ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। बीते एक सप्ताह से ज्यादा समय से देश के अलग-अलग हिस्सों में भड़के विरोध प्रदर्शनों ने सत्ता की नींव को हिला कर रख दिया है। महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा की लगातार गिरती कीमत से परेशान आम लोग अब सड़कों पर उतर आए हैं। शुरुआत में यह विरोध शहरों तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे यह ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों तक फैलता चला गया।

इन प्रदर्शनों ने ईरानी शासन को गंभीर चुनौती दी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि सरकार ने सुरक्षा बलों को पूरी सख्ती के साथ कार्रवाई करने का आदेश दे दिया है। कई इलाकों से घातक बल प्रयोग की खबरें सामने आई हैं। दर्जनों प्रदर्शनकारियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी ईरान की स्थिति पर नजरें टिकी हुई हैं।
अमेरिका की तीखी प्रतिक्रिया और धमकी भरा बयान
ईरान में बिगड़ते हालात के बीच अमेरिका से एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को खुलेआम चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रखते हैं, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद कठोर कदम उठा सकते हैं।
ग्राहम का यह बयान किसी बंद कमरे में नहीं, बल्कि एक टेलीविजन इंटरव्यू के दौरान आया, जिससे यह पूरी तरह सार्वजनिक हो गया। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि जो लोग बेहतर जिंदगी की मांग कर रहे हैं, उन्हें मारना ईरानी नेतृत्व के लिए भारी पड़ सकता है। उनके अनुसार, अगर यह हिंसा नहीं रुकी तो ट्रंप खामेनेई के खिलाफ घातक आदेश दे सकते हैं।
बयान के पीछे छिपा सख्त संदेश
लिंडसे ग्राहम का यह बयान सिर्फ एक चेतावनी नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे ईरान के लिए एक रणनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि तेहरान के नेताओं को डोनाल्ड ट्रंप को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उनके मुताबिक, ट्रंप ऐसे नेता हैं जो शब्दों तक सीमित नहीं रहते और जरूरत पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई करते हैं।
ग्राहम ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों पर हो रहे हिंसक दमन को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने बल प्रयोग जारी रखा तो अमेरिका को हस्तक्षेप के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
वेनेजुएला का उदाहरण और अमेरिका की मंशा
सीनेटर ग्राहम ने अपने बयान में वेनेजुएला का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था, वही मॉडल ईरान पर भी लागू हो सकता है। उनके अनुसार, मादुरो के खिलाफ की गई कार्रवाई अमेरिका की इच्छाशक्ति का सबूत है।
इस तुलना के जरिए ग्राहम ने यह संकेत देने की कोशिश की कि अमेरिका उन सरकारों के खिलाफ कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटता, जो अपने ही नागरिकों पर अत्याचार करती हैं। यह संदेश ईरानी नेतृत्व के लिए साफ था कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ सकता है।
ईरान में प्रदर्शन क्यों भड़के
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन किसी एक घटना का नतीजा नहीं हैं। यह गुस्सा सालों से जमा हो रहा था, जो अब फूट पड़ा है। बढ़ती महंगाई, रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में बेतहाशा इजाफा और राष्ट्रीय मुद्रा की गिरती कीमत ने आम नागरिकों की कमर तोड़ दी है।
लोगों का कहना है कि उनकी आमदनी लगातार घट रही है, जबकि खर्च कई गुना बढ़ गया है। नौजवानों के सामने रोजगार का संकट गहराता जा रहा है। इन्हीं समस्याओं ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई और मौतों का आंकड़ा
ईरानी शासन ने प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सुरक्षा बलों को खुली छूट दे दी है। कई शहरों से खबरें आई हैं कि प्रदर्शनकारियों पर सीधी फायरिंग की गई। अब तक 35 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा होने की आशंका जताई जा रही है।
कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिनमें सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें दिखाई दे रही हैं। कुछ जगहों पर हालात इतने बिगड़ गए कि पूरे इलाके को सील करना पड़ा।
ग्रामीण इलाकों तक फैला आंदोलन
पहले यह माना जा रहा था कि विरोध प्रदर्शन बड़े शहरों तक ही सीमित रहेंगे, लेकिन हालात ने अलग ही मोड़ ले लिया। अब यह आंदोलन ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों तक पहुंच चुका है। पश्चिमी शहर अब्दानन से सामने आए वीडियो में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर मार्च करते हुए नजर आए।
इन प्रदर्शनों की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि भीड़ खुलेआम सुप्रीम लीडर के खिलाफ नारे लगाती दिखी। ईरान जैसे देश में, जहां सत्ता की आलोचना करना बेहद जोखिम भरा माना जाता है, यह दृश्य अपने आप में ऐतिहासिक है।
खामेनेई के खिलाफ नारे और सत्ता की चुनौती
प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए नारे ईरानी सत्ता के लिए बड़ा झटका माने जा रहे हैं। सुप्रीम लीडर के खिलाफ नारे लगना यह दिखाता है कि गुस्सा सिर्फ आर्थिक नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे सत्ता के केंद्र को चुनौती दे रहा है।
कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स ने यह भी दावा किया कि कुछ पुलिसकर्मी और सुरक्षा बलों के सदस्य भी प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े नजर आए। अगर यह सच साबित होता है, तो यह ईरानी शासन के लिए बेहद खतरनाक संकेत होगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और बढ़ती चिंता
ईरान में हालात पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं। मानवाधिकार संगठनों ने प्रदर्शनकारियों पर हो रही हिंसा की निंदा की है। अमेरिका के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि मामला अब सिर्फ ईरान का आंतरिक मुद्दा नहीं रह गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो पश्चिमी देश ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने या कूटनीतिक दबाव बढ़ाने का रास्ता अपना सकते हैं।
ट्रंप की छवि और बयान का असर
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी अपने सख्त और आक्रामक रुख के लिए जाने जाते रहे हैं। ईरान को लेकर उनका रुख हमेशा से कड़ा रहा है। लिंडसे ग्राहम के बयान को कई लोग ट्रंप की संभावित नीति का संकेत मान रहे हैं।
हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि इस तरह के बयान कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन जिस भाषा में चेतावनी दी गई है, उसने तनाव को और बढ़ा दिया है।
क्या बढ़ेगा अमेरिका-ईरान टकराव
ईरान और अमेरिका के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं। इस नए घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच टकराव की आशंका को और गहरा कर दिया है। अगर ईरान में हिंसा जारी रहती है और अमेरिका अपने रुख पर कायम रहता है, तो आने वाले दिनों में हालात और विस्फोटक हो सकते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यह संकट सिर्फ ईरान की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र पर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन और अमेरिका की खुली धमकी ने वैश्विक राजनीति में एक नया अध्याय खोल दिया है। आम जनता की नाराजगी, सत्ता की सख्ती और अंतरराष्ट्रीय दबाव मिलकर हालात को बेहद नाजुक बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ईरानी नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है और क्या यह टकराव किसी बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है या नहीं।
