साल 2026 की शुरुआत भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा और कूटनीतिक प्रतिष्ठा के लिहाज से एक अहम संकेत लेकर आई है। दुनिया भर के पासपोर्ट की ताजा रैंकिंग में भारत ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट अब 80वें स्थान पर पहुंच गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में पांच स्थानों की छलांग है, जो केवल एक सांख्यिकीय सुधार नहीं बल्कि भारत की वैश्विक कूटनीतिक पहुंच, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और यात्रा सुविधा में धीरे-धीरे हो रहे सशक्त बदलावों का प्रमाण है।

भारतीय पासपोर्ट धारकों को अब 55 देशों में बिना वीजा या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा प्राप्त है। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा अब पहले की तुलना में कहीं अधिक सहज होती जा रही है। हालांकि शीर्ष रैंक वाले देशों से भारत अभी भी काफी पीछे है, लेकिन इस उछाल को एक सकारात्मक दिशा में उठाया गया ठोस कदम माना जा रहा है।
हेनली पासपोर्ट इंडेक्स और उसकी अहमियत
हेनली पासपोर्ट इंडेक्स दुनिया की सबसे विश्वसनीय और चर्चित पासपोर्ट रैंकिंग में से एक है। यह रैंकिंग इस आधार पर तैयार की जाती है कि किसी देश के पासपोर्ट धारक कितने देशों और क्षेत्रों में बिना पहले से वीजा लिए प्रवेश कर सकते हैं। यह केवल यात्रा की सुविधा का मापक नहीं है, बल्कि किसी देश की वैश्विक स्वीकृति, राजनीतिक स्थिरता, कूटनीतिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय भरोसे का भी संकेतक होता है।
भारत का 80वें स्थान पर पहुंचना यह दर्शाता है कि वैश्विक मंच पर देश की छवि में सुधार हुआ है। पिछले वर्ष भारत 85वें स्थान पर था, ऐसे में पांच स्थानों की यह बढ़त किसी संयोग का परिणाम नहीं है, बल्कि वर्षों से चल रहे कूटनीतिक प्रयासों, द्विपक्षीय समझौतों और अंतरराष्ट्रीय संवाद का नतीजा है।
55 देशों में वीजा फ्री एंट्री का महत्व
भारतीय पासपोर्ट धारकों को जिन 55 देशों में वीजा फ्री या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा मिल रही है, वह संख्या भले ही दुनिया के शीर्ष देशों की तुलना में कम हो, लेकिन यह लगातार बढ़ती हुई पहुंच का संकेत है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि व्यापार, शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक नेटवर्किंग के अवसर भी बढ़ते हैं।
भारतीय नागरिकों के लिए वीजा प्रक्रिया अक्सर एक चुनौती रही है। लंबी औपचारिकताएं, समय और खर्च की अधिकता ने अंतरराष्ट्रीय यात्रा को कठिन बना दिया था। ऐसे में वीजा फ्री एंट्री की संख्या में वृद्धि आम भारतीय यात्रियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है।
पिछले वर्षों की तुलना में सुधार
भारत का पांच स्थान ऊपर आना यह दिखाता है कि देश की वैश्विक स्थिति स्थिर नहीं बल्कि प्रगतिशील है। यह सुधार अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे कई वर्षों की कूटनीतिक रणनीति, बहुपक्षीय वार्ताएं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका रही है।
दुनिया के कई देशों के साथ भारत ने यात्रा, व्यापार और निवेश से जुड़े समझौते किए हैं। इसके अलावा, वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय भूमिका और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संतुलित रुख ने भी देश की साख को मजबूत किया है।
शीर्ष पर कौन से देश हैं
2026 की पासपोर्ट रैंकिंग में भी शीर्ष स्थान पर वही देश बने हुए हैं जिनकी अंतरराष्ट्रीय पहुंच लंबे समय से मजबूत रही है। सिंगापुर का पासपोर्ट इस साल भी पहले स्थान पर रहा है। सिंगापुर के नागरिकों को 227 देशों और क्षेत्रों में से 192 स्थानों पर बिना वीजा के प्रवेश की सुविधा मिलती है। यह आंकड़ा बताता है कि सिंगापुर की कूटनीतिक पहुंच कितनी व्यापक और प्रभावशाली है।
जापान और दक्षिण कोरिया संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं। इन दोनों देशों के पासपोर्ट धारकों को 188 देशों में वीजा फ्री एंट्री मिलती है। तीसरे स्थान पर डेनमार्क, लग्जमबर्ग, स्पेन, स्वीडन और स्विट्जरलैंड जैसे यूरोपीय देश हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय साख लंबे समय से मजबूत रही है।
