सर्दी के मौसम की दस्तक के साथ ही इंदौर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से सामने आने लगी हैं। खासतौर पर नवंबर और दिसंबर के दौरान तापमान में अचानक आई गिरावट का असर अब आम लोगों की सेहत पर साफ दिखाई दे रहा है। वायरल संक्रमण, सर्दी-खांसी और बुखार के मामलों के साथ-साथ अब चेहरे के लकवे यानी फेशियल पाल्सी के मरीजों की संख्या में भी चिंताजनक वृद्धि दर्ज की जा रही है।\

शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में से एक एमवाय अस्पताल में बीते ढाई महीनों में 125 से अधिक मरीज चेहरे के लकवे की शिकायत लेकर पहुंचे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है और अगर समय पर इलाज न मिले तो मरीजों को लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
क्या है फेशियल पाल्सी और क्यों होता है यह रोग
फेशियल पाल्सी, जिसे आम भाषा में बेल पाल्सी भी कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें चेहरे की मांसपेशियां अचानक कमजोर हो जाती हैं या पूरी तरह से काम करना बंद कर देती हैं। इसके कारण मरीज का चेहरा एक तरफ झुक जाता है, आंख पूरी तरह बंद नहीं हो पाती और बोलने या मुस्कुराने में कठिनाई होने लगती है। कई मामलों में स्वाद लेने की क्षमता भी प्रभावित होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या मुख्य रूप से चेहरे की नसों में सूजन या दबाव के कारण होती है। ठंड का सीधा असर नसों पर पड़ता है, जिससे उनका कार्य बाधित हो सकता है। इसके अलावा वायरल संक्रमण, कमजोर इम्यून सिस्टम और अचानक ठंडी हवा के संपर्क में आना भी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।
सर्दी के मौसम में क्यों बढ़ रहे हैं मामले
इंदौर में इस वर्ष नवंबर और दिसंबर के दौरान तापमान में अचानक गिरावट देखने को मिली है। दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर होने से शरीर को अनुकूलन में समय लगता है। डॉक्टरों के अनुसार, लोग अक्सर ठंड से बचाव में लापरवाही बरतते हैं, जैसे बिना ढंके ठंडी हवा में बाहर निकलना, देर रात तक जागना या गुनगुने कपड़ों का उपयोग न करना।
इसके साथ ही सर्दियों में वायरल संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। वायरल इंफेक्शन से कमजोर हुई नसें चेहरे के लकवे का कारण बन सकती हैं। अस्पताल में आने वाले कई मरीजों में पहले सर्दी, जुकाम या बुखार के लक्षण पाए गए हैं, जिसके कुछ दिनों बाद चेहरे में लकवे की शिकायत शुरू हुई।
अस्पतालों में बढ़ता दबाव और इलाज की स्थिति
एमवाय अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग में इन दिनों चेहरे के लकवे के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट रोजाना ऐसे कई मरीजों का इलाज कर रहे हैं जिन्हें अचानक चेहरे में टेढ़ापन या सुन्नता महसूस हुई।
चिकित्सकों का कहना है कि शुरुआती 48 से 72 घंटे इस बीमारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। अगर इस समय के भीतर सही इलाज शुरू कर दिया जाए तो मरीज पूरी तरह से ठीक हो सकता है। इलाज में दवाओं के साथ-साथ फिजियोथेरेपी की अहम भूमिका होती है, जिससे चेहरे की मांसपेशियों को दोबारा सक्रिय किया जाता है।
समय पर इलाज न मिलने पर क्या हो सकता है नुकसान
अगर चेहरे के लकवे को नजरअंदाज किया जाए या घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहा जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है। कई मामलों में चेहरे की मांसपेशियां स्थायी रूप से कमजोर हो जाती हैं, जिससे मरीज की सामाजिक और मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ता है।
डॉक्टरों का कहना है कि देर से इलाज शुरू होने पर आंखों में सूखापन, बोलने में परेशानी और चेहरे की असमानता लंबे समय तक बनी रह सकती है। इसलिए जैसे ही चेहरे में सुन्नता, झुकाव या असामान्य हरकत महसूस हो, तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
बचाव के लिए क्या करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सर्दी के मौसम में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। ठंडी हवा से चेहरे को ढंककर रखना, अचानक ठंडे वातावरण में जाने से बचना और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और गर्म पानी का सेवन भी मददगार साबित हो सकता है।
इसके अलावा, सर्दी-जुकाम या वायरल संक्रमण को हल्के में न लें और जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज कराएं। यह छोटी सी सावधानी चेहरे के लकवे जैसी गंभीर समस्या से बचा सकती है।
बढ़ती जागरूकता की जरूरत
इंदौर में बढ़ते मामलों को देखते हुए डॉक्टरों का मानना है कि लोगों में इस बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। चेहरे के लकवे को अक्सर लोग स्ट्रोक समझकर घबरा जाते हैं या फिर इसे नजरअंदाज कर देते हैं। सही जानकारी और समय पर इलाज से इस समस्या को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने के साथ मामलों में और इजाफा हो सकता है। ऐसे में सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
