इंदौर के विजय नगर इलाके में एक ई-रिक्शा की बैटरी जोरदार धमाके के साथ फट गई, जिससे वाहन में सवार मां-बेटी झुलस गईं। सड़क पर अचानक उठे धुएं और चीख-पुकार ने आसपास के लोगों को दहशत में डाल दिया। इस घटना ने पूरे प्रदेश में चिंता बढ़ा दी है और सवाल उठाए हैं कि क्या ई-रिक्शा में सफर वाकई सुरक्षित है।
भोपाल में ई-रिक्शा चालकों और बैटरी सुरक्षा विशेषज्ञों से बातचीत में यह स्पष्ट हुआ कि इस तरह की घटनाओं के पीछे तकनीकी और रखरखाव से जुड़ी गलतियां होती हैं। यह घटना केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए चिंता का कारण बन गई है जो रोजाना ई-रिक्शा से यात्रा करता है।

ई-रिक्शा को पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प और कम किराया वाला वाहन माना जाता है, लेकिन बैटरी विस्फोट जैसी घटनाएं इसके उपयोगकर्ताओं के मन में डर पैदा कर रही हैं। ऐसे हादसों को रोकने के लिए प्रशासन, चालक और यात्रियों को मिलकर सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।
यात्रियों की प्रतिक्रिया और सुरक्षा की चिंता
हादसे के बाद इंदौर से लेकर भोपाल तक ई-रिक्शा यात्रियों में घबराहट साफ नजर आ रही है। कई यात्री मानते हैं कि ई-रिक्शा छोटी दूरी के लिए सुविधाजनक तो है, लेकिन सुरक्षा में सुधार की सख्त जरूरत है। एनडी रमपुरिया, एक स्थानीय यात्री कहते हैं, “ई-रिक्शा को सवारी के हिसाब से सुरक्षित बनाना चाहिए। बैटरी फटने जैसी घटनाओं की गारंटी नहीं, लेकिन रोकथाम जरूर होनी चाहिए।”
यात्रियों का कहना है कि वाहन की नियमित जांच और प्रमाणित बैटरियों का उपयोग ही सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित कर सकता है। उन्होंने प्रशासन और वाहन निर्माताओं से अनुरोध किया कि सभी ई-रिक्शाओं में मानक सुरक्षा नियमों का पालन हो।
ई-रिक्शा चालकों की चुनौतियां
भोपाल में ई-रिक्शा चालकों से बातचीत में सामने आया कि वे पूरी सावधानी के साथ वाहन चलाते हैं। अधिकांश चालक प्रमाणित और कंपनी द्वारा प्रदत्त बैटरियों का उपयोग करते हैं। इसके बावजूद हर दिन वाहन की बैटरी की जांच करना और उसका सही रखरखाव करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी बनती है।
समीर खान बताते हैं, “बैटरी रोजाना चेक होनी चाहिए, तभी हादसे का जोखिम कम होगा।” अर्सद अली कहते हैं, “हमें हर बारीकी का पता होना चाहिए। छोटी गलती भी भारी पड़ सकती है।” दीपक सेन बताते हैं, “बैटरी ओवरचार्ज नहीं करनी चाहिए। अगर गरम हो तो तुरंत जांच करवाएं।”
चालकों का कहना है कि बैटरी विस्फोट जैसी घटनाओं को रोकने के लिए वाहन कंपनियों और सरकार को मिलकर प्रशिक्षण, नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों को लागू करना चाहिए।
एक्सपर्ट की राय: बैटरी विस्फोट की तकनीकी वजहें
ई-व्हीकल बैटरी विशेषज्ञ विकास गुर्जर का कहना है कि बैटरी विस्फोट अचानक नहीं होता। इसके पीछे कई तकनीकी और उपयोग संबंधी गलतियां होती हैं। उन्होंने चार मुख्य बिंदुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई:
- अमानक या नॉन-सर्टिफाइड बैटरी का उपयोग
- ओवरचार्जिंग यानी बैटरी को अधिक समय तक चार्ज करना
- ओवरहीटिंग यानी अत्यधिक गर्म होना
- ओवरलोड यानी निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर चलना
उन्होंने बताया कि अगर ये चार प्रमुख मुद्दे नियंत्रित हों तो हादसों की संभावना बहुत कम हो जाती है। इसके लिए बैटरी की नियमित जांच, प्रमाणित बैटरी का उपयोग, चार्जिंग समय का पालन और वाहन की तय क्षमता से अधिक भार न रखना अनिवार्य है।
बैटरी रखरखाव और सही प्रैक्टिस
विशेषज्ञों के अनुसार, बैटरी का सही रखरखाव सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा है। BIS प्रमाणित बैटरी का उपयोग, चार्जिंग के लिए समय सीमा और उचित वेंटिलेशन का पालन, वाहन को निर्धारित भार से अधिक न चलाना और 3-4 महीने में सर्विस कराना सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।
गलत प्रैक्टिस जैसे लोकल/अनब्रांडेड बैटरी का उपयोग, रातभर बंद जगह में चार्जिंग, ओवरलोड और सालभर सर्विस न करवाना सीधे सुरक्षा जोखिम पैदा करते हैं। इसलिए चालक, यात्री और वाहन निर्माता मिलकर इन नियमों का पालन करें।
प्रशासन और वाहन कंपनियों की भूमिका
ई-रिक्शा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन, वाहन निर्माता और चालक तीनों की जिम्मेदारी बनती है। प्रशासन को नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों को लागू करना चाहिए। वाहन कंपनियों को प्रमाणित और सुरक्षित बैटरी उपलब्ध कराना अनिवार्य है। चालक को नियमों का पालन करना और बैटरी की नियमित जांच करनी चाहिए।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ई-रिक्शा में यात्रा करना पर्यावरण के लिए अच्छा है, लेकिन सुरक्षा को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
निष्कर्ष
इंदौर की घटना ने ई-रिक्शा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों, चालकों और प्रशासन को मिलकर ऐसे उपाय अपनाने होंगे ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटनाओं से बचा जा सके। सही बैटरी, नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों का पालन ही सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा सुनिश्चित कर सकता है।
ई-रिक्शा यात्रियों को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प देने के लिए सभी को जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा।
