इंदौर के एक शांत क्षेत्र में रहने वाली 20 वर्षीय युवती अपने घर से रोज की तरह ऑनलाइन नौकरी करती थी। उसका संपर्क एक प्रतिष्ठित ई-कॉमर्स कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी से था। यह संपर्क पिछले कुछ महीनों से फोन और ऑनलाइन चैट के माध्यम से विकसित हुआ। बातचीत के दौरान युवती को कार्य संबंधित मार्गदर्शन भी मिलता था और धीरे-धीरे विश्वास का वातावरण बन गया।
लेकिन इसी भरोसे का दुरुपयोग एक बड़ी वारदात में बदल गया। नवंबर के अंतिम सप्ताह में युवती को उच्च पद, बेहतर पढ़ाई और आकर्षक करियर का भरोसा देकर शहर से बाहर ले जाया गया। बातचीत के बहाने उसे मिलने बुलाया गया और यात्रा के दौरान कई अहम बातें छुपाई गईं।

युवती को बताया गया कि उसे नई कंपनी में पदोन्नति, उच्च वेतन और बेहतर अवसर दिए जाएंगे। इसी उम्मीद में युवती बिना किसी आशंका के उस व्यक्ति के साथ चली गई। यह घटनाक्रम शुरुआत में सामान्य प्रतीत हुआ, लेकिन बाद में इसमें भयावह रूप सामने आया।
दिल्ली पहुंचते ही व्यवहार बदल गया
यात्रा के बाद युवती को दिल्ली के एक होटल में ले जाया गया। वहां उसके साथ जबरन अनुचित व्यवहार किया गया। युवती को धमकाया गया और वापस लौटने पर बुरी तरह परेशान करने की चेतावनी दी गई।
युवती ने विरोध किया तो दबाव की प्रकृति बदल गई। नौकरी, शिक्षा और सुरक्षित स्थान जैसे आश्वासन अचानक बंधन और डर में बदलने लगे। युवती को बताया गया कि उसके दस्तावेज और पहचान बदल दी जाएगी।
इस दौरान दूसरी ओर से फोन और कॉल निर्देश दिए जाते रहे। यह संकेत स्पष्ट था कि युवती को किसी अन्य स्थान पर भेजने की तैयारी चल रही है।
संदिग्ध दस्तावेजों की तैयारी और आगे का मकसद
पूछताछ में यह भी सामने आया कि युवती के व्यक्तिगत दस्तावेज बदलने की बात कही गई थी। कुछ पहचान संबंधी कागज दर्ज करने का प्रयास हुआ। आरोप यह भी है कि युवती को उसके परिवार से दूर रखकर उसे पूरी तरह एक नए वातावरण में धकेलने की योजना थी।
एक महत्वपूर्ण बिंदु यह सामने आया कि युवती को ऐसी जगह भेजा जाना था जहाँ संबंधित व्यक्तियों के पहले से रिश्ते और संपर्क थे। इसी बीच युवती के पास एक कॉल आया जिसमें शादी जैसी औपचारिकता में जबरन शामिल करने और नाम बदलने तक की बात कही गई।
यह सब किसी प्रशिक्षण या नौकरी की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था बल्कि ऐसा प्रतीत हुआ कि युवती को अवैध रूप से बेचा या जबरन गलत कार्यों में धकेला जाने वाला था।
पुलिस की सक्रियता ने बड़ा खतरा टाला
इस पूरी साजिश का पता चलते ही इंदौर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी। रिकॉर्ड, फोन कॉल, लोकेशन और यात्रा का रूट ट्रेस कर टीम दिल्ली पहुंची। वहां मुख्य आरोपी को हिरासत में ले लिया गया और युवती को सुरक्षित वापस लाया गया।
पुलिस ने आरोपित के मोबाइल, कॉल लॉग और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज कब्जे में लिए। जांच में पुलिस को कई संदिग्ध बातचीत और चैट मिले हैं, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि घटनाक्रम पूर्व नियोजित था।
युवती ने पुलिस को बयान दिया जिसमें उसने होटल में हुए दबाव, धमकी और जबरदस्ती के प्रयासों की पुष्टि की।
पुलिस पूछताछ में सामने आए भयावह तथ्य
प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली। आरोपित के संपर्क में जुड़े अन्य लोग भी चिह्नित किए जा रहे हैं। यह भी पता चला कि अन्य राज्यों में जुड़े कुछ नंबरों से फोन कॉल हो रहे थे।
संदेह है कि यह कोई सामान्य व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि पहले से चल रहे नेटवर्क से जुड़ा अपराध है।
कुछ जांच रिपोर्टों के अनुसार युवती को मनोरंजन क्षेत्र में जबरदस्ती शामिल करने या किसी गलत गतिविधि में धकेलने का प्रयास किया जा रहा था।
परिवार की चिंता और समाज में चर्चा
युवती सुरक्षित लौटने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली, लेकिन मानसिक रूप से वह अभी भी भय और असहजता की स्थिति में है।
घटना सामने आने के बाद सोशल प्लेटफॉर्म, स्थानीय संगठनों और जागरूक वर्गों ने कड़े शब्दों में इस घटना पर चिंता जताई।
सबका मुख्य सवाल यही रहा कि कोई भी व्यक्ति किसी लड़की या युवक को इस प्रकार बहकाकर, धोखे से दूसरे शहर ले जाए और मानसिक दबाव डालकर गलत कार्य कराए, यह कितना चिंताजनक है।
अपराध का सामाजिक और कानूनी पक्ष
भारत में मानव तस्करी, पहचान बदलकर मजबूरी में रोजगार कराना और दबाव की स्थिति में विवाह कराना गंभीर अपराध है।
कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि यदि किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध रोका गया या प्रताड़ित किया गया या उसकी पहचान बदली गई, तो यह गंभीर गैरकानूनी गतिविधि है।
कर्मी जिसने धोखे के माध्यम से युवती को बाहर ले जाकर उस पर दबाव बनाया, वह बड़ा अपराध है और कार्रवाई अनिवार्य है।
जांच आगे बढ़ रही है
पुलिस ने दूसरे संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान शुरू कर दी है और कॉल रिकॉर्ड की जांच जारी है।
यदि नेटवर्क सामने आता है, तो कार्रवाई और बड़ी हो सकती है।
