भारत जैसे विशाल और विविधताओं से भरे देश के लिए जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं होती, बल्कि यह देश की आत्मा को समझने का सबसे बड़ा माध्यम मानी जाती है। जनसंख्या, शिक्षा, रोजगार, आवास, सामाजिक स्थिति और आर्थिक ढांचे की वास्तविक तस्वीर जनगणना से ही सामने आती है। लंबे समय से टलती आ रही जनगणना को लेकर अब स्थिति स्पष्ट हो चुकी है। केंद्र सरकार ने देश में अगली जनगणना की तारीख की घोषणा कर दी है। एक मार्च 2027 से पूरे देश में जनगणना की प्रक्रिया शुरू होगी और इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा। इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है, क्योंकि इसमें जातियों की गणना को भी शामिल किया जाएगा।

जनगणना की घोषणा और उसका महत्व
सरकार द्वारा जनगणना की तारीख घोषित होते ही देशभर में इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। जनगणना किसी भी देश के लिए नीतिगत फैसलों की आधारशिला होती है। भारत में सरकारी योजनाओं, संसाधनों के वितरण, आरक्षण नीति, निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्सीमन और सामाजिक न्याय से जुड़े निर्णयों में जनगणना के आंकड़े निर्णायक भूमिका निभाते हैं। वर्ष 2011 के बाद से अब तक कोई नई जनगणना नहीं हुई थी, जिससे नीतियों और योजनाओं के लिए पुराने आंकड़ों पर निर्भरता बनी हुई थी। 2027 की जनगणना इस कमी को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया
जनगणना 2027 को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में आवास सूचीकरण और मकान गणना की जाएगी, जिसमें यह दर्ज किया जाएगा कि देश में कितने घर हैं, उनकी संरचना कैसी है, उनमें बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं। दूसरे चरण में वास्तविक जनसंख्या गणना की जाएगी, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक जानकारी एकत्र की जाएगी। इस चरण में उम्र, लिंग, शिक्षा, रोजगार, भाषा, प्रवासन और अन्य सामाजिक पहलुओं से जुड़े प्रश्न शामिल होंगे।
बर्फीले क्षेत्रों में पहले होगी शुरुआत
देश के कुछ हिस्सों में मौसम की चुनौती को देखते हुए जनगणना की प्रक्रिया पहले शुरू की जाएगी। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे बर्फीले क्षेत्रों में अक्टूबर 2026 से ही जनगणना शुरू कर दी जाएगी। इन क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी और दुर्गम परिस्थितियों के कारण लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से हर बार की तरह इस बार भी इन इलाकों में जनगणना पहले कराई जाएगी, ताकि कोई भी नागरिक इस प्रक्रिया से छूट न जाए।
जातिगत जनगणना: दशकों बाद एक बड़ा फैसला
जनगणना 2027 की सबसे अहम और चर्चित विशेषता जातिगत गणना का शामिल होना है। केंद्र स्तर पर दशकों बाद पहली बार जातियों से संबंधित आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। इससे पहले 1931 में ब्रिटिश शासन के दौरान अंतिम पूर्ण जातिगत जनगणना हुई थी। आजादी के बाद अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को छोड़कर अन्य जातियों की विस्तृत गणना नहीं की गई। इस फैसले को सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जातिगत गणना की मांग का इतिहास
देश में जातिगत जनगणना की मांग कोई नई नहीं है। वर्षों से सामाजिक संगठनों, पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधियों और कई राजनीतिक दलों द्वारा यह मांग उठाई जाती रही है कि वास्तविक सामाजिक संरचना को समझने के लिए जातियों के आंकड़े जरूरी हैं। उनका तर्क रहा है कि बिना सही आंकड़ों के सामाजिक न्याय की नीतियां अधूरी रह जाती हैं। शिक्षा, रोजगार और संसाधनों के वितरण में संतुलन तभी संभव है, जब यह पता हो कि किस वर्ग की आबादी कितनी है और उसकी स्थिति क्या है।
सामाजिक न्याय और नीति निर्माण पर प्रभाव
