मध्य पूर्व में हमेशा से कुछ न कुछ ऐसा होता रहा है जो दुनिया की शांति के लिए खतरे की घंटी बन जाता है. अब एक बार फिर वही स्थिति लौटती दिख रही है. जिन लोगों को लग रहा था कि इजरायल-हिजबुल्ला टकराव बीते महीनों में शांत हो चुका है, उनके लिए बेरूत के दिल में हुई यह चौंकाने वाली कार्रवाई एक कड़वी याद दिलाती है कि यह संघर्ष कभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था. इजरायल ने दावा किया कि उसने हिजबुल्ला के चीफ ऑफ स्टाफ और हसन नसरल्लाह के अत्यंत करीबी माने जाने वाले हयथम अली तबाताबाई को टारगेट किया. वह लंबे समय से इजरायल का शीर्ष वांछित कमांडर था. हालांकि उसकी मौत की पुष्टि अभी तक नहीं की गई है.

यह घटना सिर्फ एक सैन्य हमला नहीं है, बल्कि राजनीतिक, धार्मिक और क्षेत्रीय समीकरणों में बड़ा बदलाव उत्पन्न करने वाला संकेत भी है. यह हमला ऐसी संवेदनशील समय पर हुआ जब पोप लियो 14वें के लेबनान दौरे की तैयारियां चल रही हैं और वैश्विक समुदाय उम्मीद कर रहा था कि इजरायल-लेबनान सीमा पर तनाव कुछ कम होगा. परंतु हुआ इसके ठीक उलट.
हमला कहां और कैसे हुआ
लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी हिस्से हरेत हरेक में रविवार देर शाम अचानक तेज धमाके हुए. सड़कों पर लोग डर के मारे चीखते हुए इधर-उधर भागने लगे. चश्मदीदों का कहना है कि कुछ ही सेकंड में आकाश में धुएं का बड़ा गुबार उठने लगा. एम्बुलेंस और रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंचीं.
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस हमले में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई और 21 लोग घायल हुए हैं. इन घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है. हालांकि सरकारी एजेंसियों और हिजबुल्ला समर्थक सूत्रों के बीच इस जानकारी में अंतर बना हुआ है. कई विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े सैन्य ऑपरेशन में नुकसान का आंकड़ा और भी अधिक हो सकता है.
इजरायल का दावा, वही पुराना लक्ष्य
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह हमला बेहद सटीक योजना के तहत किया गया. IDF ने बताया कि इस ऑपरेशन में हिजबुल्ला के सबसे प्रमुख सैन्य रणनीतिक दिमाग को निशाना बनाया गया. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने कहा कि उनका देश अपनी उत्तरी सीमा पर किसी भी खतरे को जड़ से खत्म करेगा.
सरकारी प्रवक्ता शोश बेडरोसियन ने पत्रकारों के सवालों पर जवाब देने से बचते हुए कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह इजरायल के फैसले पर आधारित थी और किसी तीसरे देश से सलाह नहीं ली गई. यह संकेत अमेरिका की चुप्पी पर भी सवाल उठाता है, क्योंकि वाशिंगटन इस क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
सवाल फिर वही: क्या तबाताबाई मारे गए हैं
यही वह मुद्दा है जो पूरी दुनिया की नजरों के सामने है. इजरायल के सूत्रों का दावा है कि हयथम अली तबाताबाई को खत्म करने के लिए यह ऑपरेशन किया गया था. अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी उनकी मौत की खबरें चर्चा में हैं लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
CNN को एक इजरायली अधिकारी ने बताया कि बैटल डैमेज असेसमेंट चल रहा है. जब तक पूरी तरह सबूत नहीं मिल जाते, तब तक उनके मारे जाने का दावा नहीं किया जाएगा.
हिजबुल्ला का पक्ष क्या कहता है
हिजबुल्ला ने इस हमले की कार्रवाई की निंदा करते हुए बयान जारी किया लेकिन संगठन ने अपने शीर्ष नेता के हताहत होने की बात से इंकार भी नहीं किया और न ही कोई खंडन किया. यह रणनीति अक्सर तब अपनाई जाती है जब संगठन नुकसान की सही जानकारी छिपाकर नया प्लान बनाने में जुटा हो.
तबाताबाई कौन हैं और इतने महत्वपूर्ण क्यों
हयथम अली तबाताबाई को हिजबुल्ला के सबसे प्रभावशाली सैन्य कमांडरों में गिना जाता है. वे संगठन की सैन्य शाखा के कई गुप्त अभियानों के मास्टरमाइंड रहे हैं. इजरायल का आरोप है कि उन्होंने सीरिया और गाजा में हथियार सप्लाई और सैन्य प्रशिक्षण के बड़े नेटवर्क को संचालित किया.
अगर उनकी मौत की पुष्टि हो जाती है तो यह हिजबुल्ला के लिए बड़ा झटका होगा.
और अगर वह बच जाते हैं तो इजरायल के लिए यह असफल ऑपरेशन की शर्मिंदगी भी बना सकता है.
क्या फिर से युद्ध की आहट
यह हमला ऐसे वक़्त किया गया है जब इजरायल-गाजा संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा हुआ है. लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इसे युद्धविराम बनी समझौते का उल्लंघन बताया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि इजरायल लेबनान की संप्रभुता का खुलेआम उल्लंघन कर रहा है और यह कार्रवाई व्यापक युद्ध का कारण बन सकती है.
सीमा क्षेत्र में हलचल
हमले के तुरंत बाद उत्तरी इजरायल की सीमाओं पर सेना की तैनाती बढ़ा दी गई. ड्रोन गतिविधि और आर्टिलरी की आवाजाही से लोग पहले ही दहशत में हैं. कई गांवों में रहने वालों ने नई शेल्टर जगहें तलाशनी शुरू कर दी हैं.
पोप की यात्रा पर भी असर संभव
कई विश्लेषकों का कहना है कि इस हमले के पीछे अंतरराष्ट्रीय संदेश भी छिपा है. कुछ दिनों बाद पोप लियो 14वें लेबनान दौरे पर आने वाले हैं. यह हमला दुनिया को बताने जैसा है कि इस इलाके में शांति सिर्फ कूटनीति के भरोसे नहीं चलेगी.
क्या नई जंग अवश्यंभावी है
मध्य पूर्व की राजनीति बेहद जटिल है. एक गलत कदम युद्ध की आग को पूरे क्षेत्र में फैला सकता है. अभी तक दोनों पक्ष संभलकर बयान दे रहे हैं. पर जैसे-जैसे तबाताबाई की स्थिति पर साफ तस्वीर आएगी, आगे के हालात उसी के अनुसार बदलेंगे.
क्या लेबनान बिना कार्रवाई के शांत रहेगा
क्या इजरायल सीमित हमले में ही रह जाएगा
क्या हिजबुल्ला बदला लेगा
क्या अंतरराष्ट्रीय ताकतें आगे आएंगी
इन सभी सवालों के जवाब अगले कुछ दिनों में दुनिया देखेगी.
