उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन को हिला कर रख दिया बल्कि पूरे उत्तर भारत में चर्चा का विषय बन गया। यह मामला एक युवक गौरव कुमार उर्फ ललित किशोर से जुड़ा है, जिसने खुद को आईएएस अधिकारी बताकर प्रशासन, नागरिक और व्यवसायियों को बड़े पैमाने पर ठगी और धोखाधड़ी का शिकार बनाया। इस फर्जी अधिकारी की जीवनशैली, उसके कारनामे और अपराधों की जटिल कहानी किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है।

गौरव कुमार ने अपने छोटे से गाँव, सीतामढ़ी जिले के महसौर का नाम रोशन करने के बजाय अफ़सोसजनक तरीके से उसे शर्मसार कर दिया। पिता चलितर राम मजदूरी और पेंट पॉलिश का काम करते थे। गौरव ने शुरुआत में पिता का काम संभाला लेकिन पढ़ाई में तेज होने के कारण उसने अपने लिए बड़ा सपना देखा। 2019 में उसने मैथ में एमएससी की डिग्री प्राप्त की और 2022 में ‘सुपर 50’ नामक कोचिंग सेंटर खोला।
पहला फ्रॉड और कानून की पकड़
गौरव ने कोचिंग सेंटर के माध्यम से छात्रों को नौकरी दिलाने का झांसा दिया और पहले ही मामले में एक छात्र से 2 लाख रुपये ऐंठ लिए। इस फ्रॉड के चलते उसके खिलाफ FIR दर्ज हुई। हालांकि, एफआईआर होने के बाद गौरव ने अंडरग्राउंड होकर खुद को छिपा लिया और इस दौरान अपने जीवन में कई विवादास्पद फैसले लिए। उसने एक गांव की लड़की से प्रेम किया और भागकर मंदिर में शादी कर ली। इसके बाद उसके जीवन में अपराध और झूठी पहचान का सिलसिला और बढ़ गया।
फर्जी आईएएस की झूठी पहचान और ठगी
गौरव ने अपने साले अभिषेक की मदद से खुद को सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाला छात्र दिखाया। धीरे-धीरे उसने अपने आप को आईएएस अधिकारी बताना शुरू किया और नौकरी व ठेके दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठे। सोशल मीडिया के माध्यम से उसने लोगों को विश्वास दिलाया कि वह आईएएस अधिकारी है। इस झूठ का फायदा उठाते हुए उसने लाखों रुपये की ठगी की।
गोरखपुर में इस जालसाजी का विस्तार करने के लिए उसने अपने साले अभिषेक और उनके दोस्त परमानंद गुप्ता की मदद ली। उन्होंने एक मकान किराए पर लिया, जहाँ गौरव अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहने लगा। मकान के बाहर उसने आईएएस गौरव कुमार का नाम नेम प्लेट भी लगवाया और धीरे-धीरे प्रशासनिक अधिकारियों और लोगों के बीच अपनी पकड़ मजबूत की।
एसडीएम को थप्पड़ और अपराधों का रिकॉर्ड
इस फर्जी अधिकारी का एक और विवादास्पद कारनामा यह था कि उसने बिहार के भागलपुर जिले में एक गांव दौरे के दौरान असली एसडीएम से मुलाकात की। जब एसडीएम ने उससे सवाल पूछने की कोशिश की, तो गौरव ने एसडीएम को दो थप्पड़ जड़ दिए। यह घटना उस समय चर्चा का विषय बनी। इस प्रकार उसने अपनी आक्रामकता और झूठी पहचान के जरिए प्रशासनिक अधिकारियों को भी चुनौती दी।
450 करोड़ के टेंडर के लिए रिश्वत
गौरव का सबसे बड़ा फ्रॉड तब उजागर हुआ जब 7 नवंबर को गोरखपुर स्टेशन पर जीआरपी और आरपीएफ ने उसके सूटकेस से 99 लाख 90 हजार रुपये बरामद किए। जांच में पता चला कि यह राशि बिहार के एक ठेकेदार माधव को दी जानी थी। गौरव ने ठेकेदार से 5 करोड़ रुपये की प्रोसेसिंग फीस वसूल की थी और 450 करोड़ के टेंडर दिलाने का वादा किया था।
इस पूरे नेटवर्क में गौरव के साथी परमानंद और साला अभिषेक भी शामिल थे। उनका नेटवर्क उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में फैला हुआ था। उन्होंने सैकड़ों लोगों को ठगी का शिकार बनाया, जिसमें बड़े ठेकेदार, सरकारी कर्मचारी और छात्र शामिल थे।
चार गर्लफ्रेंड और निजी जीवन की अनैतिकता
गौरव के निजी जीवन की बात करें तो उसने केवल अपनी पत्नी ही नहीं बल्कि चार गर्लफ्रेंड भी बनाईं। इनमें से तीन गर्लफ्रेंड गर्भवती थीं। यह तथ्य उसके नैतिक पतन और अपराध की गंभीरता को दर्शाता है। उसके कारनामों और अनैतिक जीवन शैली ने उसे स्थानीय लोगों के बीच और अधिक बदनाम कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
गोरखपुर पुलिस ने आखिरकार 33 दिन की खोजबीन के बाद गौरव कुमार को पकड़ लिया। इसके साथ ही उसके साथी परमानंद गुप्ता को भी गिरफ्तार किया गया। अभी भी उसके साले अभिषेक की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार गौरव का अपराध नेटवर्क बड़ा और जटिल था।
निष्कर्ष और सामाजिक संदेश
गोरखपुर का यह फर्जी IAS मामला हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि किस तरह व्यक्ति की लालच, झूठी पहचान और अपराध समाज में भय और नुकसान फैलाने का कारण बन सकते हैं। यह घटना प्रशासनिक और कानूनी निगरानी की आवश्यकता को भी उजागर करती है। आम जनता को भी इस तरह के धोखाधड़ी और जालसाजी से सतर्क रहने की जरूरत है।
