नर्मदापुरम जिले का शांत गांव हथवास एक अनचाहे विवाद की वजह से अचानक सुर्खियों में आ गया। यहां एक कृषि सेवा केंद्र पर निरीक्षण करने पहुंचीं महिला कृषि विकास अधिकारी के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, उसने न केवल प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया, बल्कि सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान पर भी सवाल खड़े कर दिए। यह घटना केवल एक मामूली तकरार का मामला नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता को उजागर करती है जिसके कारण सरकारी निरीक्षण प्रक्रियाएं अक्सर प्रभावित होती हैं।

घटना का केंद्र है हथवास स्थित एक कृषि सेवा केंद्र, जहां बीज और कृषि सामग्री की बिक्री होती है। इसी केंद्र पर निरीक्षण के लिए पहुंचीं अधिकारी निराली आर्या। उनका उद्देश्य था स्टॉक की जांच, दस्तावेजों की पड़ताल और बीज के सैंपल लेना, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसानों को किसी प्रकार का मिलावटी या गैर-मानक बीज न बेचा जा रहा हो। लेकिन जैसे ही उन्होंने अपना काम शुरू किया, वहां मौजूद व्यापारी चैन सिंह ठाकुर के तेवर बदल गए।
निरीक्षण के शुरुआती क्षणों से ही यह साफ दिखने लगा था कि केंद्र संचालक अधिकारी के प्रवेश को सहजता से स्वीकार करने को तैयार नहीं था। उसने सबसे पहले यह सवाल उठाया कि अधिकारी उसके केंद्र के अंदर कैसे आईं। जबकि निरीक्षण विभागीय प्रक्रिया का नियमित हिस्सा होता है और इसके लिए अधिकारी को किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन व्यापारी की प्रतिक्रिया इसके विपरीत थी। उसकी आवाज़ ऊंची हो चुकी थी, आक्रोश बढ़ रहा था और माहौल तनावपूर्ण बनता जा रहा था।
निरीक्षण के दौरान, जब अधिकारी ने बीज के सैंपल मांगे, व्यापारी ने इसे देने से साफ इंकार कर दिया। यह सरकारी कार्य में बाधा का प्रत्यक्ष उदाहरण था। सैंपल लेने का काम न केवल कृषि विभाग की जिम्मेदारी का हिस्सा है, बल्कि यह किसानों के हितों की रक्षा का भी आधार है। इसके बावजूद व्यापारी ने न केवल असहयोग दिखाया बल्कि अचानक धमकियों पर उतर आया। उसने अधिकारी से कहा कि यदि वह केंद्र के अंदर आईं तो वह उन्हें सस्पेंड करवा देगा। यह बयान न केवल धमकी था, बल्कि एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जहां एक सरकारी अधिकारी को अपने कर्तव्य से रोकने की कोशिश की जाती है।
अधिकारी निराली आर्या ने बीच-बचना, समझाना और शांत रहने की कई कोशिशें कीं। उनके साथ मौजूद स्टाफ ने भी माहौल शांत करवाने की कोशिश की। लेकिन व्यापारी का आक्रामक रवैया बढ़ता ही गया। यहां तक कि वह अधिकारी की ओर बढ़ आया, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई। इस दौरान अधिकारी ने अपनी सुरक्षा और भविष्य के प्रमाण के लिए घटना का वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू किया। वीडियो बनते देख व्यापारी का गुस्सा और उग्र हो गया। वह आगे बढ़ने लगा, लेकिन अधिकारी ने उसे दूरी बनाकर रखने की चेतावनी दी। उनकी चेतावनी के बाद वह कुछ कदम पीछे हट गया, लेकिन उसका व्यवहार इसी बीच कई सीमाएं पार कर चुका था।
इस पूरे विवाद की वजह से निरीक्षण पूरी तरह बाधित हो गया। कृषि सेवा केंद्र का कार्य प्रभावित हुआ और अधिकारी को आगे की प्रक्रिया रोकनी पड़ी। यह साफ हो चुका था कि व्यापारी न केवल कानून का उल्लंघन कर रहा है बल्कि सरकारी काम में रुकावट डालने की भी कोशिश कर रहा है।
अधिकारी ने पूरे मामले की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी और घटना स्थल से सीधे पुलिस थाने पहुंचीं। थाना प्रभारी और पुलिस टीम ने अधिकारी की शिकायत को गंभीरता से लिया। कृषि विभाग के निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की अभद्रता, धमकी या दखलंदाजी कानूनन अपराध है। इसलिए पुलिस ने बिना देरी किए व्यापारी चैन सिंह ठाकुर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज कर लिया।
जैसे ही मामला दर्ज हुआ, थाने में हलचल बढ़ गई। कृषि विभाग के कर्मचारियों में भी आक्रोश और चिंता का माहौल था। उनका कहना था कि निरीक्षण के दौरान ऐसे व्यवहार लगातार बढ़ते जा रहे हैं और कई बार उन्हें जोखिम भरी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। महिला अधिकारियों के साथ ऐसी घटनाएं और भी संवेदनशील हो जाती हैं।
स्थानीय लोगों ने भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि कई कृषि केंद्रों पर निरीक्षण के दौरान व्यापारियों का रवैया सहयोगात्मक नहीं होता। कई बार गलत स्टॉक बेचे जाने, एक्सपायरी उत्पाद रखने या मानक से कम गुणवत्ता वाले सामान बेचने की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे में निरीक्षण जरूरी है, लेकिन हर बार अधिकारी को सम्मानजनक माहौल नहीं मिलता।
पिपरिया और आसपास के क्षेत्रों में इस घटना के बाद चर्चा बढ़ गई कि क्या प्रशासन ऐसे मामलों पर कठोर संदेश दे पाएगा या नहीं। जनता और विभाग दोनों की नजरें पुलिस कार्रवाई पर टिकीं हैं। लोग यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों इसके लिए कार्रवाई सख्त और पारदर्शी हो।
व्यापारी के आक्रामक रवैये के पीछे क्या कारण थे, यह जांच का विषय है। क्या वह किसी अनियमितता को छिपाना चाहता था या निरीक्षण की प्रक्रिया से असहज था, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। लेकिन यह बात तय है कि सरकारी कार्य पर इस प्रकार का व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
इस घटना ने महिला अधिकारियों की सुरक्षा और सरकारी निरीक्षण प्रक्रियाओं की गरिमा को लेकर कई जरूरी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और नजीर पेश करने की दिशा में बढ़ रहा है।
सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यह घटना एक चेतावनी है कि किसी भी निरीक्षण पर जाते समय उन्हें न केवल दस्तावेज तैयार रखना चाहिए बल्कि खुद की सुरक्षा और प्रक्रिया की पारदर्शिता को भी ध्यान में रखना चाहिए। वहीं व्यापारियों के लिए यह घटना स्पष्ट संदेश है कि शासकीय काम में बाधा या धमकी किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
