भारत और रूस के बीच लंबे समय से मित्रवत और रणनीतिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों ने समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौते किए हैं। अब इन संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने वाला है। हाल ही में रूस ने संकेत दिए हैं कि भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत तेज़ होने वाली है। यह एग्रीमेंट न केवल भारत और रूस के लिए बल्कि पूरे यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के लिए भी ऐतिहासिक महत्व रखता है। यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन में रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं, और यह क्षेत्र अपने विशाल संसाधनों और उद्योगों के लिए जाना जाता है।

रूसी उप प्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक ने बताया कि हाल ही में भारत और रूस के बीच पहला राउंड की बैठक सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। उन्होंने कहा कि भारत एक तेजी से विकसित होता हुआ और विशाल बाजार है। ऐसे बाजार में रूसी उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए यह एग्रीमेंट दोनों देशों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। साथ ही, यह सौदा अमेरिका के लिए एक अप्रत्याशित झटका भी हो सकता है, क्योंकि अमेरिकी व्यापार पर भारत ने कई तरह के टैरिफ लगाए हैं।
भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के बीच वार्ता का उद्देश्य
भारत ने औपचारिक रूप से रूस के नेतृत्व वाले यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए वार्ता शुरू की है। इस एग्रीमेंट के तहत भारतीय व्यवसायों, किसानों, मछुआरों और विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए नए बाजार खोले जाएंगे। वार्ता की रूपरेखा में 18 महीने का रोडमैप तय किया गया है, जिसका उद्देश्य व्यापार बाधाओं को दूर करना और कनेक्टिविटी को बढ़ाना है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह समझौता भारतीय व्यवसायियों के लिए नए अवसर खोल सकता है। भारतीय निर्यातकों को रूसी बाजार में प्रतिस्पर्धी लाभ मिलेगा और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संतुलन और बढ़ेगा।
भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि
भारत और रूस की साझेदारी कई दशकों पुरानी है। अक्टूबर 2000 में भारत-रूस सामरिक भागीदारी घोषणापत्र के तहत दोनों देशों ने राजनीतिक, सुरक्षा, रक्षा, विज्ञान, तकनीक, संस्कृति और आर्थिक क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाया। दिसंबर 2010 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने इसे “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया।
इस साझेदारी का उद्देश्य केवल राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग नहीं है, बल्कि आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाना है। इसी सहयोग तंत्र के तहत भारत-रूस अंतर सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) कार्यरत है, जिसमें दोनों देशों के उच्च अधिकारी व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक मामलों पर वार्ता करते हैं।
व्यापार और आर्थिक सहयोग की दिशा
भारत और रूस 2030 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए काम कर रहे हैं। इसके अलावा, 2025 तक 50 बिलियन डॉलर का आपसी निवेश और 2030 तक वार्षिक व्यापार में 100 बिलियन डॉलर का लक्ष्य रखा गया है। द्विपक्षीय व्यापार में तेजी आई है और वित्त वर्ष 2024-25 में यह 68.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
भारतीय निर्यात का मुख्य क्षेत्र फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, लोहा और इस्पात तथा समुद्री उत्पाद हैं। वहीं रूस से आयात में मुख्य रूप से कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, सूरजमुखी तेल, उर्वरक, कोकिंग कोल और कीमती धातु/पत्थर शामिल हैं। इस व्यापारिक संतुलन को देखते हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों देशों के लिए लाभकारी रहेगा।
एफटीए का भारत के लिए महत्व
भारत-रूस एफटीए से भारतीय उत्पादों को रूसी बाजार में पहुंचाने में मदद मिलेगी। इसके तहत भारतीय उद्योगों को कम टैरिफ और आसान लॉजिस्टिक सुविधा मिलेगी। किसानों और मछुआरों के लिए नए निर्यात मार्ग खुलेंगे। साथ ही, एमएसएमई सेक्टर को भी वैश्विक बाजार में प्रवेश का अवसर मिलेगा।
इस समझौते से अमेरिकी टैरिफ नीति का असर कम होगा और भारत-रूस व्यापारिक रिश्तों को सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। रूसी अधिकारियों का मानना है कि भारत के साथ मजबूत व्यापारिक रिश्ते स्थापित करने से दोनों देशों को लाभ होगा और व्यापारिक सहयोग में नए अवसर पैदा होंगे।
भारत और रूस के सहयोग के सामाजिक और तकनीकी पहलू
दोनों देशों का सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। विज्ञान, तकनीक, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देश गहरे संबंध रखते हैं। इस सहयोग से तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में नई संभावनाएं उत्पन्न होंगी। भारतीय युवाओं और व्यवसायियों के लिए यह नए अवसरों के द्वार खोलेगा।
निष्कर्ष: व्यापारिक अवसर और रणनीतिक बढ़त
भारत-रूस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट न केवल दोनों देशों के लिए आर्थिक लाभ देगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर रणनीतिक संतुलन को भी प्रभावित करेगा। यह अमेरिका के लिए अप्रत्याशित चुनौती हो सकती है। भारत के लिए यह अपने उद्योग, एमएसएमई, किसानों और निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलेगा। रूस के लिए यह भारतीय बाजार में अपनी पहुंच और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का अवसर होगा।
इस एग्रीमेंट के पूरी तरह लागू होने से 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना संभव होगा और दोनों देशों के आर्थिक तथा रणनीतिक रिश्ते और मजबूत होंगे।
