मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर ने बीते एक दशक में शहरी विकास, स्वच्छता और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में जिस तरह लगातार नई ऊंचाइयां छुई हैं, उसी क्रम में देवी अहिल्याबाई होलकर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट भी लंबे समय तक देश के बेहतरीन हवाई अड्डों में गिना जाता रहा है। यात्रियों की सुविधाओं, संचालन की गुणवत्ता और समग्र अनुभव के आधार पर यह एयरपोर्ट लगातार शीर्ष रैंकिंग में बना हुआ था। लेकिन अब एयरपोर्ट सर्विस क्वालिटी यानी ASQ सर्वे की ताजा रिपोर्ट ने इंदौर एयरपोर्ट के लिए एक चेतावनी की घंटी बजा दी है।

2025 की चौथी तिमाही, यानी अक्टूबर से दिसंबर के बीच किए गए ASQ सर्वे में इंदौर एयरपोर्ट की रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई है। पिछली तिमाही में चौथे स्थान पर रहने वाला यह एयरपोर्ट अब छठे स्थान पर पहुंच गया है। रैंकिंग में यह गिरावट केवल संख्या का खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे वे कारण छिपे हैं जो भविष्य में एयरपोर्ट की छवि और यात्रियों के भरोसे को प्रभावित कर सकते हैं।
ASQ सर्वे क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण
एयरपोर्ट सर्विस क्वालिटी सर्वे को दुनिया भर में हवाई अड्डों की सेवा गुणवत्ता का सबसे विश्वसनीय पैमाना माना जाता है। यह सर्वे सीधे यात्रियों से प्राप्त फीडबैक पर आधारित होता है, जिसमें एयरपोर्ट पर प्रवेश से लेकर उड़ान तक के हर चरण का अनुभव शामिल होता है। यात्रियों से पूछे गए सवालों के आधार पर विभिन्न मानकों पर अंक दिए जाते हैं और उन्हीं अंकों के आधार पर रैंकिंग तय होती है।
इस सर्वे में साफ-सफाई, सुरक्षा जांच, चेक-इन प्रक्रिया, बैगेज हैंडलिंग, प्रतीक्षालय की सुविधा, स्टाफ का व्यवहार, सूचना प्रणाली और समग्र संतुष्टि जैसे कई पहलुओं को शामिल किया जाता है। इसलिए ASQ रैंकिंग में गिरावट का मतलब यह है कि यात्रियों के अनुभव में कहीं न कहीं कमी महसूस की गई है।
चौथे से छठे स्थान तक का सफर
इंदौर एयरपोर्ट ने पिछली तिमाही में चौथा स्थान हासिल कर यह दिखाया था कि सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर प्रबंधन और यात्रियों के प्रति संवेदनशीलता से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। लेकिन ताजा रिपोर्ट में यह एयरपोर्ट दो पायदान नीचे खिसक गया है।
रैंकिंग में यह गिरावट अचानक नहीं आई है, बल्कि यह उन छोटे-छोटे पहलुओं का परिणाम है, जिन्हें समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया। ASQ सर्वे के अनुसार, इंदौर एयरपोर्ट के कुल अंकों में तीन बिंदुओं की कमी दर्ज की गई है, जिसने उसकी समग्र रैंकिंग को प्रभावित किया।
किन कारणों से घटे अंक
रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर एयरपोर्ट को जिन तीन प्रमुख बिंदुओं पर अपेक्षाकृत कम अंक मिले, वे सीधे यात्रियों के रोजमर्रा के अनुभव से जुड़े हुए हैं। इनमें भीड़ प्रबंधन, कुछ समयों पर सुरक्षा जांच में लगने वाला अतिरिक्त समय और टर्मिनल के भीतर यात्री सुविधाओं का दबाव शामिल है।
पिछले कुछ महीनों में इंदौर से उड़ानों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। नए रूट्स और बढ़ती यात्री संख्या ने एयरपोर्ट के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ा दिया है। इसका असर सुरक्षा जांच और चेक-इन काउंटरों पर दिखाई देने लगा, जहां पीक आवर्स में यात्रियों को अपेक्षाकृत अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा।
इसके अलावा, कुछ यात्रियों ने प्रतीक्षालयों में बैठने की व्यवस्था और साफ-सफाई को लेकर भी औसत से कम संतुष्टि जाहिर की। हालांकि इंदौर एयरपोर्ट की स्वच्छता को लेकर उसकी छवि अब भी बेहतर मानी जाती है, लेकिन बढ़ती भीड़ के कारण इसे बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
यात्रियों के अनुभव में बदलाव
ASQ सर्वे का सबसे अहम पहलू यह है कि यह यात्रियों की वास्तविक अनुभूति को सामने लाता है। इंदौर एयरपोर्ट से यात्रा करने वाले कई नियमित यात्रियों ने माना कि एयरपोर्ट अब भी सुविधाजनक है, लेकिन पहले जैसी सहजता और गति कुछ हद तक कम हुई है।
