मध्य प्रदेश के हरदा जिले की वह सुबह सामान्य थी। रेलवे स्टेशन के आसपास रोज़ की तरह हलचल थी—किसी की ट्रेन पकड़ने की जल्दबाजी, किसी की वापसी की खुशी, तो किसी की रोज़मर्रा की यात्रा का सिलसिला। लेकिन, ठीक सुबह 7 बजकर 30 मिनट पर जो हुआ, उसने इस रूट पर सफर कर रहे हजारों यात्रियों की सांसें थाम दीं।
हरदा रेलवे स्टेशन क्षेत्र में स्थित डबल फाटक के पास एक ओएचई टावर वैगन अचानक पटरी से उतर गई। यह घटना इतनी अप्रत्याशित थी कि किसी को समझने का मौका भी नहीं मिला कि आखिर हुआ क्या? तेज़ आवाज़, झटका, और फिर धूल का गुबार — सबकुछ कुछ सेकंड में।

इस टावर वैगन के पटरी से उतरते ही मुंबई-इटारसी रेल रूट, जो देश के सबसे व्यस्त मार्गों में गिना जाता है, तुरंत प्रभावित हो गया। इस रूट पर प्रतिदिन हजारों यात्री आने-जाने का सफर तय करते हैं। ऐसे में रेल सेवाओं पर पड़ने वाला असर बेहद बड़ा था।
यात्रा बीच में रुकी — यात्रियों की परेशानी बढ़ी
जैसे ही हादसे की जानकारी रेलवे कंट्रोल रूम तक पहुँची, ताबड़तोड़ कई ट्रेनों को हरदा स्टेशन से कुछ दूरी पहले ही रोक दिया गया। ट्रेनें पटरी पर खड़ी — वहीं यात्री डिब्बों में बैठे असमंजस में।
यात्रियों को सूचित किया गया कि पटरी पर तकनीकी दिक्कत आने के कारण थोड़ी देरी होगी। शुरू में सभी ने सोचा कि शायद कोई हल्की दिक्कत होगी, पर समय बढ़ता जा रहा था और यात्री बेचैन होते जा रहे थे।
यात्रियों के अनुभव —
किसी की आगे की कनेक्टिंग ट्रेन छूटने वाली थी,
किसी की इंटरव्यू की टाइमिंग बीत रही थी,
किसी के घर कोई आपात स्थिति थी।
ट्रेन के अंदर छोटे-छोटे बच्चे रो रहे थे, बुजुर्ग खिड़कियों से बाहर देखने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर हो क्या रहा है।
मौके पर अधिकारी और तकनीकी दल की तैनाती
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारियों की टीम तुरंत मौके पर पहुँची। तकनीकी टीम ने जांच प्रारंभ की। यह ओएचई टावर वैगन रेलवे की विद्युत लाइन निरीक्षण और मरम्मत के उपयोग में लाई जाती है। इसके पटरी से उतरने के कारणों की जांच जारी है, लेकिन शुरुआती अंदाज यह था कि पटरियों में किसी प्रकार की तकनीकी कमी या गलत गति संतुलन इसका कारण हो सकता है।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पूरी कोशिश की जा रही है कि जल्द से जल्द ट्रैक को दुरुस्त किया जाए ताकि यात्रियों को कम से कम परेशानी हो।
अप-डाउन लाइन बदलकर संचालन
हादसे के तुरंत बाद अप लाइन पर ट्रेनों को संचालित करने की कोशिश शुरू की गई। कुछ ट्रेनों को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट करने तथा कुछ को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए। यह प्रयास इसलिए ताकि मुंबई-इटारसी के बीच संचार पूरी तरह से ठप न हो जाए। लेकिन फिर भी समय की देरी से यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
रेलवे की ओर से आधिकारिक बयान
रेलवे द्वारा बयान जारी किया गया:
“हमारी पहली प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेनों का सुरक्षित संचालन है। टीम मौके पर है और मरम्मत कार्य तेज़ी से जारी है। जल्द ही सेवा सामान्य कर दी जाएगी।”
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से शांति बनाए रखने की अपील भी की।
कैसे रुकता है पूरा सिस्टम — समझिए
एक अकेली टावर वैगन के पटरी से उतरने से इतना बड़ा प्रभाव क्यों पड़ा?
▶ यह मार्ग हाई-ट्रैफिक रूट है
▶ पूरी विद्युत लाइन एक नेटवर्क से जुड़ी होती है
▶ टावर वैगन वह ट्रेन होती है जिससे ओवरहेड इलेक्ट्रिक तारों की जांच और मरम्मत होती है
▶ इसके डिरेल होने से तकनीकी जोखिम उत्पन्न होता है
▶ इसलिए तुरंत डाउन ट्रैक को ब्लॉक कर दिया गया
सुरक्षा के नियम बेहद कड़े हैं, जिसके कारण थोड़ी सी गड़बड़ी भी पूरे रूट को रोक देती है।
रेलवे कर्मचारी — संकट में भी सेवा
जहाँ यात्री चिंतित थे, वहीं रेलवे कर्मचारी अपने कार्य में जुटे थे। गर्मी, तनाव और समय का दबाव — फिर भी उनकी प्राथमिकता सिर्फ यह थी—
“पटरियों को जल्द सुरक्षित बनाना और यात्रियों को फिर सफर पर ले जाना।”
उनकी मेहनत इस बात का प्रतीक है कि रेलवे का तंत्र कितनी मजबूती से ऐसी घटनाओं से निपटता है।
यात्रियों के लिए जरूरी संदेश
रेल प्रशासन ने यात्रियों से कहा:
अनावश्यक यात्रा न करें। यदि यात्रा जरूरी हो तो ट्रेन स्टेटस की रियल टाइम जानकारी लेते रहें। IRCTC और NTES ऐप पर लगातार अपडेट जारी किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
हरदा में यह घटना छोटी प्रतीत हो सकती है, पर रेलवे नेटवर्क की संवेदनशीलता के कारण इसका असर बहुत बड़ा है। ऐसे हादसे सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की दिशा में चेतावनी होते हैं, ताकि भविष्य में यात्रा और भी सुरक्षित बनाई जा सके।
रेलवे प्रशासन के तेज़ एक्शन की वजह से बड़ा हादसा होने से टल गया — यही राहत की बात है।
