भारत की अर्थव्यवस्था इस समय पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। 8.2% की GDP ग्रोथ के साथ भारत अब विश्व की चौथी सबसे बड़ी इकॉनोमी के रूप में उभर रहा है। इस बढ़ोतरी का असर न केवल आर्थिक सूचकांकों पर दिखाई दे रहा है बल्कि शेयर बाजार में भी यह संरचनात्मक बुलिश मूवमेंट की पुष्टि करता है। वित्तीय विश्लेषक अनुज सिंघल का मानना है कि आने वाले महीनों में बाजार में नई ऊर्जा और तेजी देखने को मिलेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऑटो सेक्टर ने नवंबर में अपनी बिक्री के आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। बजाज और Hyundai को छोड़कर बाकी कंपनियों से लगभग 20% की ग्रोथ की उम्मीद की जा रही है। आयशर, हीरो और TVS जैसी कंपनियों से 25-26% की ग्रोथ की संभावना जताई जा रही है। जबकि Hyundai और बजाज की ग्रोथ करीब 8-9% रहने का अनुमान है। पिछले कुछ वर्षों की तुलना में Q3 सबसे शानदार तिमाही साबित हो सकती है।
इस डेटा से यह संकेत मिलता है कि निवेशक दिसंबर में इस तेजी को पचा लेंगे और बाजार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। निवेशकों को इस अवसर का लाभ उठाते हुए सही निर्णय लेने की आवश्यकता है।
बाजार की स्ट्रक्चरल मजबूती
अनुज सिंघल बताते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत मैक्रो पोजिशन में है। कम महंगाई, स्थिर ब्याज दरें और GST कटौती का असर अब धीरे-धीरे देखने को मिलेगा। अगर ये सभी कारक एक साथ काम करें तो GDP ग्रोथ 10% तक भी पहुँच सकती है। यह ग्रोथ दुनिया के अधिकांश देशों की तुलना में कहीं अधिक है।
निफ्टी और बैंक निफ्टी के लक्ष्य भी निवेशकों के लिए आकर्षक हैं। निफ्टी में 26,500 और बैंक निफ्टी में 60,000 का लक्ष्य जल्द ही हासिल किया जा सकता है। इसके बाद निवेशक और ट्रेलिंग SL को ऊपर की ओर ले जाकर लाभ सुनिश्चित कर सकते हैं।
RBI की मौद्रिक नीतियों पर भी नजरें बनी हुई हैं। मौजूदा माहौल में यह सवाल उठता है कि RBI मौद्रिक दरों में कटौती को कैसे संतुलित करेगा। सरकार और RBI के सहयोग से आर्थिक विकास को और गति दी जा सकती है।
निवेशकों के लिए रणनीति
बाजार में निवेशकों को स्ट्रक्चरली बुलिश रहना चाहिए। बैंक, NBFC और ऑटो सेक्टर में हर गिरावट पर खरीदारी का अवसर मिलेगा। अगर कोई बड़ी ट्रेड डील हुई तो यह बाजार में और तेजी ला सकती है।
थोड़ा सा मेटल्स, IT और फार्मा सेक्टर भी पोर्टफोलियो में शामिल किया जा सकता है। इस समय पोजीशनल शॉर्ट पर ध्यान देने की बजाय वेल्थ क्रिएशन पर फोकस रखना चाहिए। सिगरेट और अल्कोहल बेवरेज शेयरों में निवेश कम रखना ही सही रणनीति है क्योंकि इन पर टैक्स बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सिगरेट, पान मसाला और गुटखा पर सेस के लिए बिल पेश किया जाएगा। इस बदलाव से संबंधित कंपनियों पर असर पड़ेगा, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
निफ्टी और बैंक निफ्टी की तकनीकी समीक्षा
निफ्टी में पहला रजिस्टेंस 26,300-26,350 के स्तर पर है। 26,350 के ऊपर कोई बड़ी रोकावट नहीं है और यह आसानी से 26,500 तक जा सकता है। पहला सपोर्ट 26,150-26,200 के स्तर पर है, जबकि बड़ा सपोर्ट 26,050-26,100 के बीच आता है।
इंट्राडे ट्रेडिंग में 26,200-26,250 का बेस्ट खरीदारी जोन है। इस स्तर पर स्टॉपलॉस 26,150 पर रखा जा सकता है। अगर 26,350 फेल हो जाए तो बेचने का विकल्प अपनाया जा सकता है, जबकि स्टॉपलॉस 26,400 पर लगाए जा सकते हैं।
बैंक निफ्टी में 60,000 का बड़ा लक्ष्य है। इस स्तर पर मुनाफावसूली करना जरूरी है, लेकिन बाजार को bearish नहीं माना जा रहा। लॉन्ग सौदों के लिए 59,700 का ट्रेलिंग SL सेट किया जा सकता है।
ऑटो सेक्टर और नवंबर की बिक्री
नवंबर की ऑटो बिक्री ने संकेत दिए हैं कि Q3 तिमाही शानदार रहेगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आयशर, हीरो और TVS की बिक्री में 25-26% की ग्रोथ देखी जा सकती है। बजाज और Hyundai की बिक्री में 8-9% की बढ़त रहेगी।
इस बिक्री डेटा का असर बाजार पर तेजी के रूप में दिखेगा। निवेशक इस मौके का लाभ उठाकर सही पोर्टफोलियो रणनीति तैयार कर सकते हैं।
निष्कर्ष
भारत की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार इस समय बुलिश मूड में हैं। मजबूत GDP ग्रोथ, कम महंगाई और स्थिर ब्याज दरें बाजार को और ऊंचाई पर ले जाएंगी। बैंक, NBFC और ऑटो सेक्टर में निवेशकों को हर गिरावट पर खरीदारी का अवसर मिलेगा।
अनुज सिंघल का मानना है कि निवेशकों को पोजीशनल शॉर्ट के बजाय लंबी अवधि के लिए पोजीशन बनाए रखनी चाहिए। मेटल्स, IT और फार्मा सेक्टर को भी पोर्टफोलियो में शामिल करना लाभकारी रहेगा।
इस माहौल में डिजिटल और रिटेल निवेशक दोनों के लिए सही रणनीति अपनाना और समय पर निर्णय लेना आवश्यक है। बाजार में तेजी का फायदा उठाने के लिए अब सही समय है।
