इंदौर शहर में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन को कई सवालों और संभावित खतरों पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। शहर में किरायेदारों की विस्तृत जांच के दौरान पता चला कि एक केन्याई नागरिक, रिचर्ड मयाका स्वान्या, पिछले 27 वर्षों से इंदौर में बिना वैध वीजा के रह रहा है। यह जानकारी किसी आकस्मिक पूछताछ में नहीं, बल्कि शहर के विभिन्न इलाकों में चल रही सख्त सत्यापन प्रक्रिया के दौरान सामने आई, जिसने प्रशासन को चौंका दिया।
शहर में बाहरी लोगों की गतिविधियों के प्रति बढ़ती सतर्कता और हाल ही में देश की राजधानी में हुई कुछ घटनाओं ने पुलिस को दस्तावेज़ों की जांच को लेकर और अधिक सक्रिय कर दिया है। इसी क्रम में यह मामला दोबारा उजागर हुआ और जांच एजेंसियों ने इसकी गंभीरता को देखते हुए फिर से संज्ञान लिया।

रिचर्ड का शहर में रहना कोई नया तथ्य नहीं है। वह पहली बार सन 1991 में इंदौर आया था और तभी से यह शहर उसका ठिकाना बन गया। उसने यहां की स्थानीय यूनिवर्सिटी से बीकॉम की पढ़ाई पूरी की। लेकिन इसी पढ़ाई और रहने के दौरान उसकी वीजा अवधि कब खत्म हो गई और कब उसने दस्तावेज़ों को अपडेट नहीं कराया, इसका स्पष्ट रिकॉर्ड अब तक नहीं मिला है। प्रशासन का दावा है कि उसका वीजा वर्ष 1998 में समाप्त हो गया था और उसके बाद से वह बिना किसी वैध अनुमति के भारत में रह रहा है।
इंदौर में जीवन की शुरुआत और शिक्षा की कहानी
यह घटना जितनी प्रशासनिक दृष्टि से गंभीर है, उतनी ही यह मानव जीवन के एक अनोखे अध्याय को भी सामने लाती है। रिचर्ड मयाका स्वान्या मूल रूप से केन्या के नियामाचे नामक क्षेत्र का निवासी है। भारत आने के बाद उसने इंदौर के प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थान, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में बीकॉम की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया था। छात्र जीवन का रिकॉर्ड बताता है कि वह अपनी पढ़ाई में नियमित रहा और लंबे समय तक यहां के छात्र समुदाय के बीच घुल-मिलकर जीवन व्यतीत करता रहा।
इंदौरवासियों की मेहमाननवाजी और शांत वातावरण ने शायद उसे शहर से जोड़ रखा। वर्षों तक उसने शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में किराए के मकानों में रहकर अपना जीवन बिताया। कई लोग उसे शहर के पुराने परिचित चेहरों में गिनते थे, लेकिन शायद किसी ने अंदाजा भी नहीं लगाया था कि वह इतने लंबे समय से वैध दस्तावेज़ों के बिना यहां रह रहा था।
2018 में पहली बार सामने आया वीजा समाप्त होने का मामला
रिचर्ड के लंबे समय तक भारत में रहने का मामला पहली बार 2018 में उजागर हुआ, जब पुलिस ने नियमित जांच के दौरान एमआईजी थाना क्षेत्र के शिवशक्ति नगर में एक मकान में उसका निवास पाया। यह मकान कन्हैयालाल गौर नामक व्यक्ति का था, जिसके यहां रिचर्ड किराए पर रह रहा था।
दस्तावेज़ों की जांच में पुलिस को यह पता लगा कि उसका वीजा बीस साल पहले, यानी 1998 में ही खत्म हो चुका था। इस खुलासे के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और पासपोर्ट सहित अन्य दस्तावेज़ जब्त कर लिए थे। इसी मामले में उसे कोर्ट में पेश किया गया और उसे कुछ शर्तों के साथ जमानत मिली। कोर्ट ने उसे शहर छोड़ने की अनुमति नहीं दी थी और उसे नियमित रूप से उपस्थित रहने की जिम्मेदारी दी गई थी।
