भारत और अमेरिका के बीच हुआ नया रक्षा सौदा दक्षिण एशिया के सामरिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित करने वाला माना जा रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा FGM-148 जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम और एक्सकैलिबर सटीक-मारक आर्टिलरी प्रोजेक्टाइल की संभावित बिक्री को मंजूरी दिए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग का स्तर नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है।
अमेरिका से लगभग 93 मिलियन डॉलर (करीब 775 करोड़ रुपये) के दो सौदों को मंजूरी मिलना इस बात का संकेत है कि भारतीय सेना की ताकत में आने वाले महीनों में भारी वृद्धि देखने को मिलेगी। इस सौदे को लेकर पाकिस्तान में चिंता बढ़ना लाजमी है, क्योंकि जैवलिन मिसाइल सिस्टम उन दुश्मन टैंकों और बख़्तरबंद वाहनों के लिए सबसे घातक हथियार माना जाता है, जिन पर दक्षिण एशिया में सैन्य शक्ति का बड़ा हिस्सा टिका हुआ है।

भारत को मिली सबसे उन्नत एंटी-टैंक मिसाइल: जैवलिन सिस्टम
FGM-148 Javelin दुनिया की सबसे विश्वसनीय और अत्याधुनिक एंटी-टैंक मिसाइलों में से एक है। यह मिसाइल न सिर्फ़ लड़ाई के मैदान में टैंकों के लिए खतरा बनती है, बल्कि यह बख्तरबंद गाड़ियों, बंकरों और ठिकानों को अत्यंत सटीकता के साथ नष्ट करने की क्षमता के लिए भी जानी जाती है।
जैवलिन मिसाइल की तकनीकी क्षमता — आधुनिक युद्ध का ‘गेम चेंजर’
जैवलिन मिसाइल को “फायर-एंड-फॉरगेट” तकनीक के कारण सबसे lethal सिस्टम माना जाता है। इसका अर्थ है कि मिसाइल छोड़ने के बाद सैनिकों को लक्ष्य की ओर देखना भी नहीं पड़ता। मिसाइल स्वयं अपने टार्गेट को ट्रैक करती है और उसे नष्ट करती है।
इस मिसाइल की सबसे घातक क्षमता टॉप-अटैक मोड है। किसी भी टैंक का सबसे कमजोर हिस्सा उसका ऊपरी भाग होता है — जैवलिन सीधे वहीं प्रहार करती है, जिससे आधुनिक से आधुनिक टैंक भी इसकी मार से नहीं बच पाते।
मुकाबले में मिसाइल का प्रदर्शन: विश्वभर में सफलता
विश्व के कई संघर्ष क्षेत्रों — जैसे यूक्रेन–रूस युद्ध — में जैवलिन का प्रदर्शन दुनिया ने देखा है। मिसाइल ने अत्यंत कम समय में आधुनिक टैंकों को ध्वस्त किया और बख्तरबंद यूनिटों को भारी नुकसान पहुंचाया। यही कारण है कि इसे टैंक-किलर का दर्जा दिया जाता है।
अब यही क्षमता भारतीय सेना के हाथों में आने जा रही है।
भारत द्वारा की गई मांग: 100 जैवलिन मिसाइलें और पूरा सपोर्ट सिस्टम
रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (DSCA) के अनुसार भारत ने अमेरिका से जो मांग की है, उसमें शामिल हैं—
- 100 जैवलिन मिसाइलें
- 1 टेस्ट फ्लाई-टू-बाय मिसाइल
- 25 कमांड लॉन्च यूनिट्स
- ट्रेनिंग सिस्टम
- सिमुलेशन राउंड
- स्पेयर पार्ट्स
- और पूरी लाइफ-साइकिल सपोर्ट
अमेरिकी एजेंसी का कहना है कि ये सभी उपकरण भारतीय सेना की क्षमता को मौजूदा और भविष्य के खतरों से निपटने के लिए बेहद सशक्त बनाएंगे।
एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल: लंबी दूरी पर सटीक निशाने का ‘साइलेंट हथियार’
जैवलिन मिसाइल के अलावा अमेरिका ने M982 एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल की संभावित बिक्री को भी मंजूरी दी है। यह प्रोजेक्टाइल लंबी दूरी से अत्यंत सटीक निशाना लगाने की क्षमता के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है।
सटीकता का स्तर: 1 से 2 मीटर की त्रुटि सीमा
50 किमी से अधिक दूरी पर भी एक्सकैलिबर की त्रुटि सीमा बेहद कम मानी जाती है। यह GPS-guided प्रोजेक्टाइल दुश्मन के बंकर, ठिकानों, कमांड सेंटर और स्ट्रैटेजिक पॉइंट्स पर surgical-level प्रहार करता है।
युद्ध के दौरान इस तरह के हथियार सैन्य बढ़त सुनिश्चित करते हैं क्योंकि इनका उपयोग दुश्मन की हथियार प्रणाली, गोला-बारूद भंडार, बैरक और कमांड पोस्ट पर किया जाता है।
भारत के लिए यह क्षमता उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर निर्णायक साबित हो सकती है।
दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन पर क्या असर?
जैवलिन मिसाइलों के आने से भारतीय सेना की एंटी-टैंक क्षमता में तीव्र वृद्धि होगी। पाकिस्तान के पास इस समय पुराने मॉडल के कई टैंक हैं, जिनमें से अधिकांश जैवलिन जैसे आधुनिक हथियारों के विरुद्ध पर्याप्त सुरक्षा नहीं रखते।
इस हथियार की एक और विशेषता — IR सीकर — जामिंग या इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से बचने में भी सक्षम है। इसका मतलब है कि यह मिसाइल दुश्मन की तकनीकी कोशिशों से भी प्रभावित नहीं होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन मिसाइलों के आने से भारत का पश्चिमी मोर्चा और अधिक मजबूत होगा और युद्ध की स्थिति में दुश्मन की बख़्तरबंद टुकड़ियों के लिए भारी खतरा पैदा होगा।
मौजूदा सैन्य सहयोग और भविष्य का परिदृश्य
भारत पहले से अमेरिका के साथ कई सैन्य प्रौद्योगिकियों पर काम कर रहा है —
- MH-60R हेलिकॉप्टर
- P-8I नेवल विमान
- गार्जियन ड्रोन
- M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्ज़र
अब जैवलिन और एक्सकैलिबर जैसे हथियार भारत को और अधिक सक्षम बनाते हैं।
70% तक स्वदेशीकरण पर ध्यान देने वाले भारत के लिए ये हथियार नई पीढ़ी की प्रणालियों के लिए तकनीकी आधार भी तैयार करते हैं। भविष्य में “Make in India” के तहत इनके स्थानीय उत्पादन पर भी बातचीत हो सकती है।
भारत को प्रत्यक्ष लाभ: युद्धक्षमता कई गुना बढ़ेगी
- दुश्मन टैंकों के खिलाफ अभूतपूर्व क्षमता
- उच्च सटीकता वाले आर्टिलरी प्रहार
- रात्रि युद्ध की बढ़ी हुई क्षमता
- पहाड़ी और संकरे इलाकों में उपयोग की सुविधा
- आधुनिक युद्ध क्षेत्र में इंटरऑपरेबिलिटी
- दुश्मन के स्ट्रैटेजिक संसाधनों को पंगु करने की क्षमता
भारत पहले ही सीमित मात्रा में जैवलिन और एक्सकैलिबर का उपयोग करता रहा है। नए सौदों से इन हथियारों की संख्या और उनकी रणनीतिक तैनाती दोनों में वृद्धि होगी।
