भारत सरकार द्वारा पहली बार डिजिटल तकनीक आधारित जनगणना आयोजित करने की योजना ने मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में प्रशासनिक और तकनीकी गतिविधियों को तेज कर दिया है। जनगणना से संबंधित अधिसूचना 16 जून 2025 को भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद बैतूल जिला प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियों की शुरुआत कर दी है। यह डिजिटल जनगणना देश में जनसांख्यिकीय डेटा संग्रहण और विश्लेषण में एक नई क्रांति के रूप में देखी जा रही है।

जिले में जनगणना शुरू होने से लगभग डेढ़ साल पहले ही प्रशासनिक इकाइयों जैसे जिले, तहसील, नगर पालिका और ग्राम स्तर की सीमाओं को अंतिम रूप देने का काम शुरू हो गया है। सांख्यिकी कार्यालय ने विभिन्न विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं ताकि सीमाओं का सत्यापन समय पर पूरा हो सके। इस बार की जनगणना पारंपरिक तरीके की तुलना में पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें डेटा संग्रह, सत्यापन, रिकॉर्डिंग और प्रकाशन सभी चरणों में आधुनिक उपकरण और सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाएगा।
जनगणना दो चरणों में सम्पन्न होगी। पहला चरण मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का होगा, जो मध्यप्रदेश शासन के परामर्श से अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच एक महीने के भीतर पूरा किया जाएगा। इस दौरान प्रत्येक मकान का डिजिटल रूप में रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे डेटा की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। दूसरा चरण वास्तविक जनसंख्या गणना का होगा, जो फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027, रात 12 बजे निर्धारित की गई है। इसका अर्थ है कि इस तारीख और समय पर मौजूद सभी निवासी ही आधिकारिक आंकड़ों में शामिल होंगे।
जनगणना को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए स्व-गणना पोर्टल भी विकसित किया जा रहा है। इस पोर्टल के माध्यम से जिले के नागरिक अपने घर और परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। इससे प्रगणकों का कार्यभार कम होगा और आंकड़ों की सटीकता में वृद्धि होगी। डिजिटल जनगणना 2027 के लिए बैतूल जिला प्रशासन की तैयारियां संकेत देती हैं कि यह प्रक्रिया पूरे प्रदेश और जिले में तकनीकी बदलाव का मार्ग प्रशस्त करेगी।
प्रगणक मोबाइल ऐप की सहायता से मकानों और परिवारों की जानकारी रियल टाइम में दर्ज करेंगे। प्रत्येक गणना ब्लॉक की सीमाएं जीपीएस तकनीक द्वारा कैप्चर की जाएंगी, जिससे डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। जिले में जनगणना प्रशिक्षण के लिए चार मास्टर ट्रेनर चिन्हित किए जा चुके हैं, जो आगे प्रगणकों को प्रशिक्षित करेंगे।
जनगणना 2027 से पहले सीमाओं का सत्यापन महत्वपूर्ण है। राज्य की प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं की फ्रीजिंग 31 दिसंबर 2025 से लागू होगी। इस तारीख के बाद 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक किसी भी जिले, तहसील या ग्राम स्तर पर सीमा परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा। इसी कारण बैतूल जिले में सीमाओं का सत्यापन प्राथमिकता से करवाया जा रहा है। अक्टूबर-नवंबर 2025 के बीच सभी राजस्व और वन ग्रामों की तहसीलवार सूची और नगरीय निकायों के मानचित्र का सत्यापन पूरा करना अनिवार्य होगा।
इस डिजिटल पहल के माध्यम से न केवल पारंपरिक जनगणना प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि आंकड़ों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और सटीकता भी बढ़ेगी। यह पूरी प्रक्रिया बैतूल जिले के प्रशासन और नागरिकों के लिए एक नई तकनीकी चुनौती और अवसर दोनों लेकर आ रही है। डिजिटल जनगणना का सफल आयोजन पूरे देश के लिए भविष्य में जनसांख्यिकीय योजनाओं और नीतियों को मजबूत करने में मदद करेगा।