चौथे और पांचवें स्थान पर भी यूरोप और खाड़ी क्षेत्र के देशों का दबदबा दिखाई देता है। इन देशों के नागरिकों को 180 से अधिक देशों में बिना वीजा प्रवेश की सुविधा प्राप्त है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि वैश्विक यात्रा की स्वतंत्रता अभी भी मुख्य रूप से विकसित और आर्थिक रूप से मजबूत देशों के पास केंद्रित है।
भारत अभी कहां पीछे है
हालांकि भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है, लेकिन सच्चाई यह भी है कि देश अभी भी शीर्ष 50 या शीर्ष 30 देशों की सूची से काफी दूर है। भारतीय पासपोर्ट धारकों को अब भी दुनिया के बड़े हिस्से में यात्रा के लिए वीजा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
इसका एक कारण भारत की जनसंख्या का विशाल आकार, प्रवासन से जुड़ी चिंताएं और कुछ देशों के साथ राजनीतिक या सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी हैं। इसके बावजूद, विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा सुधार भविष्य के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है।
पाकिस्तान और बांग्लादेश से तुलना
हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की रैंकिंग में भारत के पड़ोसी देशों की स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पाकिस्तान को इस सूची में 98वां स्थान मिला है, जिसे वह यमन के साथ साझा करता है। इसका अर्थ है कि पाकिस्तानी पासपोर्ट धारकों को दुनिया के बेहद सीमित देशों में ही वीजा फ्री एंट्री की सुविधा प्राप्त है।
बांग्लादेश की स्थिति भी भारत से पीछे है। बांग्लादेश इस रैंकिंग में 95वें स्थान पर है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दक्षिण एशिया में भारत का पासपोर्ट अपने पड़ोसी देशों की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में है।
यह अंतर केवल यात्रा सुविधा का नहीं है, बल्कि यह देशों की अंतरराष्ट्रीय छवि, कूटनीतिक संबंधों और वैश्विक स्वीकार्यता का भी प्रतिबिंब है।
कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय छवि की भूमिका
पासपोर्ट की ताकत किसी देश की विदेश नीति का मौन प्रमाण होती है। भारत की रैंकिंग में सुधार यह संकेत देता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को एक जिम्मेदार, स्थिर और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।
वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय भूमिका, विकासशील देशों की आवाज बनना, और संतुलित कूटनीति ने कई देशों के साथ रिश्तों को बेहतर किया है। इसका सीधा असर यात्रा समझौतों और वीजा छूट पर भी पड़ता है।
आम भारतीय के लिए क्या मायने
भारतीय पासपोर्ट की बढ़ती ताकत का सीधा लाभ आम नागरिकों को मिलता है। पर्यटन के शौकीन लोग, छात्र, कारोबारी और प्रवासी भारतीय सभी इसके लाभार्थी हैं। वीजा फ्री या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा से यात्रा न केवल आसान होती है, बल्कि समय और खर्च दोनों की बचत भी होती है।
इसके साथ ही, भारतीय युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय अवसरों के द्वार खुलते हैं। शिक्षा, स्टार्टअप, वैश्विक सम्मेलनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भागीदारी अब पहले की तुलना में अधिक सुलभ हो सकती है।
भविष्य की दिशा
भारत की पासपोर्ट रैंकिंग में यह सुधार अंत नहीं बल्कि एक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यदि आने वाले वर्षों में कूटनीतिक प्रयास इसी तरह जारी रहे, तो भारत की स्थिति और बेहतर हो सकती है। अधिक देशों के साथ यात्रा समझौते, व्यापारिक सहयोग और आपसी विश्वास से भारतीय पासपोर्ट की ताकत बढ़ने की संभावना है।
दुनिया तेजी से बदल रही है और अंतरराष्ट्रीय यात्रा अब केवल सुविधा नहीं बल्कि वैश्विक जुड़ाव का प्रतीक बन चुकी है। ऐसे में भारत का इस दिशा में आगे बढ़ना देश के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।
