हर नए साल के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजार से निवेशकों को खास उम्मीदें होती हैं। माना जाता है कि साल की शुरुआत अगर सकारात्मक माहौल में हो, तो आगे का रास्ता भी बेहतर रहता है। 1 जनवरी 2026 को भी निवेशकों की निगाहें इसी उम्मीद के साथ बाजार पर टिकी थीं। शुरुआती कारोबार में संकेत भी कुछ हद तक यही दिखा रहे थे कि बेंचमार्क इंडेक्स स्थिर रहेंगे और बड़े उतार-चढ़ाव से बचा जाएगा।

हालांकि, जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, बाजार का मिजाज बदलता नजर आया। भले ही निफ्टी और सेंसेक्स आखिर में लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए, लेकिन बाजार के भीतर एक ऐसा झटका लगा, जिसने पूरे सेंटिमेंट को प्रभावित कर दिया। यह झटका किसी छोटे या मिडकैप शेयर से नहीं, बल्कि एक ऐसे दिग्गज स्टॉक से आया, जिसे लंबे समय से निवेशक भरोसे का प्रतीक मानते रहे हैं।
ITC की गिरावट ने बदला बाजार का रुख
नए साल के पहले ही दिन ITC के शेयरों में लगभग 10 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस एक स्टॉक की कमजोरी इतनी गहरी थी कि इसने पूरे बाजार के मूड को खराब कर दिया। अनुमान के मुताबिक, ITC में आई इस गिरावट के चलते निवेशकों को करीब 50,000 करोड़ रुपये के मार्केट कैप का नुकसान झेलना पड़ा।
ITC का नाम उन शेयरों में गिना जाता है, जिन्हें स्थिर और भरोसेमंद निवेश माना जाता रहा है। ऐसे में इस तरह की बड़ी गिरावट ने न सिर्फ निवेशकों को चौंकाया, बल्कि यह सवाल भी खड़े कर दिए कि आखिर बाजार में ऐसा क्या हुआ, जिससे नए साल की शुरुआत इतनी कमजोर साबित हुई।
बेंचमार्क इंडेक्स की स्थिति
अगर केवल आंकड़ों की बात करें, तो 1 जनवरी 2026 को बाजार की तस्वीर ऊपर से देखने पर बहुत नकारात्मक नहीं लगती। निफ्टी50 इंडेक्स दिन के अंत में 16 अंकों की बढ़त के साथ 26,146 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स में मामूली कमजोरी देखने को मिली और यह 32 अंकों की गिरावट के साथ 85,188 के स्तर पर बंद हुआ।
इन आंकड़ों से ऐसा लग सकता है कि बाजार लगभग स्थिर रहा, लेकिन अंदरखाने की कहानी कुछ और ही थी। ITC जैसे बड़े शेयर की गिरावट ने यह दिखा दिया कि सूचकांक भले ही फ्लैट हों, लेकिन निवेशकों की भावनाओं को गहरा झटका लगा है।
FMCG सेक्टर पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
ITC की गिरावट का सीधा असर एफएमसीजी सेक्टर पर पड़ा। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स दिनभर दबाव में रहा और आखिरकार 3 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुआ। यह गिरावट सिर्फ ITC तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे सेक्टर में कमजोरी फैलती चली गई।
एफएमसीजी सेक्टर को आमतौर पर रक्षात्मक यानी डिफेंसिव सेक्टर माना जाता है। जब बाजार में अनिश्चितता होती है, तब निवेशक अक्सर इस सेक्टर का रुख करते हैं। लेकिन नए साल के पहले ही दिन इस सेक्टर में आई कमजोरी ने निवेशकों की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए।
ITC के साथ अन्य शेयरों में भी कमजोरी
ITC के अलावा सिगरेट कारोबार से जुड़ी एक और बड़ी कंपनी के शेयरों में भी तेज गिरावट देखने को मिली। इस शेयर में करीब 17 प्रतिशत की भारी कमजोरी दर्ज की गई, जिसने पूरे सेक्टर पर दबाव और बढ़ा दिया। इससे यह साफ हो गया कि गिरावट केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह सेक्टर से जुड़ी चिंताओं का नतीजा हो सकती है।
इन गिरावटों ने यह संकेत दिया कि निवेशक फिलहाल एफएमसीजी और तंबाकू कारोबार से जुड़े शेयरों को लेकर सतर्क हो गए हैं। नए साल की शुरुआत में ही इस तरह का रुख बाजार के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
निफ्टी50 के गेनर और लूजर शेयरों की कहानी
जहां एक ओर ITC जैसे दिग्गज शेयर ने बाजार को नीचे खींचा, वहीं दूसरी ओर कुछ शेयरों ने मजबूती दिखाकर संतुलन बनाने की कोशिश की। निफ्टी50 में कुछ प्रमुख शेयर ऐसे रहे, जिन्होंने दिन के कारोबार में अच्छी तेजी दिखाई और टॉप गेनर्स की सूची में अपनी जगह बनाई।
वहीं दूसरी तरफ, ITC के साथ-साथ कुछ अन्य बड़े नाम भी टॉप लूजर की सूची में शामिल रहे। इन शेयरों में कमजोरी ने यह साफ कर दिया कि बाजार के भीतर सेक्टोरल रोटेशन और निवेशकों की प्राथमिकताओं में बदलाव देखने को मिल रहा है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
नए साल के पहले ही दिन ITC जैसे बड़े शेयर में आई गिरावट ने निवेशकों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह सिर्फ एक अस्थायी गिरावट है या फिर इसके पीछे कोई लंबी अवधि की चिंता छिपी हुई है? क्या एफएमसीजी सेक्टर आने वाले समय में और दबाव में रह सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है, लेकिन बड़े और मजबूत शेयरों में आई गिरावट अक्सर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी लेकर आती है।
नए साल की शुरुआत और बाजार का मनोविज्ञान
शेयर बाजार सिर्फ आंकड़ों और चार्ट्स का खेल नहीं होता, बल्कि यह निवेशकों के मनोविज्ञान से भी गहराई से जुड़ा होता है। नए साल की शुरुआत में जब किसी दिग्गज शेयर में इतनी बड़ी गिरावट आती है, तो इसका असर पूरे बाजार की धारणा पर पड़ता है।
ITC की गिरावट ने यह दिखा दिया कि बाजार में भरोसा कितनी जल्दी डगमगा सकता है। हालांकि, यह भी सच है कि बाजार ने अब तक कई बार ऐसे झटकों के बाद खुद को संभाला है।
आगे का रास्ता
1 जनवरी 2026 का दिन बाजार के लिए एक चेतावनी की तरह सामने आया है। भले ही बेंचमार्क इंडेक्स फ्लैट बंद हुए हों, लेकिन ITC जैसे बड़े शेयर की गिरावट ने यह बता दिया कि सतर्कता बेहद जरूरी है।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या ITC और एफएमसीजी सेक्टर में स्थिरता लौटती है या फिर दबाव और बढ़ता है। नए साल की शुरुआत ने यह साफ कर दिया है कि 2026 में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रह सकते हैं और निवेशकों को सोच-समझकर कदम उठाने होंगे।
