मध्यप्रदेश की राजधानी इंदौर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुननिरीक्षण (एसआईआर) के दौरान महिला बीएलओ और अन्य सहायिकाओं को लगातार अश्लील कॉल्स की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यह मामला केवल व्यक्तिगत उत्पीड़न तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में महिलाओं की सुरक्षा और उनके कार्यस्थल की चुनौतियों पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

इंदौर जिले में एसआईआर प्रक्रिया के तहत 2625 पोलिंग बूथों पर बीएलओ और सहायक मतदाताओं के फार्म भरवाने में लगे हैं। इनमें दो हजार से अधिक शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसमें लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं हैं। महिला बीएलओ का काम जटिल है। उन्हें मतदाताओं तक पहुँचकर फार्म भरवाने होते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान उनका मोबाइल नंबर सर्वे फार्म में अंकित होने के कारण असामाजिक तत्व आसानी से उनका संपर्क कर लेते हैं।
अश्लील कॉल्स का मामला
माध्यमिक स्कूल की एक महिला शिक्षिका ने बताया कि उन्हें एक युवक द्वारा लगातार तीन दिनों तक अलग-अलग नंबरों से फोन किया गया। शुरुआती दिन उन्होंने सोचा कि यह एसआईआर कार्य से जुड़ा मामला होगा, लेकिन जब युवक ने अश्लील शब्दों का प्रयोग करना शुरू किया, तो स्थिति गंभीर हो गई। शिक्षिका ने तत्काल महिला हेल्पलाइन नंबर 1091 पर संपर्क किया और इसके बाद 112 से भी कॉल आई। पुलिस और अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई।
शिक्षिका ने बताया कि युवक लगातार नए नंबरों से फोन कर परेशान करता रहा। पहले उनका नंबर ब्लॉक किया, लेकिन अगले दिन सुबह सात बजे नए नंबर से कॉल आया। इस प्रकार कई अन्य शिक्षिकाएं भी देर रात फोन और अश्लील संदेशों से परेशान हैं। यह न केवल मानसिक तनाव बढ़ा रहा है, बल्कि उनके एसआईआर कार्य को भी प्रभावित कर रहा है।
महिला बीएलओ और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की स्थिति
एसआईआर प्रक्रिया में महिला बीएलओ और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। बच्चों को पढ़ाने और उनके स्कूल के काम से हटकर उन्हें मतदाता फार्म भरवाने और मतदाताओं तक पहुंचने की चुनौती से जूझना पड़ रहा है। इस दौरान महिलाओं को मानसिक और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के उत्पीड़न न केवल कार्य की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और आत्मविश्वास पर भी गंभीर असर डालते हैं।
प्रशासन और पुलिस की सक्रियता
महिला शिक्षिका ने जैसे ही शिकायत दर्ज कराई, प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया। 112 और महिला हेल्पलाइन 1091 के माध्यम से मामले की जांच शुरू कर दी गई। जिला निर्वाचन अधिकारी को भी इस घटना की जानकारी दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि एसआईआर कार्य महिलाओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। दूरभाष और डिजिटल माध्यमों से उत्पीड़न के मामलों को रोकने के लिए सभी पोलिंग बूथों और बीएलओ के मोबाइल नंबरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए तकनीकी उपाय और कानून व्यवस्था की सख्ती बढ़ाई जाएगी।
एसआईआर प्रक्रिया और महिला शिक्षकों की भूमिका
मध्यप्रदेश सहित देश के बारह राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुननिरीक्षण की प्रक्रिया जारी है। यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सुनिश्चित करती है कि सभी योग्य मतदाता सूची में शामिल हों और कोई छूट न जाए। इंदौर में एसआईआर प्रक्रिया में महिला शिक्षिकाओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को इस जिम्मेदारी के लिए चुना गया है।
इन महिलाओं का कार्य केवल फार्म भरवाना नहीं है। उन्हें मतदाताओं के घर जाकर सही जानकारी एकत्र करनी होती है, साथ ही मतदाता फार्म में किसी भी त्रुटि को सुधारना होता है। इस दौरान उन्हें कई सामाजिक और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मोबाइल नंबर की उपलब्धता से उन्हें आसानी से असामाजिक तत्वों का संपर्क मिल जाता है, जिससे कार्य और सुरक्षा दोनों प्रभावित होते हैं।
शिक्षकों और विद्यार्थियों पर प्रभाव
इंदौर जिले में दो हजार से अधिक शिक्षक एसआईआर कार्य में लगे हुए हैं। इसके कारण कई स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई स्कूलों में ताले लग गए हैं, और बच्चों को शिक्षकों की अनुपस्थिति में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति वार्षिक परीक्षा और शैक्षिक परिणामों पर भी असर डाल सकती है।
महिला शिक्षिकाओं को मानसिक और सामाजिक दबाव झेलना पड़ रहा है। देर रात फोन और अश्लील संदेश उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल रहे हैं। प्रशासन ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में महिला बीएलओ और अन्य सहायिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