जातिगत जनगणना के आंकड़े आने के बाद सरकार की नीतियों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। आरक्षण नीति, कल्याणकारी योजनाओं और बजट आवंटन में इन आंकड़ों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पिछड़े और वंचित वर्गों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी, जिससे योजनाओं को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकेगा। वहीं कुछ लोग आशंका जताते हैं कि इससे समाज में जातिगत विभाजन और गहरा हो सकता है। इसी वजह से यह विषय संवेदनशील भी माना जाता है।
कोविड महामारी और जनगणना में देरी
भारत में हर दस साल में जनगणना कराई जाती है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी और अगली जनगणना 2021 में प्रस्तावित थी। लेकिन कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। महामारी के कारण देश में लॉकडाउन, सामाजिक दूरी और स्वास्थ्य संकट जैसी स्थितियां बनी रहीं, जिससे जनगणना जैसी व्यापक प्रक्रिया को अंजाम देना संभव नहीं हो सका। इसी वजह से जनगणना को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया था।
2011 की जनगणना और उसके आंकड़े
भारत में 2011 में हुई जनगणना देश की पंद्रहवीं दशकीय जनगणना थी। यह एक मार्च 2011 से शुरू हुई थी और इसके विस्तृत आंकड़े 2013 तक प्रकाशित किए गए थे। इस जनगणना ने देश की जनसंख्या, साक्षरता दर, शहरीकरण, आवास व्यवस्था और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का व्यापक चित्र प्रस्तुत किया था। 2011 के आंकड़ों के अनुसार भारत की जनसंख्या 121 करोड़ से अधिक थी और साक्षरता दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी।
बदलता भारत और नई जनगणना की जरूरत
पिछले डेढ़ दशक में भारत में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। शहरीकरण तेजी से बढ़ा है, आंतरिक प्रवासन में इजाफा हुआ है, डिजिटल क्रांति ने जीवनशैली को बदला है और शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी कई नए आयाम जुड़े हैं। ऐसे में 2011 के आंकड़े अब वर्तमान स्थिति को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करते। 2027 की जनगणना इन सभी बदलावों को दर्ज करेगी और आने वाले वर्षों के लिए योजनाओं की दिशा तय करेगी।
डिजिटल तकनीक और जनगणना
इस बार की जनगणना में डिजिटल तकनीक के व्यापक उपयोग की संभावना जताई जा रही है। मोबाइल ऐप, टैबलेट और ऑनलाइन डेटा संग्रह जैसे माध्यमों से प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाया जा सकता है। इससे आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी और समय पर रिपोर्ट तैयार करना आसान होगा। साथ ही डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर भी विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।
राजनीतिक और सामाजिक बहस
जनगणना 2027, खासकर जातिगत गणना, राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन चुकी है। अलग-अलग दल और संगठन इसे अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। कुछ इसे सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक लाभ के नजरिए से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि आम नागरिकों के लिए इसका सबसे बड़ा महत्व यह है कि इससे देश की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
आम नागरिक की भूमिका
जनगणना तभी सफल होती है, जब हर नागरिक इसमें ईमानदारी से भाग ले। सही जानकारी देना न केवल नागरिक का कर्तव्य है, बल्कि देश के भविष्य के लिए भी जरूरी है। गलत या अधूरी जानकारी नीतियों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए 2027 की जनगणना में लोगों की सक्रिय भागीदारी बेहद अहम होगी।
निष्कर्ष: भारत की नई तस्वीर
जनगणना 2027 केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत की बदलती पहचान का दस्तावेज होगी। जातिगत गणना के साथ यह जनगणना देश की सामाजिक संरचना को नए सिरे से समझने का अवसर देगी। इससे आने वाले दशकों की नीतियां, योजनाएं और विकास की दिशा तय होगी। लंबे इंतजार के बाद शुरू होने जा रही यह प्रक्रिया भारत के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।
