उनके लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प बन गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस साल सोने का वायदा कारोबार $2,640 प्रति औंस से बढ़कर $4,500 प्रति औंस के पार पहुँच गया। जेपी मॉर्गन चेज के विश्लेषक मानते हैं कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत $5,000 प्रति औंस से ऊपर जा सकती है। पिछले साल भी सोने के वायदा कारोबार में लगभग 27 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी।
1979 के हालात और मौजूदा परिस्थितियाँ
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो 1979 में भी सोने ने उल्लेखनीय तेजी दिखाई थी। उस समय अमेरिका में जिमी कार्टर राष्ट्रपति थे। मध्यपूर्व में संकट गहरा था और अमेरिका महंगाई और ऊर्जा संकट से जूझ रहा था। वर्तमान में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। व्यापार में टैरिफ की वजह से दिक्कतें बढ़ी हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ईरान और इज़राइल के बीच तनाव बढ़ा है और अमेरिका ने वेनेज़ुएला के तेल टैंकर जब्त किए हैं।
सोने की बढ़ती लोकप्रियता का कारण
ऐसे अनिश्चित समय में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ते हैं। सोने को लंबे समय से सुरक्षित निवेश माना जाता है। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता, मुद्राओं के गिरने का खतरा और बढ़ती महंगाई निवेशकों को सोने में निवेश करने के लिए प्रेरित कर रही है। जानकारों का कहना है कि सोना आर्थिक संकट और वित्तीय अस्थिरता के समय में निवेशकों के लिए रणनीतिक विविधता और स्थिरता का स्रोत बन गया है।
फेडरल रिजर्व जब ब्याज दरें कम करता है तो बॉन्ड यील्ड कम हो जाती है। इससे सोने की ओर निवेशकों का झुकाव और बढ़ जाता है। 2026 में फेड की ब्याज दरें घट सकती हैं, जिसके कारण सोने की बढ़त को समर्थन मिलेगा। अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना भी अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए सोना खरीदना आसान बनाता है।
केंद्रीय बैंकों की भूमिका
दुनिया के कई केंद्रीय बैंक भारी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं। विशेष रूप से चीन इस मामले में सबसे आगे है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, पिछले तीन सालों में केंद्रीय बैंकों ने प्रतिवर्ष 1,000 टन से अधिक सोना जमा किया है। यह पिछले दशक में प्रति वर्ष 400-500 टन की औसत तुलना में दोगुना है।
चीन अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड और डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह प्रवृत्ति स्पष्ट हुई। पश्चिमी सरकारों ने अमेरिकी डॉलर में रखी रूसी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया, जिससे रूस और चीन ने डॉलर पर निर्भरता कम करने के उपाय खोजे।
निवेशकों के दृष्टिकोण से सोना
निवेशक सोने को अपनी पूंजी की सुरक्षा और मुद्रास्फीति से बचाव के रूप में देखते हैं। सोना लंबे समय से महंगाई के खिलाफ Hedge का काम करता आया है। जब मुद्राओं का मूल्य गिरता है और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तब सोना निवेशकों के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प बन जाता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि वर्तमान में सोना न केवल निवेशकों के लिए आकर्षक है बल्कि केंद्रीय बैंकों के लिए भी रणनीतिक संपत्ति बन गया है। डॉलर की कमजोरी, वैश्विक तनाव और ब्याज दरों में संभावित कमी ने सोने को सबसे सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बना दिया है।
भविष्य की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 में सोने की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों में संभावित कमी निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित करेगी। कई विश्लेषकों का मानना है कि अगले साल सोने का भाव $5,000 प्रति औंस तक जा सकता है।
सोने की बढ़ती कीमतें दुनिया के लिए आर्थिक संकेत भी देती हैं। यह संकेत है कि निवेशक अस्थिरताओं के समय में सुरक्षित विकल्प चुन रहे हैं। इसके अलावा केंद्रीय बैंक सोने की खरीद में तेजी लाकर अपनी आर्थिक रणनीति मजबूत कर रहे हैं।
1979 और 2025 के बीच तुलना
1979 में सोने की कीमतें अचानक बढ़ीं थीं। उस समय अमेरिका में ऊर्जा संकट, महंगाई और मध्यपूर्व के संकट ने निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित किया। वर्तमान समय में भी रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-वेनेज़ुएला तेल विवाद और ईरान-इज़राइल तनाव जैसी परिस्थितियाँ लगभग समान हैं। इस वजह से सोना फिर से निवेशकों के लिए सर्वोत्तम विकल्प बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों के लिए यह अवसर है। सोने की बढ़ती कीमतें सुरक्षित निवेश की दिशा में एक संकेत हैं। निवेशक इस समय सोने में निवेश करके भविष्य के जोखिमों से अपने पोर्टफोलियो की रक्षा कर सकते हैं।
निष्कर्ष
इस वर्ष सोने का प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा। वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों में संभावित बदलाव ने सोने को निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बना दिया। केंद्रीय बैंक और वैश्विक निवेशक सोने को अपनी रणनीति में शामिल कर रहे हैं। 1979 के बाद यह सबसे बड़ा उछाल माना जा रहा है।
सोना अब केवल निवेश का साधन नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक संकेतक और सुरक्षित haven बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में सोने की मांग लगातार बनी रहेगी और इसकी कीमतों में और वृद्धि देखने को मिलेगी।
