नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट ने केवल तकनीकी जगत को ही नहीं, बल्कि शेयर बाजार को भी नई दिशा दे दी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर हुई बड़ी घोषणाओं, नई साझेदारियों और मेक इन इंडिया के तहत पेश की गई अत्याधुनिक प्रणालियों ने निवेशकों का उत्साह बढ़ा दिया। समिट के दौरान सामने आई खबरों के बाद एआई से जुड़ी कई कंपनियों के शेयरों में 20 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।

यह तेजी महज सट्टा गतिविधि का परिणाम नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भारत के एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी से हो रहे निवेश और वैश्विक तकनीकी सहयोग के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। निवेशकों को लगने लगा है कि भारत अब केवल एआई का उपभोक्ता नहीं रहेगा, बल्कि वह एआई समाधान और हार्डवेयर निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।
नेटवेब टेक्नोलॉजीज का मेक इन इंडिया एआई सुपरकंप्यूटर
समिट के दौरान नेटवेब टेक्नोलॉजीज ने मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत एनवीडिया की उन्नत तकनीक से लैस नया एआई सुपरकंप्यूटिंग सिस्टम पेश किया। कंपनी ने टायरॉन कैमरेरो जीबी200 सिस्टम और टायरॉन कैमरेरो स्पार्क नाम से दो अत्याधुनिक एआई सिस्टम लॉन्च किए।
टायरॉन कैमरेरो स्पार्क को दुनिया के सबसे छोटे एआई सुपरकंप्यूटरों में से एक बताया जा रहा है। डेस्कटॉप आकार में उपलब्ध यह सिस्टम एनवीडिया ब्लैकवेल जीपीयू, एनवीडिया ग्रेस सीपीयू, एनवीडिया नेटवर्किंग, क्यूडा-एक्स लाइब्रेरी और एनवीडिया एआई सॉफ्टवेयर स्टैक से सुसज्जित है। यह संयोजन डेवलपर्स को एजेंटिक और फिजिकल एआई एप्लिकेशन विकसित करने की क्षमता प्रदान करता है।
यह सिस्टम एक पेटाफ्लॉप की एआई क्षमता और 128 जीबी यूनिफाइड मेमोरी के साथ आता है। डेवलपर्स 200 अरब पैरामीटर तक के एआई मॉडल पर इनफेरेंस चला सकते हैं और 70 अरब पैरामीटर तक के मॉडल को स्थानीय स्तर पर फाइन-ट्यून कर सकते हैं। ऑन-प्रेमिस सेटअप के माध्यम से एडवांस्ड एआई एजेंट विकसित करना भी संभव है।
ऊर्जा दक्षता में ऐतिहासिक सुधार
कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय लोढ़ा ने इसे मेक इन इंडिया मिशन के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम केवल 240 वॉट बिजली पर 1 पेटाफ्लॉप क्षमता प्रदान करता है, जबकि वर्ष 2016 में समान मेमोरी क्षमता वाले सिस्टम के लिए लगभग 3200 वॉट बिजली की आवश्यकता होती थी। यह ऊर्जा दक्षता एआई कंप्यूटिंग के भविष्य को बदल सकती है।
समिट के बाद 18 फरवरी को नेटवेब टेक्नोलॉजीज के शेयर लगभग 11 प्रतिशत तक चढ़ गए। पिछले सात दिनों में भी इसमें 8 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई।
ई2ई नेटवर्क्स और एनवीडिया की साझेदारी
ई2ई नेटवर्क्स के शेयरों में भी जोरदार तेजी देखने को मिली और यह लगभग 20 प्रतिशत तक उछल गए। एनवीडिया के वरिष्ठ अधिकारी जय पुरी ने घोषणा की कि ई2ई नेटवर्क्स अपने टीआईआर प्लेटफॉर्म पर एनवीडिया ब्लैकवेल जीपीयू क्लस्टर तैयार कर रही है। यह क्लस्टर चेन्नई स्थित एलएंडटी व्योमा डेटा सेंटर में होस्ट किया जाएगा।
टीआईआर क्लाउड कंप्यूट प्लेटफॉर्म में एनवीडिया एचजीएक्स बी200 सिस्टम, एनवीडिया एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर और एनवीडिया नेमोट्रॉन ओपन मॉडल शामिल होंगे। इसका उद्देश्य हेल्थकेयर, फाइनेंस, मैन्युफैक्चरिंग और कृषि जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी एआई समाधान को बढ़ावा देना है।
निवेशकों का मानना है कि यह साझेदारी कंपनी को दीर्घकालिक विकास की मजबूत राह पर ले जा सकती है।
ऑरियनप्रो सॉल्यूशंस को बड़ा डेटा सेंटर ऑर्डर
ऑरियनप्रो सॉल्यूशंस के शेयरों में भी 5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। कंपनी को एक वैश्विक डेटा सेंटर डेवलपर और ऑपरेटर से मुंबई में ब्राउनफील्ड डेटा सेंटर सुविधा के डिजाइन और निर्माण का बड़ा ऑर्डर मिला है। यह प्रोजेक्ट अगले तीन तिमाहियों में पूरा किया जाएगा।
कंपनी के एंटरप्राइज बिजनेस प्रमुख भास्कर भट्टाचार्य ने कहा कि यह समझौता उनकी इंजीनियरिंग, डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और कमिशनिंग क्षमताओं पर भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का डेटा सेंटर बाजार एआई वर्कलोड, हाइपरस्केलर विस्तार और सरकारी नीतिगत समर्थन के चलते महत्वपूर्ण मोड़ पर है।
अन्य कंपनियों में भी तेजी
एआई को लेकर बढ़ते उत्साह का असर अन्य कंपनियों पर भी दिखा। अनंत राज और ओरिएंट टेक्नोलॉजीज के शेयरों में लगभग 8 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। डेटा सेंटर को बिजली आपूर्ति करने वाली कंपनियों जैसे कमिंस इंडिया और हिताची एनर्जी के शेयर भी क्रमशः लगभग 3.75 प्रतिशत और 2 प्रतिशत तक चढ़े।
भारत की एआई दौड़ में नई छलांग
समिट से यह संकेत मिला है कि भारत एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर, सुपरकंप्यूटिंग और डेटा सेंटर क्षमता के मामले में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो रहा है। मेक इन इंडिया के तहत उच्च क्षमता वाले एआई सिस्टम का निर्माण और वैश्विक तकनीकी साझेदारी देश को एआई नवाचार का केंद्र बना सकती है।
निवेशकों के लिए यह समय केवल अल्पकालिक तेजी का नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संरचनात्मक बदलाव का संकेत हो सकता है। यदि घोषित परियोजनाएं समय पर और प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो भारत का एआई और डेटा सेंटर बाजार आने वाले वर्षों में अभूतपूर्व विस्तार देख सकता है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि निवेश, नीति और उद्योग का केंद्र बिंदु बन चुका है। भारत इस परिवर्तनकारी तकनीक की दौड़ में अपनी जगह मजबूत करने की दिशा में तेज कदम बढ़ा रहा है।
