शादी वह अवसर माना जाता है जब परिवार और समाज खुशियों से भर जाते हैं। रोशनी, संगीत, हँसी और उल्लास के बीच दो परिवारों के बीच नए रिश्तों की शुरुआत होती है। लेकिन कभी-कभी भाग्य ऐसी करवट लेता है कि जश्न की सजावट अचानक आँसुओं में बदल जाती है। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में बीती रात एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पूरे विवाह समारोह को पलभर में शोक सभा में बदल दिया। घर से दूल्हा बनकर निकला युवक कुछ ही देर में मृत शरीर बनकर अस्पताल की मोर्चरी में पहुँच गया। यह घटना न केवल एक परिवार के जीवन में सदमे की तरह आई, बल्कि समाज में सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था की गंभीर चुनौतियों को फिर से उजागर कर गई।

यह हादसा रविवार रात दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर उस समय हुआ जब सरूरपुर गाँव में बरात चढ़त की तैयारियाँ जारी थीं। बाजे-गाजे की धुनें वातावरण में गूँज रही थीं, रिश्तेदार भोजन कर चुके थे और दूल्हे की घोड़ी सजाने का समय हो चला था। इसी बीच एक मामूली सा असहज पल ऐसी त्रासदी में बदल गया जिसका किसी ने अनुमान भी नहीं लगाया था।
बिनौली गाँव निवासी सुक्रमपाल रोधिया का 25 वर्षीय बेटा सुबोध रोधिया, जो पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट था, अपने मित्रों के साथ कार में बैठा हुआ था। अचानक उसे पेट में परेशानी महसूस हुई और उल्टी आने लगी। वह तुरंत कार से उतरकर सड़क किनारे चला गया ताकि बाहर उल्टी कर सके। इस बीच किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही सेकंड में किस तरह की भयावह घटना होने वाली है।
उसी समय दिल्ली की दिशा से आ रहा एक तेज रफ्तार ट्रक, जिसकी स्पीड का कोई नियंत्रण नहीं था, सीधे सुबोध की ओर बढ़ आया। पलभर में ट्रक ने उसे टक्कर मार दी और क्रूरता से कुचलता हुआ आगे निकल गया। दूल्हे के साथ खड़े उसके दोस्त चीखते रह गए लेकिन चालक ट्रक को तेज गति से भगाते हुए अंधेरे में गायब हो गया।
सुबोध की हालत अत्यंत गंभीर थी। उसके दोस्त और बराती तत्काल उसे जिला अस्पताल ले गए। वहाँ मौजूद चिकित्सक डॉ. विजय प्रकाश ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। जैसे ही यह खबर अस्पताल से विवाह स्थल तक पहुँची, पूरे माहौल में मातम की चीखें गूँज उठीं। जहाँ कुछ देर पहले म्यूजिक सिस्टम पर शादी के गीत बज रहे थे, वहीं अब सिर्फ दर्द और सदमे की चुप्पी रह गई।
दुल्हन पक्ष की स्थिति और भी करुण है। नेहा नाम की युवती, जो कुछ देर बाद सुबोध की पत्नी बनने जा रही थी, खुद को सँभाल भी नहीं पा रही। सुबोध के माता-पिता, रिश्तेदार और मित्र किसी भी तरह इस घटना को स्वीकार नहीं कर पा रहे। जीवन के सबसे सुंदर क्षण का यह कड़वा अंत किसी के लिए भी बर्दाश्त कर पाना कठिन है।
शादी की हर रस्म, हर तैयारी, हर खुशी की वजह अब एक सवाल में सिमट गई है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। इतने बड़े आयोजन का पूरा उत्साह कुछ सेकंड में नष्ट हो गया। समाज के लिए यह दुर्घटना एक गहरी चेतावनी भी है कि सड़क पर एक लापरवाह चालक कितनी जिंदगियाँ बरबाद कर सकता है।