विशेष रूप से त्योहारों और छुट्टियों के दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ने पर सुरक्षा जांच और बैगेज क्लेम में देरी की शिकायतें सामने आईं। कुछ यात्रियों ने यह भी महसूस किया कि सूचना डिस्प्ले और स्टाफ की उपलब्धता में सुधार की गुंजाइश है, ताकि पहली बार यात्रा करने वाले यात्रियों को ज्यादा आसानी हो।
प्रतिस्पर्धा भी बनी चुनौती
देश के अन्य प्रमुख एयरपोर्ट्स भी लगातार अपनी सेवाओं में सुधार कर रहे हैं। कई एयरपोर्ट्स ने डिजिटल तकनीक, ऑटोमेटेड चेक-इन और स्मार्ट सिक्योरिटी सिस्टम को अपनाकर यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाया है। ऐसे में रैंकिंग की दौड़ में बने रहना पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।
इंदौर एयरपोर्ट की रैंकिंग में गिरावट का एक कारण यह भी माना जा रहा है कि अन्य एयरपोर्ट्स ने तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे इंदौर पीछे छूट गया। इसका मतलब यह नहीं है कि इंदौर की सेवाएं अचानक खराब हो गई हैं, बल्कि यह दर्शाता है कि प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी बढ़ गया है।
प्रशासन और प्रबंधन की प्रतिक्रिया
एयरपोर्ट प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि रैंकिंग में गिरावट को गंभीरता से लिया गया है और सुधार के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि बढ़ती यात्री संख्या को देखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधनों को मजबूत करने की आवश्यकता है।
प्रबंधन स्तर पर यह भी स्वीकार किया गया है कि कुछ प्रक्रियाओं को और अधिक सुव्यवस्थित करने की जरूरत है, ताकि यात्रियों को न्यूनतम समय में अधिकतम सुविधा मिल सके। आने वाले महीनों में सुरक्षा जांच और चेक-इन प्रक्रिया को तेज करने के लिए अतिरिक्त काउंटर और तकनीकी संसाधन जोड़े जाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
इंदौर एयरपोर्ट का महत्व
देवी अहिल्याबाई होलकर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट केवल इंदौर शहर के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मालवा और निमाड़ क्षेत्र के लिए हवाई संपर्क का प्रमुख केंद्र है। व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन के लिहाज से इस एयरपोर्ट की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।
इंदौर की औद्योगिक गतिविधियों और निवेश के बढ़ते अवसरों के कारण यहां बिजनेस ट्रैवलर्स की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में एयरपोर्ट की सेवा गुणवत्ता सीधे तौर पर शहर की छवि से जुड़ जाती है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
ASQ रैंकिंग में आई यह गिरावट इंदौर एयरपोर्ट के लिए आत्ममंथन का अवसर भी है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं, तो यह एयरपोर्ट एक बार फिर शीर्ष रैंकिंग में वापसी कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, डिजिटल सेवाओं का बेहतर उपयोग और स्टाफ ट्रेनिंग पर ध्यान देकर यात्रियों के अनुभव को फिर से बेहतर बनाया जा सकता है। साथ ही, यात्रियों से नियमित फीडबैक लेकर छोटी-छोटी समस्याओं का त्वरित समाधान भी जरूरी है।
यात्रियों की उम्मीदें
इंदौर के यात्रियों को अब भी अपने एयरपोर्ट से काफी उम्मीदें हैं। शहर की पहचान स्वच्छता, अनुशासन और नवाचार से जुड़ी रही है और यही अपेक्षा एयरपोर्ट से भी की जाती है।
यात्रियों का मानना है कि यदि प्रबंधन बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं का विस्तार करे और प्रक्रियाओं को और अधिक सुगम बनाए, तो इंदौर एयरपोर्ट फिर से अपनी खोई हुई रैंकिंग हासिल कर सकता है।
निष्कर्ष
इंदौर एयरपोर्ट की रैंकिंग में आई यह गिरावट एक अस्थायी चुनौती के रूप में देखी जा सकती है, बशर्ते इससे सीख लेकर सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। ASQ सर्वे ने उन बिंदुओं को उजागर किया है, जिन पर ध्यान देकर न केवल रैंकिंग सुधारी जा सकती है, बल्कि यात्रियों का अनुभव भी और बेहतर बनाया जा सकता है।
शहर की तरह ही एयरपोर्ट के लिए भी यह जरूरी है कि वह निरंतर सुधार की सोच को अपनाए और बदलती जरूरतों के साथ खुद को ढाले। तभी इंदौर एक बार फिर देश के सर्वश्रेष्ठ एयरपोर्ट्स की सूची में शीर्ष स्थान की ओर बढ़ सकेगा।
