इंदौर, मध्य प्रदेश — एक ऐसा शहर जो अपनी स्वच्छता, संस्कृति और विकास के लिए जाना जाता है, आज एक ऐसे मामले से सुर्खियों में है जिसने न केवल शहर की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि युवाओं को चेतावनी भी दी है कि “हर वर्दीदार शख्स पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।”
हाल ही में इंदौर पुलिस ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है जो खुद को पुलिस आरक्षक (Constable) बताकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही युवतियों को नौकरी लगवाने का लालच देता था। इस आरोपी ने एक युवती से छह लाख रुपये की मांग की थी। जब पुलिस ने उसकी तहकीकात की, तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं—वह ड्रग्स का आदी निकला और पहले भी आपराधिक मामलों में लिप्त रहा था।

घटना की शुरुआत – भरोसे के नाम पर धोखा
यह मामला तब सामने आया जब एक युवती, जो पुलिस भर्ती की तैयारी कर रही थी, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उसने बताया कि एक व्यक्ति ने खुद को “आरक्षक” बताया और कहा कि वह पुलिस विभाग में उसकी नौकरी लगवा सकता है, लेकिन इसके लिए उसे ₹6 लाख देने होंगे।
आरोपी ने सरकारी प्रक्रिया की झूठी कहानी गढ़ी और युवती को यह विश्वास दिलाया कि उसके “ऊपर तक” संपर्क हैं। युवती शुरुआत में थोड़ा संदेह में थी, लेकिन आरोपी की बोलचाल, वर्दी में तस्वीरें और आत्मविश्वास देखकर उसने बात पर भरोसा कर लिया।
मोबाइल से मिला अपराध का नेटवर्क
पुलिस ने जब आरोपी को गिरफ्तार किया, तो उसके मोबाइल फोन की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मोबाइल में कई युवतियों के नंबर सेव थे, जिनमें से कुछ से उसने “नौकरी के नाम पर बातचीत” की थी। कई चैट्स में उसने पुलिस भर्ती की फर्जी सूची, दस्तावेज़ और नियुक्ति पत्र जैसे फोटो भेजे थे। इसके अलावा, मोबाइल में नशे से जुड़ी तस्वीरें और वीडियोज़ भी मिले। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह नशे का आदी है और पहले भी बागली (देवास जिला) में आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार हो चुका है।
आरोपी की पहचान और पिछला रिकॉर्ड
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी का नाम संदीप पाटीदार (बदला हुआ नाम) है। वह इंदौर के आसपास के ग्रामीण इलाके में रहता था और पिछले कई सालों से छोटे-मोटे अपराधों में संलिप्त था। उसने ड्रग्स के सेवन की लत के कारण कई बार चोरी और ठगी की घटनाएं की थीं। संदीप ने पुलिस भर्ती में खुद के फेल होने के बाद यह रास्ता चुना। वह भर्ती प्रक्रिया को समझता था और उसी का फायदा उठाकर दूसरों को झांसे में लेता था।
ठगी का तरीका – साइकोलॉजिकल ट्रिक का इस्तेमाल
संदीप लोगों को फंसाने के लिए “विश्वास की मनोविज्ञान” का इस्तेमाल करता था। वह पहले युवाओं से सामान्य बातचीत करता, फिर धीरे-धीरे “दोस्ताना संबंध” बनाता। फिर कहता कि “मैं भी पुलिस में हूं, चाहो तो तुम्हें अंदर से मदद कर दूं।” वह भर्ती प्रक्रिया की तारीखों, परीक्षा केंद्रों और दस्तावेजों की जानकारी ऐसे देता था जैसे वह किसी अंदरूनी अधिकारी से जुड़ा हो।
पुलिस की कार्रवाई और बयान
इंदौर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,
“आरोपी पेशेवर ठग है। उसने सोशल मीडिया और वॉट्सऐप के माध्यम से कई लोगों को निशाना बनाया। हमने उसका मोबाइल जब्त कर लिया है और अब डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है।”
सूत्रों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ अब तक तीन और मामले अलग-अलग थानों में दर्ज हैं, जिनमें ठगी और नशा सेवन शामिल हैं।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
पुलिस ने आरोपी पर आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 419 (भेष बदलकर ठगी), और NDPS Act के तहत केस दर्ज किया है।
साथ ही, साइबर पुलिस भी जांच में जुड़ी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं।
युवतियों के लिए सबक – सतर्क रहें
यह घटना एक बड़ी चेतावनी है उन युवतियों के लिए जो नौकरी की तलाश में हैं। हर कोई जो “सरकारी नौकरी दिलवाने” का वादा करे, जरूरी नहीं कि सच्चा हो। पुलिस ने भी अपील की है कि —
“कोई भी व्यक्ति यदि आपसे पैसे मांगता है नौकरी के नाम पर, तो तुरंत पुलिस में शिकायत करें।”
ऑनलाइन ठगी का बढ़ता ट्रेंड
आज के डिजिटल युग में ठगी के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैसेजिंग ऐप्स और ईमेल के जरिए लोग बड़ी चतुराई से जाल बिछा रहे हैं। इंदौर जैसे शिक्षित शहर में भी, ऐसे मामलों का होना इस बात का संकेत है कि “ऑनलाइन जागरूकता” की कमी अब भी मौजूद है।
ड्रग्स की लत और अपराध का रिश्ता
संदीप के मामले में यह स्पष्ट दिखा कि नशे की लत कैसे एक व्यक्ति को अपराध की ओर धकेल देती है। वह पहले नौकरी पाने में असफल हुआ, फिर नशे का शिकार बना, और फिर पैसा पाने के लिए ठगी का रास्ता चुना। यह सामाजिक रूप से भी एक गंभीर संकेत है कि बेरोजगारी, मानसिक तनाव और नशे की उपलब्धता युवाओं को अपराध की ओर ले जा रही है।
समाज और परिवार की भूमिका
ऐसे मामलों में समाज और परिवार दोनों की जिम्मेदारी होती है। माता-पिता को अपने बच्चों की गतिविधियों, दोस्तों और ऑनलाइन व्यवहार पर नजर रखनी चाहिए। पुलिस विभाग ने भी कहा है कि आने वाले दिनों में युवाओं के लिए “जागरूकता अभियान” चलाया जाएगा ताकि वे ऐसे फर्जीवाड़ों का शिकार न बनें।
समापन – न्याय और सुधार की उम्मीद
आरोपी फिलहाल जेल में है, और पुलिस उसकी गिरफ्तारी से जुड़े अन्य मामलों की पड़ताल कर रही है। यह मामला एक उदाहरण है कि अपराध कितना योजनाबद्ध तरीके से किया जा सकता है — लेकिन सतर्क नागरिक और जागरूक समाज ही इसका सबसे बड़ा समाधान हैं।
