दुनिया के कई देश आज जल संकट की दहलीज पर खड़े हैं, लेकिन ईरान की स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि राजधानी तेहरान में पानी खत्म होने की उलटी गिनती शुरू हो गई है। ईरान के मौसम विज्ञान केंद्र ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि इस वर्ष देश में औसत से 89% कम बारिश हुई है, और यह पिछले 50 वर्षों की सबसे सूखी शरद ऋतु बन गई है।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि सरकार ने क्लाउड सीडिंग अभियान शुरू कर दिया है—एक तकनीक जिसके ज़रिए रसायनों को बादलों में फैलाकर कृत्रिम बारिश करवाई जाती है।
लेकिन क्या यह उपाय वाकई प्रभावी साबित होगा? क्या यह राजधानी को बचा पाएगा? क्या तेहरान में पानी खत्म होने से जन-निर्वासन (mass evacuation) तक की नौबत आ सकती है?

आइए इस अभूतपूर्व संकट को गहराई से समझते हैं।
ईरान सूखे की चपेट में—कैसे बढ़ा संकट?
ईरान एक मरुस्थलीय (desert-prone) देश है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसके जल स्रोत लगातार सिकुड़ते गए। इस बार हालात अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुके हैं।
1. 50 वर्षों की सबसे कम बारिश
- ईरान में बारिश औसत से 89% कम
- कई जगहों पर हवा में नमी भी बेहद घट चुकी
- सिंचाई, पीने योग्य पानी और बिजली उत्पादन सब प्रभावित
2. तेहरान का जल स्तर इतिहास में सबसे नीचे
अधिकारियों का कहना है कि तेहरान में अभी सिर्फ 14 दिन का पानी बचा है।
अगर समय रहते बारिश नहीं हुई, तो:
- पानी की सप्लाई सीमित हो जाएगी
- संभव है कि कुछ जिलों को खाली कराना पड़े
- अस्पताल, इंडस्ट्री और बिजली उत्पादन बंद होने की स्थिति आ सकती है
3. जलाशयों का खाली होना
ईरान के 57% से ज़्यादा डैम क्षमता से भी नीचे हैं।
कई छोटे बांध पूरी तरह सूख चुके हैं।
उर्मिया झील: एक विशाल झील से नमक के रेगिस्तान तक
ईरान की सबसे बड़ी झील उर्मिया झील कभी एशिया की सबसे खूबसूरत झीलों में गिनी जाती थी।
आज वहाँ:
- विशाल नमक के टीले
- सूखा हुआ तल
- पानी का सिर्फ नाम मात्र स्तर
यहीं पर सरकार ने क्लाउड सीडिंग अभियान शुरू किया है।
क्लाउड सीडिंग क्या है और कैसे होती है बारिश?
क्लाउड सीडिंग विज्ञान की वह तकनीक है जिससे इंसान बादलों को बारिश करने के लिए “उकसाता” है।
• कैसे काम करती है यह प्रक्रिया?
- विशेष विमान बादलों के भीतर उड़ान भरते हैं
- बादलों में सिल्वर आयोडाइड, सोडियम क्लोराइड, या ड्राई आइस जैसे कण छोड़े जाते हैं
- ये कण बादलों में न्यूक्लियाई बनाते हैं
- नमी इन कणों से चिपककर बड़ी बूंदें बनाती है
- थोड़ी देर में बादल बारिश गिराते हैं
• क्या यह जादू की छड़ी है? नहीं!
- यह साफ आसमान में बारिश नहीं ला सकती
- यह मौजूदा बादलों से थोड़ी अतिरिक्त बारिश करवाती है
- सफलता का प्रतिशत 10%–30% के बीच माना जाता है
वैज्ञानिकों के बीच इसकी प्रभावशीलता को लेकर अभी भी बहस है।
ईरान आख़िर इतना पानी संकट में क्यों फँसा?
ईरान का जल संकट किसी एक वजह का परिणाम नहीं है। यह वर्षों से बढ़ती समस्याओं का मिश्रण है।
1. जलवायु परिवर्तन
ग्लोबल वार्मिंग की वजह से मध्य-पूर्व में तापमान तेजी से बढ़ रहा है।
2. भूमिगत जल का अंधाधुंध दोहन
पिछले 20–30 वर्षों में ईरान ने अपने भूजल का लगभग 70% से अधिक ख़त्म कर दिया।
3. खेती का पुराना तरीका
कई किसान अब भी जल-प्रबंधन तकनीकों के अभाव में ज्यादा पानी वाली फसलों की खेती करते हैं।
4. जनसंख्या व शहरीकरण
तेहरान जैसे शहरों पर जनसंख्या का दबाव इतना बढ़ गया है कि पानी की मांग क्षमता से कहीं अधिक हो गई है।
तेहरान में पानी खत्म होने का मतलब क्या होगा?
यह सिर्फ एक शहर की समस्या नहीं, बल्कि 1.5 करोड़ की आबादी पर looming humanitarian crisis है।
अगर पानी खत्म हुआ:
• शहर को चरणबद्ध पानी कटौती झेलनी पड़ेगी
• अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित होंगी
• स्कूल-कॉलेज बंद हो सकते हैं
• इंडस्ट्री व बिजली उत्पादन रुक सकता है
• शहर से पलायन शुरू हो सकता है
सरकार के अनुसार, अगर दो हफ्तों में बारिश नहीं हुई, तो वे तेहरान के बाहर जन-सुरक्षा शिविर बनाने पर विचार कर सकते हैं।
क्या क्लाउड सीडिंग तेहरान को बचा पाएगी?
क्लाउड सीडिंग अस्थायी राहत दे सकती है, लेकिन:
✔ यह पूर्ण समाधान नहीं
✔ बारिश की मात्रा अनिश्चित
✔ बारिश का क्षेत्र नियंत्रित नहीं
✔ लगातार हर सप्ताह इसे दोहराना पड़ेगा
लेकिन सरकार का कहना है कि इस वक्त उनके पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है।
आगे क्या? ईरान के समाधान क्या हो सकते हैं?
1️⃣ पानी का पुनर्चक्रण (recycling)
2️⃣ आधुनिक सिंचाई (drip irrigation)
3️⃣ भूजल recharge प्रोजेक्ट
4️⃣ वर्षा जल संरक्षण
5️⃣ बड़े शहरों में water rationing
6️⃣ समुद्री पानी को शुद्ध करना (desalination)
निष्कर्ष
ईरान इस समय अपने आधुनिक इतिहास के सबसे भीषण जल संकट का सामना कर रहा है। तेहरान में सिर्फ 14 दिन का पानी बचा है—यह किसी भी राजधानी के लिए अभूतपूर्व खतरा है।
क्लाउड सीडिंग शायद कुछ समय के लिए लोगों की प्यास बुझा दे, लेकिन असली समाधान तभी मिलेगा जब देश लंबे समय तक सतत जल प्रबंधन की दिशा में बड़े और साहसिक कदम उठाए।
