मध्यप्रदेश के हरदा जिले में चुनावी प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस बार विवाद का केंद्र निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली बनी है, जिस पर कांग्रेस ने गंभीर और सीधे आरोप लगाए हैं। हरदा कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहन सांई ने सार्वजनिक रूप से यह कहते हुए राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी कि जिले में निर्वाचन आयोग निष्पक्ष संस्था की तरह काम नहीं कर रहा, बल्कि वह एक राजनीतिक दल विशेष के हितों को साधने में लगा हुआ दिखाई देता है।

उनका आरोप है कि लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था मानी जाने वाली निर्वाचन व्यवस्था, जो निष्पक्षता और पारदर्शिता की प्रतीक होती है, हरदा जिले में अपने मूल उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। मोहन सांई का कहना है कि यदि चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे और मतदाताओं को ही परेशान किया जाएगा, तो यह सीधे तौर पर लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने जैसा होगा।
मतदाता सूची को लेकर उठे गंभीर सवाल
मोहन सांई ने यह भी आरोप लगाया कि जिले में मतदाता सूची को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की जा रही हैं। उनका कहना है कि हजारों मतदाताओं के नाम बिना उचित कारण के मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं या उनमें अनावश्यक त्रुटियां डाली जा रही हैं। इससे आम नागरिकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है और वे अपने मताधिकार को लेकर असमंजस में हैं।
उन्होंने दावा किया कि कई ऐसे मतदाता हैं जो वर्षों से नियमित रूप से मतदान करते आ रहे हैं, लेकिन अचानक उन्हें यह पता चल रहा है कि उनका नाम मतदाता सूची में मौजूद ही नहीं है। वहीं कुछ लोगों के नाम गलत पते या गलत वार्ड में दर्ज कर दिए गए हैं, जिससे उन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
मतदाताओं को परेशान करने का आरोप
कांग्रेस जिलाध्यक्ष का कहना है कि निर्वाचन इकाई द्वारा मतदाताओं को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पर मजबूर किया जा रहा है। लोग अपने नाम जोड़वाने, सुधार करवाने या स्थिति स्पष्ट करने के लिए कई दिनों तक प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा। इससे आम मतदाता हतोत्साहित हो रहा है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से उसका भरोसा डगमगाने लगा है।
मोहन सांई ने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सर्वोपरि होता है और उसकी सुविधा तथा सम्मान को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए। यदि वही मतदाता खुद को ठगा हुआ और परेशान महसूस करेगा, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता मानी जाएगी।
निष्पक्षता पर उठते सवाल और राजनीतिक प्रतिक्रिया
हरदा में उठे इस विवाद ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के उद्देश्य से जानबूझकर मतदाता सूची में गड़बड़ियां की जा रही हैं। उनका आरोप है कि यह सब कुछ एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है, ताकि चुनावी परिणामों को प्रभावित किया जा सके।
मोहन सांई ने यह भी कहा कि यदि समय रहते इन मुद्दों का समाधान नहीं किया गया, तो कांग्रेस पार्टी इसे बड़े स्तर पर उठाने के लिए मजबूर होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि लोकतंत्र के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जा सकता है।
आम जनता में बढ़ती चिंता
इस पूरे मामले का असर केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है। आम नागरिकों में भी चिंता और असंतोष देखा जा रहा है। कई मतदाताओं का कहना है कि वे अपने अधिकार को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं तकनीकी खामियों या प्रशासनिक लापरवाही के कारण वे मतदान से वंचित न रह जाएं।
ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी वार्डों तक, मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नामों में बदलाव क्यों किए जा रहे हैं और इसकी जवाबदेही कौन लेगा।
लोकतंत्र की बुनियाद और निष्पक्ष चुनाव
भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में चुनाव केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता की आवाज को सत्ता तक पहुंचाने का माध्यम होते हैं। ऐसे में चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठना अपने-आप में गंभीर विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चुनावी संस्थाओं पर जनता का भरोसा कमजोर होता है, तो इसका असर पूरे लोकतांत्रिक ढांचे पर पड़ता है।
हरदा में उठे इस विवाद ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही को कैसे और मजबूत किया जाए, ताकि किसी भी राजनीतिक दल या आम नागरिक को पक्षपात का आभास न हो।
समाधान की मांग और आगे की राह
कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहन सांई ने प्रशासन से मांग की है कि मतदाता सूची की निष्पक्ष और स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों और नागरिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए, ताकि किसी को भी संदेह का मौका न मिले।
उनका कहना है कि यदि वास्तव में निर्वाचन आयोग निष्पक्ष है, तो उसे इन आरोपों का स्पष्ट और ठोस जवाब देना चाहिए। इससे न केवल राजनीतिक विवाद कम होगा, बल्कि जनता का भरोसा भी बहाल होगा।
निष्कर्ष
हरदा जिले में निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर उठे ये सवाल केवल स्थानीय राजनीति का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि यह पूरे लोकतांत्रिक तंत्र की विश्वसनीयता से जुड़े हुए हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और संबंधित संस्थाएं इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती हैं और मतदाताओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