पुलिस तुरंत मौके पर पहुँच गई और शव को कब्जे में ले लिया। थाना कोतवाली के प्रभारी दीक्षित कुमार त्यागी ने बताया कि आरोपी चालक की खोज जारी है। हालांकि अभी तक परिवार की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई, लेकिन पुलिस तकनीकी जांच के आधार पर ट्रक का पता लगाने में जुटी है। हाईवे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद ली जा रही है ताकि वाहन और चालक की पहचान हो सके।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ बार-बार इस बात पर जोर देते हैं कि भारत में यातायात से जुड़ी मौतें अब भी उच्चतम स्तर पर हैं। तेज गति, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और वाहनों की निगरानी में लापरवाही बड़ी वजह बनती जा रही है। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर अक्सर ट्रकों की तेज आवाजाही के कारण दुर्घटनाएं बढ़ती रही हैं, लेकिन कठोर कदमों की कमी खलती है।
सुबोध रोधिया पेशे से डॉक्टर था और अपनी सेवाओं से आसपास के लोगों की मदद करता था। समाज को स्वस्थ रखने की दिशा में समर्पित रहने वाले इस युवक की मौत एक ऐसा विडंबनापूर्ण सच है जो सड़क व्यवस्था की अव्यवस्था को बेनकाब करता है। उसके परिवार ने प्यार से उसका विवाह तय किया था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस व्यक्ति को दुल्हन के घर से बारात पर लौटना था, वही बिना धड़कन के घर लौटेगा।
रात एक बजे तक जिला अस्पताल में सुबोध के माता-पिता सहित पूरे बरात पक्ष के लोग मौजूद रहे। सबकी आंखों से आँसू सूखने का नाम नहीं ले रहे थे। वहीं दुल्हन पक्ष में दहाड़ें और बेसुध कर देने वाली चीखें स्थिति को और भी दर्दनाक बना रहीं थीं। दूल्हे की मौत के बाद विवाह औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया गया और बराती धीरे-धीरे अपने गाँव लौट आए।
यह घटना केवल एक परिवार का शोक नहीं, बल्कि समाज के लिए वह चेतावनी है कि सड़क दुर्घटनाएं किसी भी समय, किसी भी स्थान पर खुशियों को निगल सकती हैं। सरकार और प्रशासन चाहे जितने वादे करें, लेकिन जब तक यातायात नियमों को गंभीरता से लागू नहीं किया जाएगा, ऐसी घटनाएं यूँ ही लगाम से बाहर होती रहेंगी। सड़कें सिर्फ चलने की जगह नहीं, जीवन की डोर हैं और एक चूक उसे हमेशा के लिए काट सकती है।
भविष्य में यह हादसा एक सीख बन सकता है कि हाईवे पर रुकते वक्त सावधानी अत्यंत आवश्यक है। साथ ही सरकार को भी चाहिए कि वह ट्रैफिक निगरानी को और मजबूत करे, ताकि ऐसे हादसे रोके जा सकें। बिना किसी सुरक्षा उपाय के तेज गति से दौड़ते वाहनों को रोकना समय की बड़ी मांग है।
अंत में वही सवाल रह जाता है कि क्या सुबोध की इस अचानक हुई मौत ने किसी जिम्मेदारी को जगाया है। क्या ट्रक चालक की गिरफ्तारी होगी और उसे न्यायालय में सजा मिलेगी। क्या प्रशासन आने वाले दिनों में यह सुनिश्चित करेगा कि कोई और परिवार ऐसा दर्द न झेले। जीवन और मृत्यु की इस त्रासदी ने कई प्रश्न छोड़ दिए हैं।
सुबोध के परिवार और दुल्हन नेहा के लिए यह दर्द कभी समाप्त नहीं होगा। उनका एक सपना अधूरा रह गया। यह घटना याद दिलाती है कि जीवन अनिश्चित है और एक क्षण में सब कुछ समाप्त हो सकता है। सड़क पर जागरूकता, सावधानी और प्रशासनिक सख्ती से ही ऐसे हादसों पर काबू पाया जा सकता है।
आज पूरा गाँव गम में डूबा है। जिसने भी यह खबर सुनी वह स्तब्ध रह गया। किसी ने नहीं सोचा था कि खुशी का माहौल इतनी तेजी से मौत की चीख में बदल जाएगा। इस शादी का दिन जो हमेशा यादगार होना था, वह अब एक घाव की तरह लोगों की स्मृतियों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है।
