सोशल मीडिया जहां आज युवाओं के लिए अभिव्यक्ति, जानकारी और मनोरंजन का बड़ा मंच बन चुका है, वहीं इसकी एक अंधेरी सच्चाई भी सामने आ रही है। इंदौर में हाल ही में सामने आया मामला यह दिखाता है कि कैसे कुछ सेकंड की एक इंस्टाग्राम रील चार इंजीनियरिंग छात्रों के भविष्य पर भारी पड़ गई। आसान कमाई और जल्दी अमीर बनने की लालसा में ये छात्र जाली नोटों के अवैध कारोबार में फंस गए और अंततः पुलिस की गिरफ्त में आ गए।

इंदौर पुलिस की अपराध शाखा ने कार्रवाई करते हुए चार इंजीनियरिंग छात्रों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से दो लाख रुपये के नकली नोट बरामद किए गए हैं। ये सभी 500-500 रुपये के नोट थे, जिन्हें असली मुद्रा के रूप में बाजार में खपाने की तैयारी की जा रही थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस पूरे मामले की शुरुआत इंस्टाग्राम पर देखी गई एक रील से हुई, जिसने इन युवाओं को अपराध के रास्ते पर धकेल दिया।
इंस्टाग्राम रील से शुरू हुआ लालच का खेल
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि आरोपियों ने इंस्टाग्राम पर एक ऐसी रील देखी थी, जिसमें जाली नोटों की खरीद-फरोख्त को बेहद आसान और फायदे का सौदा बताया गया था। वीडियो में दावा किया गया था कि कुछ हजार रुपये देकर कई गुना नकली नोट हासिल किए जा सकते हैं, जिन्हें आसानी से बाजार में चलाया जा सकता है।
रील में दिए गए संपर्क नंबर पर कॉल करने के बाद आरोपियों की एक अज्ञात व्यक्ति से बातचीत हुई। सौदा तय हुआ कि पांच हजार रुपये के असली नोट देने पर बीस हजार रुपये के नकली नोट मिलेंगे। यह डील सुनने में इतनी आसान और लाभकारी लगी कि चारों छात्र बिना ज्यादा सोचे-समझे इसमें शामिल हो गए।
पढ़ाई और नौकरी के बावजूद अपराध की ओर झुकाव
चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किए गए चारों युवक इंजीनियरिंग डिप्लोमा कर चुके हैं और नौकरी भी कर रहे थे। वे किसी आर्थिक तंगी या मजबूरी से नहीं, बल्कि जल्दी पैसा कमाने के लालच में इस अपराध की ओर बढ़े। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला बताता है कि शिक्षा और रोजगार के बावजूद नैतिक मूल्यों की कमी और सोशल मीडिया का गलत प्रभाव युवाओं को अपराध की ओर मोड़ सकता है।
इन छात्रों ने आपस में पैसे इकट्ठा किए और जाली नोटों का ऑर्डर दे दिया। कुछ ही समय बाद उन्हें बताया गया कि नोट एक निश्चित स्थान पर रख दिए जाएंगे और वहां से वे खुद आकर ले सकते हैं।
सुनसान इलाके में डिलीवरी और गायब हुआ सप्लायर
आरोपियों के बयान के अनुसार, सप्लायर ने उन्हें इंदौर के सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में बुलाया। एक तय जगह पर जाली नोट रख दिए गए और सप्लायर वहां से चला गया। कुछ समय बाद जब छात्रों ने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की तो संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट पाया गया और मोबाइल नंबर भी बंद हो चुका था।
इससे यह स्पष्ट हो गया कि जाली नोटों के इस रैकेट के पीछे कोई संगठित और चालाक गिरोह काम कर रहा है, जो सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसाकर खुद गायब हो जाता है।
पुलिस की सतर्कता से खुला मामला
इंदौर पुलिस की अपराध शाखा को इस अवैध गतिविधि की भनक लग चुकी थी। तकनीकी निगरानी और मुखबिर तंत्र के जरिए पुलिस ने चारों आरोपियों को सदर बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत गुटकेश्वर महादेव मंदिर के पास से गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से 500 रुपये के कुल 400 जाली नोट बरामद किए गए, जिनकी कुल कीमत दो लाख रुपये बताई गई।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती, तो ये नकली नोट बाजार में खपाए जा सकते थे, जिससे आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचता और आम लोग ठगी का शिकार होते।
जाली नोटों का नेटवर्क और साइबर जांच
इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस अब केवल चार छात्रों तक सीमित नहीं रह गई है। अपराध शाखा की तकनीकी टीम उस व्यक्ति या गिरोह की तलाश कर रही है, जिसने सोशल मीडिया के जरिए यह जाल बिछाया। इंस्टाग्राम अकाउंट, कॉल डिटेल्स और डिजिटल ट्रांजेक्शन से जुड़े हर पहलू की जांच की जा रही है।
अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह केवल इंदौर तक सीमित नहीं हो सकता और देश के अन्य शहरों में भी इसी तरह के तरीके अपनाए जा रहे होंगे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस तरह की रील्स और विज्ञापन तेजी से युवाओं को निशाना बना रहे हैं।
सोशल मीडिया और अपराध का खतरनाक मेल
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि यह अपराधियों के लिए एक प्रभावी हथियार बन चुका है। नकली निवेश योजनाएं, अवैध वस्तुओं की बिक्री और अब जाली नोटों की खरीद-फरोख्त जैसे अपराध खुलेआम सोशल मीडिया पर प्रचारित किए जा रहे हैं।
युवा वर्ग, जो तेजी से डिजिटल दुनिया से जुड़ रहा है, इन झूठे वादों और लालच में आसानी से फंस जाता है। इस मामले में भी छात्रों ने यह नहीं सोचा कि जाली नोट रखना और चलाना गंभीर अपराध है, जिसकी सजा वर्षों की कैद तक हो सकती है।
भविष्य पर पड़ा गहरा असर
चारों छात्रों के लिए यह एक ऐसी भूल साबित हुई है, जिसका असर उनके पूरे जीवन पर पड़ सकता है। न केवल उनकी पढ़ाई और नौकरी पर सवाल खड़े हो गए हैं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा और परिवार की साख भी दांव पर लग गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला अन्य युवाओं के लिए एक चेतावनी है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चमकदार चीज सच नहीं होती। आसान पैसा कमाने के रास्ते अक्सर अपराध और तबाही की ओर ले जाते हैं।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
इस घटना के बाद पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार यह सलाह दे रहे हैं कि युवा सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले किसी भी अवैध या संदिग्ध ऑफर से दूरी बनाए रखें। जाली नोट, ड्रग्स, फर्जी निवेश या किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि इससे जीवन भर की मेहनत एक पल में बर्बाद हो सकती है।
परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज की भी जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को सही दिशा दें और उन्हें डिजिटल दुनिया के खतरों से अवगत कराएं।
