मध्यप्रदेश में हवाई यात्रा इन दिनों अचानक से एक ऐसे संकट का सामना कर रही है जिसने हजारों यात्रियों के सामने अनिश्चितता की स्थिति खड़ी कर दी है। देश की प्रमुख एयरलाइन कंपनी इंडिगो की लगातार रद्द हो रही उड़ानों ने यात्रियों को भारी परेशानी में डाल दिया है। इस स्थिति ने न केवल यात्रियों की यात्रा योजनाओं को अस्त-व्यस्त किया है, बल्कि आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव भी दिया है।

पिछले कुछ दिनों में देशभर में इंडिगो द्वारा लगभग 1700 से अधिक उड़ानें रद्द की गईं। इसका सीधा असर मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों भोपाल, इंदौर और जबलपुर पर पड़ा। कई यात्रियों की हवाई यात्राएं रुक गईं, योजनाएं धरी रह गईं और हजारों लोग एयरपोर्ट पर घंटों तक इंतजार करते रहे।
भोपाल में सबसे बड़ा संकट, 18 उड़ानें अचानक रद्द
राजधानी भोपाल का एयरपोर्ट इन दिनों सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। सोमवार देर रात और मंगलवार सुबह हवाई यात्रियों के मोबाइल पर अचानक संदेश आया जिसमें उड़ानों के रद्द होने की सूचना दी गई। यह सूचना सबको नहीं मिली और कई यात्री पूर्व निर्धारित समय पर हवाई अड्डे तक पहुंच गए।
वहीं एयरपोर्ट पर कई यात्रियों ने बताया कि वे पिछले दो दिनों से उड़ान दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बार-बार फ्लाइट शेड्यूल बदलने की वजह से वे असमंजस में हैं।
क्रू की अनुपलब्धता के कारण कंपनी ने इन उड़ानों को रद्द करने का निर्णय लिया। कंपनी के अनुसार यह समस्या अस्थायी है, लेकिन यात्रियों का कहना है कि यह समस्या अचानक नहीं आई बल्कि पहले से इसकी जानकारी यात्री सेवा विभाग को होनी चाहिए थी।
इंदौर में स्थिति गंभीर, अन्य एयरलाइनों ने बढ़ाया किराया
इंदौर में यात्रियों की स्थिति और भी तनावपूर्ण रही। कई यात्रियों को यहां से उड़ानें रद्द होने के बाद दूसरे विकल्पों का सहारा लेना पड़ा। अचानक बढ़ी मांग का फायदा उठाते हुए अन्य एयरलाइंस ने किराया दो से चार गुना तक बढ़ा दिया।
कई यात्रियों ने बताया कि वे दिल्ली, मुंबई, पुणे और हैदराबाद जाने के लिए टिकट बदलवाने आए, लेकिन उपलब्ध सीटें सीमित थीं। इसके अलावा टिकट का किराया इतना अधिक दिखा कि कई लोगों ने अपनी यात्रा ही रद्द कर दी।
कई यात्रियों ने साफ कहा कि यह सीधी आर्थिक चोट है और ऐसी स्थिति में यात्रियों को राहत प्रदान की जानी चाहिए थी।
एयरपोर्ट पर तनावपूर्ण माहौल, यात्रियों का आक्रोश, सुरक्षा बढ़ाई गई
भोपाल और इंदौर एयरपोर्ट पर यात्रियों का धैर्य टूट गया। कई घंटों इंतजार के बाद यात्रियों ने एयरलाइन काउंटर पर जाकर जवाब मांगा। कई यात्रियों ने हंगामा किया और नाराजगी जताई।
एयरपोर्ट स्टाफ ने यात्रियों को आश्वासन दिया कि जल्द पुनर्निर्धारित उड़ानें शुरू की जाएंगी, लेकिन यात्रियों द्वारा धमकियां, बहस और शिकायतों को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बढ़ानी पड़ी।
कई बुजुर्ग यात्रियों ने कहा कि लंबी प्रतीक्षा और कोई ठोस समाधान न मिलने के कारण उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हुई है।
जबलपुर में 10 उड़ानें रद्द, 1000 यात्रियों पर प्रभाव
मध्यप्रदेश के तीसरे प्रमुख एयरपोर्ट जबलपुर में स्थिति उतनी ही गंभीर रही। यहां से लगभग दस उड़ानों को रद्द किया गया।
जिन यात्रियों ने पहाड़ों, धार्मिक स्थलों, कैंपस जॉइनिंग, मेडिकल उपचार और व्यापारिक बैठकों के लिए उड़ानें बुक की थीं, उन्हें स्थानीय रुकने की व्यवस्था करनी पड़ी।
कई यात्रियों ने कहा कि सूचना केवल संदेश के रूप में आई, लेकिन वह भी देर से मिली। कुछ यात्रियों ने यह तक कहा कि उन्हें एयरलाइन हेल्पलाइन में बार-बार कॉल करने पर भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
इंडस्ट्री सूत्रों से संभावित कारण
उद्योग सूत्रों के अनुसार यह संकट निम्न कारणों से उत्पन्न हुआ माना जा रहा हैः
- एक बड़ी संख्या में प्रशिक्षित क्रू स्टाफ अस्थायी रूप से ड्यूटी से बाहर है।
- कुछ अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उच्च दबाव के कारण घरेलू उड़ानों का शेड्यूल प्रभावित हुआ।
- तकनीकी रखरखाव और विमान आवंटन व्यवस्था बाधित हुई।
ऐसी समस्याओं के समाधान में सामान्यतः कुछ सप्ताह तक का समय लगता है।
यात्रियों की मांग: पारदर्शी सूचना, मुफ्त रीशेड्यूलिंग और कुछ राहत
यात्रियों ने एयरलाइन के सामने कुछ मांगें रखीं जो इस प्रकार हैं:
- तुरंत और सटीक सूचना देना
- बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के रीबुकिंग
- अगर टिकट रद्द हो तो पूरा रिफंड
- नि:शुल्क भोजन और होटल की व्यवस्था
- वैकल्पिक उड़ानें
कई यात्रियों ने कहा कि बड़े स्तर पर प्रभावित लोगों को ध्यान में रखते हुए आपात उपाय अपनाए जाने चाहिए।
पर्यटन, व्यापार और शिक्षा पर असर
मध्यप्रदेश का हवाई मार्ग व्यापार, पर्यटन और शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस संकट से प्रभावित हुएः
- कॉर्पोरेट मीटिंग्स
- विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया
- राजनैतिक दौरों
- स्वास्थ्य उपचार यात्राएं
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटक
एक प्रमुख व्यापार मंडल के अनुसार केवल इंदौर में एक दिन में करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।
क्या समाधान जल्द मिल सकता है?
हवाई विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार की स्थिति में स्थिरता आने में 7 से 14 दिन तक लग सकते हैं।
यदि क्रू स्टाफ अपनी ड्यूटी पर वापस आता है तथा विमान आवंटन सामान्य होने लगता है, तब उड़ानें फिर सामान्य हो जाएंगी।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश का हवाई तंत्र फिलहाल संकट से गुजर रहा है और यात्रियों के लिए यह स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण है।
यह स्पष्ट है कि सूचना, व्यवस्था और वैकल्पिक विकल्पों का सही और समय पर प्रबंधन भविष्य में इस प्रकार की समस्या को सीमित कर सकता है।
