दुनिया के 20 सबसे बड़े आर्थिक समूहों वाला G-20 शिखर सम्मेलन इस बार नए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो रहा है — क्योंकि पहली बार यह आयोजन अफ्रीकी महाद्वीप में हो रहा है। मेज़बान है — दक्षिण अफ्रीका का खूबसूरत शहर जोहानिसबर्ग।
यह सम्मेलन केवल आर्थिक नीतियों का मसला नहीं, बल्कि वैश्विक समीकरणों, सुरक्षा चुनौतियों और मानवता के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों का मंच है और इस महत्त्वपूर्ण घड़ी में, भारत एक बार फिर मध्यस्थ और संतुलन साधने वाले विश्व नेता के रूप में केंद्र में है।

भारत की अहम भूमिका — विश्व को सहमति तक लाने का मिशन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार दोपहर दक्षिण अफ्रीका पहुँच चुके हैं। उनका लक्ष्य स्पष्ट है —
“ऐसा संयुक्त घोषणापत्र तैयार करवाना जिसमें सभी 20 देश सहमत हों।
मतभेदों के बावजूद सबके हितों का ध्यान रखा जाए।”
विश्व राजनीतिक और आर्थिक तनावों के बीच इस समय एक वैश्विक सहमति बनाना मुश्किल माना जा रहा है। लेकिन भारत ने पिछली बार भी यह कर दिखाया था। 2023 में नई दिल्ली G20 सम्मेलन के दौरान जब यूक्रेन युद्ध के चलते सभी देश विभाजित हो गए थे — भारत ने इंडोनेशिया, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका की मदद से सहमति बनवाकर इतिहास रच दिया था। दुनिया आज वही नेतृत्व एक बार फिर भारत से चाहती है।
अमेरिका का विरोध — विवाद का बड़ा कारण
इस सम्मेलन को अमेरिका खुलकर समर्थन नहीं दे रहा। कारण है — दक्षिण अफ्रीका में गोरे किसानों के खिलाफ सरकारी नीतियों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी। ट्रंप का आरोप है —
- गोरे किसानों के अधिकारों की अनदेखी
- सरकारी अत्याचार
- राजनीतिक भेदभाव
इस वजह से अमेरिकी पक्ष संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति में अड़चन डाल सकता है। यह दुनिया के बड़े देशों के बीच कूटनीतिक टकराव का संकेत भी है। दुनिया की नज़रें अब भारत पर हैं — क्या वह इस कूटनीतिक दूरी को कम कर पाएगा?
G-20 की थीम — भारत के दृष्टिकोण से जुड़ी
सम्मेलन की थीम है — एकजुटता, समानता और सतत विकास (Solidarity, Equality, Sustainability)| यह थीम भारत की वैशिक सोच —
“वसुधैव कुटुंबकम”
“एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य”
से गहराई से मेल खाती है। पीएम मोदी ने कहा—
“भारत अफ्रीकी देशों के साथ मिलकर वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को मजबूत करेगा।”
भारत की पहल पर ही अफ्रीकी संघ को G-20 सदस्यता मिली थी। यह 55 देशों वाले अफ्रीका के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है — और भारत की उभरती वैश्विक भूमिका का प्रमाण भी।
वैश्विक मंच पर महत्वपूर्ण मुलाकातें
मोदी की कई अहम द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय मुलाकातों का भी कार्यक्रम तय है —
- ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीजी
- ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुला दा सिल्वा
- दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा
इन तीनों देशों का मंच — IBSA (India, Brazil, South Africa)
इस समूह के अमेरिका से संबंध इन दिनों तनावपूर्ण हैं। इसलिए यह बैठक विश्व राजनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दक्षिण अफ्रीका में पीएम मोदी का भव्य स्वागत
जोहानिसबर्ग इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत बेहद शानदार तरीके से किया गया।
- पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुति
- सम्मान के साथ प्रणाम
- भारतीय समुदाय का उत्साहपूर्ण स्वागत
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा —
“G20 शिखर सम्मेलन के लिए जोहानिसबर्ग पहुँच गया हूं।
विश्व नेताओं के साथ वैश्विक मुद्दों पर सार्थक चर्चा की अपेक्षा।”
इस संदेश में आगामी सम्मेलन के लिए उनका आत्मविश्वास साफ झलकता है।
संयुक्त घोषणापत्र — चुनौती और उम्मीद
सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या दुनिया की 20 मुख्य अर्थव्यवस्थाएँ एक साझा संदेश दुनिया को दे पाएंगी?
- यूक्रेन युद्ध
- पश्चिमी और विकासशील देशों के बीच खींचतान
- ऊर्जा और व्यापार विवाद
- अमेरिका–अफ्रीका तनाव
इन सबके बीच एकमत होना आसान नहीं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक कह रहे हैं —
“अगर कोई यह काम कर सकता है — तो वह भारत है।”
भारत — विश्व की नई आवाज़
भारत आज विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। बढ़ता प्रभाव इस बात का संकेत है कि — भारत अब दर्शक नहीं, निर्णय निर्माता बन चुका है। और G-20 में उसकी भूमिका यही सिद्ध करेगी कि — भारत का नेतृत्व दुनिया में विश्वास, संतुलन और समाधान का प्रतीक है।
निष्कर्ष
यह सम्मेलन सिर्फ नीति दस्तावेज़ का मुद्दा नहीं — बल्कि दुनिया के भविष्य की दिशा तय करने का समय है। भारत की शांति, सतत विकास और समानता की नीति| आज वैश्विक अपेक्षा बन चुकी है। अगर भारत इस सम्मेलन को सफल दिशा देता है — तो यह नया इतिहास होगा जहाँ वैश्विक नेतृत्व का केंद्र — भारत होगा।
