इंदौर के एमवाय अस्पताल में हाल ही में एक ऐसी घटना हुई जिसने स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कबड्डी की राष्ट्रीय महिला खिलाड़ी को एक्सपायर्ड एंटीबायोटिक लगाने का मामला सामने आया, जिससे न केवल खिलाड़ी की स्वास्थ्य सुरक्षा खतरे में पड़ी, बल्कि चिकित्सा विभाग की लापरवाही भी उजागर हुई।

घटना के तुरंत बाद अस्पताल प्रबंधन ने जांच शुरू की और यह पाया गया कि तीन नर्सों ने अपनी जिम्मेदारी में गंभीर लापरवाही बरती। इसके चलते प्रशासन ने नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की।
घटना की पृष्ठभूमि और प्रारंभिक जानकारी
घटना एमवाय अस्पताल के मेडिसिन विभाग में हुई। राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी अपनी चिकित्सा जांच और इलाज के लिए अस्पताल में उपस्थित थीं। उपचार के दौरान, उन्हें एंटीबायोटिक दवा दी गई, जो अपनी एक्सपायरी डेट पार कर चुकी थी।
जांच में यह पता चला कि नर्सिंग ऑफिसर आसमा अंजुम ने दवा देने में लापरवाही बरती, जिससे खिलाड़ी के स्वास्थ्य को तत्काल खतरा पैदा हो गया। इस मामले में अस्पताल प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया।
अन्य स्टाफ की लापरवाही
जांच में यह भी सामने आया कि इंचार्ज नर्सिंग ऑफिसर नैना गौतम ने दवाओं की सही तरीके से मॉनिटरिंग नहीं की। इसके चलते उनकी वेतन वृद्धि रोकने का प्रस्ताव रखा गया।
सीनियर नर्सिंग ऑफिसर एंजलिना विल्फ्रेड ने स्टोर और स्टॉक रजिस्टर का सही रखरखाव नहीं किया, जिससे अस्पताल में दवाओं की स्थिति पर निगरानी कमजोर हो गई। उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।
खेल और स्वास्थ्य सुरक्षा का महत्व
राष्ट्रीय खिलाड़ी को एक्सपायर्ड दवा देने की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि खेल और स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर ध्यान देना आवश्यक है। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और फिटनेस उनके प्रदर्शन और करियर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में अस्पताल में लापरवाही न केवल स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करती है बल्कि खेल संस्थानों और राष्ट्रीय खेल प्रतिष्ठान की छवि पर भी असर डालती है।
खेलकूद के उच्च स्तर पर, खिलाड़ी की स्वास्थ्य सुरक्षा और चिकित्सा देखभाल का सख्त पालन किया जाना चाहिए। एमवाय अस्पताल जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में इस तरह की लापरवाही गंभीर सवाल खड़े करती है।
अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना के तुरंत बाद एमवाय अस्पताल के निदेशक ने मीडिया और अधिकारियों को बताया कि अस्पताल किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद संबंधित नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल ने यह भी सुनिश्चित किया कि भविष्य में दवाओं की मॉनिटरिंग और स्टॉक रजिस्टर का सख्त पालन किया जाएगा। इसके अलावा, सभी स्टाफ को स्वास्थ्य सुरक्षा और नैतिकता के प्रशिक्षण में शामिल किया जाएगा।
समाज और खेल समुदाय की प्रतिक्रिया
खिलाड़ी और उनके परिवार के साथ खेल समुदाय ने भी इस मामले को लेकर चिंता व्यक्त की। यह घटना खिलाड़ियों के लिए चेतावनी का संदेश है कि स्वास्थ्य और सुरक्षा की उपेक्षा खेल और करियर दोनों पर गहरा प्रभाव डाल सकती है।
खेल संस्थान और राष्ट्रीय खेल संगठन इस मामले में अस्पताल प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने यह भी दिखाया कि स्वास्थ्य और खेल प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय और निगरानी की आवश्यकता है।
भविष्य के उपाय और सुधार
एमवाय अस्पताल ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियमित ऑडिट, दवाओं की समय-समय पर जाँच, स्टॉक रजिस्टर की समीक्षा और नर्सिंग स्टाफ की प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाएंगे।
इसके अलावा, अस्पताल ने स्वास्थ्य सुरक्षा और नैतिकता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सभी कर्मचारियों के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं।
यह घटना न केवल एक चिकित्सा लापरवाही की कहानी है, बल्कि यह खिलाड़ियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती की दिशा में सुधार की जरूरत को भी उजागर करती है।
