टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीम के स्क्वाड की घोषणा के बाद क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का दौर तेज हो गया है। जहां कुछ नाम पहले से तय माने जा रहे थे, वहीं कुछ फैसलों ने फैंस और विशेषज्ञों दोनों को चौंका दिया। इसी क्रम में ईशान किशन की टीम में वापसी और यशस्वी जायसवाल को स्क्वाड से बाहर रखे जाने का निर्णय सबसे ज्यादा बहस का विषय बन गया।

ईशान किशन की एंट्री को जहां एक सरप्राइज माना गया, वहीं यशस्वी जायसवाल को बाहर किए जाने से कई सवाल खड़े हो गए। दोनों ही खिलाड़ी टी20 फॉर्मेट में आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं और युवा क्रिकेट की नई पहचान माने जाते हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि अगर दोनों खिलाड़ियों की तुलना एक समान पैमाने पर की जाए तो उनके आंकड़े क्या कहानी बयां करते हैं।
इस लेख में हम ईशान किशन और यशस्वी जायसवाल के टी20 इंटरनेशनल करियर की गहराई से तुलना करेंगे, खासतौर पर उनके शुरुआती 23-23 मुकाबलों के प्रदर्शन के आधार पर, ताकि यह समझा जा सके कि चयन समिति का फैसला किन आधारों पर लिया गया हो सकता है।
ईशान किशन ने अब तक भारत के लिए 32 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं। दूसरी ओर यशस्वी जायसवाल को 23 टी20 इंटरनेशनल मैचों में खेलने का मौका मिला है। तुलना को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए दोनों के पहले 23-23 मुकाबलों के आंकड़ों को आधार बनाया गया है।
ईशान किशन ने अपने पहले 23 टी20 इंटरनेशनल मैचों में कुल 23 पारियों में बल्लेबाजी की थी। इस दौरान उन्होंने 28.54 के औसत से 628 रन बनाए। उनका यह प्रदर्शन उतार-चढ़ाव से भरा रहा, जिसमें कुछ शानदार पारियां जरूर शामिल थीं, लेकिन निरंतरता की कमी साफ नजर आई।
वहीं यशस्वी जायसवाल ने अपने शुरुआती 23 टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में 22 पारियों में बल्लेबाजी करते हुए 36.15 के बेहतरीन औसत से कुल 723 रन बनाए। यह आंकड़े बताते हैं कि जायसवाल ने न सिर्फ ज्यादा रन बनाए, बल्कि उन्होंने अपनी पारियों में ज्यादा स्थिरता और भरोसेमंद प्रदर्शन भी दिखाया।
अगर एक पारी में बनाए गए सर्वश्रेष्ठ स्कोर की बात करें तो ईशान किशन का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर 89 रन रहा। यह पारी भले ही दर्शकों के लिए रोमांचक रही हो, लेकिन वह अपने टी20 इंटरनेशनल करियर में शतक तक नहीं पहुंच सके थे। इसके विपरीत यशस्वी जायसवाल ने अपने पहले 23 मुकाबलों में ही 100 रन की ऐतिहासिक पारी खेलकर यह साबित कर दिया कि वह बड़े मौकों के खिलाड़ी हैं।
शतक और अर्धशतक के आंकड़े भी दोनों के बीच स्पष्ट अंतर दिखाते हैं। ईशान किशन ने 23 टी20 इंटरनेशनल मैचों में एक भी शतक नहीं लगाया था, हालांकि उनके बल्ले से चार अर्धशतकीय पारियां जरूर निकलीं। दूसरी ओर यशस्वी जायसवाल ने इसी अवधि में एक शतक और पांच अर्धशतक जड़े, जो उनकी आक्रामकता के साथ-साथ मैच फिनिश करने की क्षमता को भी दर्शाता है।
बाउंड्री हिटिंग की बात करें तो दोनों खिलाड़ी टी20 फॉर्मेट में विस्फोटक बल्लेबाज माने जाते हैं। ईशान किशन ने अपने पहले 23 टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में कुल 68 चौके और 25 छक्के लगाए। वहीं यशस्वी जायसवाल ने इसी अवधि में 82 चौके और 38 छक्के जड़कर गेंदबाजों पर कहीं ज्यादा दबाव बनाया।
स्ट्राइक रेट के मामले में दोनों के बीच का अंतर और भी साफ दिखाई देता है। ईशान किशन का स्ट्राइक रेट जहां 128.16 रहा, वहीं यशस्वी जायसवाल ने 164.31 के जबरदस्त स्ट्राइक रेट से रन बनाए। टी20 क्रिकेट में यह अंतर बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह दर्शाता है कि खिलाड़ी कितनी तेजी से रन बना रहा है और टीम को कितनी आक्रामक शुरुआत या फिनिश दे सकता है।
इन आंकड़ों को देखने के बाद स्वाभाविक सवाल उठता है कि आखिर चयन समिति ने यशस्वी जायसवाल की जगह ईशान किशन को क्यों चुना। इसका जवाब केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि टीम संतुलन, अनुभव, विकेटकीपिंग विकल्प और रणनीतिक जरूरतों में भी छिपा हो सकता है।
ईशान किशन न सिर्फ एक बल्लेबाज हैं, बल्कि एक विकेटकीपर बल्लेबाज भी हैं, जो टीम संयोजन में अतिरिक्त लचीलापन प्रदान करता है। बड़े टूर्नामेंट में ऐसे खिलाड़ियों की अहमियत बढ़ जाती है, जो एक से अधिक भूमिकाएं निभा सकें। वहीं यशस्वी जायसवाल एक शुद्ध टॉप ऑर्डर बल्लेबाज हैं, जिनकी जगह टीम मैनेजमेंट ने फिलहाल भविष्य के लिए सुरक्षित रखी हो सकती है।
टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर चयन सिर्फ आंकड़ों के आधार पर नहीं होता, बल्कि अनुभव, दबाव में खेलने की क्षमता और टीम की जरूरतें भी उतनी ही अहम भूमिका निभाती हैं। ईशान किशन का पहले भी आईसीसी टूर्नामेंट्स का अनुभव रह चुका है, जो चयनकर्ताओं के लिए एक निर्णायक पहलू हो सकता है।
हालांकि यह भी सच है कि यशस्वी जायसवाल के आंकड़े यह साफ संकेत देते हैं कि वह आने वाले समय में भारतीय टी20 टीम की रीढ़ बनने की पूरी क्षमता रखते हैं। उनकी उम्र, फिटनेस और आक्रामक शैली उन्हें भविष्य का सुपरस्टार बनाती है।
इस तुलना से यह स्पष्ट हो जाता है कि दोनों खिलाड़ी अपनी-अपनी जगह बेहद खास हैं। ईशान किशन वर्तमान जरूरतों को पूरा करने वाला विकल्प हैं, जबकि यशस्वी जायसवाल भारतीय क्रिकेट का उज्ज्वल भविष्य। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बाद तस्वीर बदल सकती है और जायसवाल को बड़ी भूमिका में देखा जा सकता है।