मामला तब से कोर्ट में लंबित है, और आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इसकी अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को निर्धारित है।
सोशल मीडिया पोस्ट्स ने बढ़ाई पुलिस की चिंता
मामले का सबसे संवेदनशील और चिंताजनक हिस्सा रिचर्ड की सोशल मीडिया गतिविधियों को माना जा रहा है। पुलिस को यह जानकारी मिली कि वह लंबे समय से सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर कई हिंसक और उकसाने वाली पोस्ट्स साझा करता रहा है।
इन पोस्ट्स में कुछ वीडियो ऐसे बताए गए हैं जिनमें खून-खराबे और हिंसा की सामग्री दिखाई देती है। इसके अलावा कुछ पोस्ट्स में ऐसे राजनीतिक और भौगोलिक दावे भी किए गए हैं जो विवाद उत्पन्न कर सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि ये पोस्ट्स स्थानीय शांति व्यवस्था के लिहाज से संवेदनशील हो सकती हैं, इसलिए इन्हें गंभीरता से देखा जा रहा है।
हालांकि, पुलिस यह भी स्पष्ट कर रही है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उसके सोशल मीडिया व्यवहार और उसकी मंशा का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल यह जांच का विषय है कि उसकी पोस्ट्स महज इंटरनेट पर साझा की गई सामग्री हैं या इनके पीछे कोई ठोस पृष्ठभूमि है।
वकील की सफाई और रिचर्ड का पक्ष
रिचर्ड मयाका स्वान्या की ओर से उसके वकील वाजिद खान ने यह बताया है कि 2019 में कोर्ट से उसे पासपोर्ट सुपुर्दगी पर वापस मिला था। वकील का कहना है कि रिचर्ड ने वीजा की अवधि बढ़ाने और दस्तावेज़ों को वैध कराने के प्रयास भी किए, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।
वकील का दावा है कि रिचर्ड वर्तमान में इंदौर के ही एक अन्य मकान, शेखर कुशवाह के घर में रह रहा है और उसने इस निवास की जानकारी भी पुलिस को दे दी है। वकील का कहना है कि रिचर्ड शहर छोड़ने की शर्त का पालन कर रहा है और किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं है जो कानून के खिलाफ हो।
शहर में बढ़ी सतर्कता और प्रशासनिक चुनौतियां
इंदौर शहर ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकास किया है और यहां देश-विदेश से आने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है कि शहर में रहने वाले सभी लोग वैध दस्तावेज़ों और पंजीकरण के साथ रहें।
किरायेदारों की जांच का यह अभियान कई महीनों से जारी है, और रिचर्ड का मामला प्रशासन के लिए इस बात का संकेत है कि भविष्य में ऐसे कई मामले और भी सामने आ सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना उन ढीली सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाती है जिनके चलते एक विदेशी नागरिक इतने लंबे समय तक बिना जांच के शहर में रह सका।
आगामी कार्रवाई और भविष्य की दिशा
रिचर्ड का मामला अब फिर से चर्चा में आने के बाद पुलिस और प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेकर अपनी जांच को विस्तार दिया है। उसके दस्तावेज़ों, सोशल मीडिया गतिविधियों और उसकी पिछले दो दशकों की गतिविधियों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। यह भी संभव है कि उसकी कानूनी स्थिति की समीक्षा की जाए और उसके दस्तावेज़ों के मद्देनज़र आगे का निर्णय लिया जाए।
फिलहाल शहर में सुरक्षा को लेकर बढ़ी सजगता के बीच यह मामला प्रशासन और नागरिकों दोनों के लिए एक बड़ा सबक बनकर सामने आया है।
