हरदा जिले के एक शांत मोहल्ले में रविवार दोपहर की शुरुआत अन्य दिनों की तरह सामान्य थी। परिवारजन अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे और घर का माहौल बिल्कुल सहज था। इसी दौरान ढाई वर्षीय बच्चा घर के आंगन में खेलते-खेलते उस दिशा की ओर बढ़ गया, जहां गर्म पानी से भरा एक बड़ा बर्तन रखा हुआ था। परिवार के सदस्यों ने शायद सोचा भी नहीं था कि कुछ ही पलों में खेलते-खेलते मासूम का कदम गलत दिशा में पड़ जाएगा और घर की शांति चीखों में बदल जाएगी।

बच्चे ने खेलते-खेलते अचानक उस बर्तन का सहारा लिया, और उसके असंतुलन के साथ ही वह सीधे गर्म पानी में गिर गया। पलक झपकते ही उसकी चीख से पूरा परिवार भय से सिहर उठा। गर्म पानी ने उसके शरीर का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा झुलसा दिया।
परिवार की घबराहट और तत्काल प्रयास
घटना के बाद बच्चे की स्थिति देखकर परिजनों का मनोबल टूट गया। किसी के समझ में नहीं आ रहा था कि बच्चे को कैसे उठाया जाए, कैसे संभाला जाए और क्या किया जाए। फिर भी परिवार ने साहस जुटाया और तुरंत उसे गोद में उठाकर जिला अस्पताल की ओर दौड़ पड़े।
घर से अस्पताल तक का रास्ता पूरे परिवार के लिए मानसिक रूप से बेहद कठिन था। हर बीतता सेकंड उन्हें भारी लग रहा था। लेकिन अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने बिना देर किए बच्चे को पीआईसीयू वार्ड में भर्ती कर लिया।
अस्पताल में डॉक्टरों की कोशिशें
बच्चे का इलाज बाल रोग विशेषज्ञों और सर्जरी टीम की देखरेख में जारी है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे का 40 प्रतिशत शरीर झुलसा हुआ है, जो गंभीर स्थिति मानी जाती है। ज़रूरत पड़ने पर उसे विशेष बर्न यूनिट में रेफर करने की तैयारी भी रखी गई है।
डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी उम्र में दर्द सहन करना बच्चों के लिए बेहद कठिन होता है, इसलिए उन्हें बाहरी दर्द कम करने वाली दवाओं और सटीक देखभाल की जरूरत होती है।
बच्चों में इस तरह के हादसों का बढ़ता खतरा
नन्हे बच्चे घर में सबसे ज्यादा खतरे में होते हैं। खुले गर्म पानी, गैस स्टोव, गर्म दूध, गीजर का पानी और रसोई के उपकरण बच्चों की जिज्ञासा के कारण गंभीर हादसों का कारण बन जाते हैं।
हरदा की इस घटना ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि घर के भीतर ही खतरे छिपे होते हैं और परिवारजनों को लगातार बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देना जरूरी है।
परिवार की मानसिक स्थिति और सामाजिक प्रतिक्रिया
बच्चे की चोट ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। अभी हर कोई डॉक्टरों की बातों और बच्चे के उपचार पर पूरा भरोसा रखे हुए है। पड़ोसी और रिश्तेदार भी अस्पताल पहुंचकर परिजनों का हौसला बढ़ा रहे हैं।
छोटी-सी गलती का बड़ा परिणाम देखकर आसपास के परिवार भी अब ज्यादा सतर्क हो गए हैं। कई लोग मानते हैं कि यह घटना एक चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए।
सावधानी ही सुरक्षा
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के आसपास गर्म पानी, उबलते बर्तन या रसोई की प्रक्रिया तब तक नहीं होनी चाहिए जब तक वे बड़े न हो जाएं। बच्चे जिज्ञासा से चीजों को छूते हैं, और एक पल की असावधानी बड़ा हादसा बना सकती है।
घर में गर्म पानी का उपयोग करते समय बर्तन ऊंचाई पर रखने चाहिए। बाथरूम में गीजर का पानी बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है, इसलिए तापमान संयमित रखना चाहिए।
निष्कर्ष
हरदा में हुई यह घटना दुखद है, लेकिन साथ ही सीख देने वाली भी। बच्चे का इलाज जारी है और डॉक्टर लगातार उसके स्वास्थ्य में सुधार की कोशिश कर रहे हैं।
पूरा परिवार उम्मीद में है कि मासूम जल्द ठीक होगा और फिर से अपने स्वाभाविक चंचलपन में लौट आएगा।
सावधानी, जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे हादसों को रोक सकती है।
