जबलपुर जिले में पिछले कुछ वर्षों में भू-माफिया और अवैध कॉलोनाइजरों के कारण भूमि विवाद और आम जनता की परेशानियों में लगातार वृद्धि हुई है। इन अवैध कॉलोनियों में नियमों के विपरीत भूखंड बेचे गए, जिससे न केवल खरीदारों को नुकसान हुआ बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिले में व्यापक स्तर पर जांच और कार्रवाई की गई।

नईदुनिया के अभियान ‘भू-माफिया मगरूर, जनता मजबूर’ ने इस दिशा में एक अहम भूमिका निभाई। इस अभियान ने अवैध कॉलोनियों में हो रही अनियमितताओं को उजागर किया और प्रशासन को कार्रवाई के लिए प्रेरित किया। अभियान के दौरान यह सामने आया कि कई कॉलोनाइजर बिना रेरा और टीएण्डसीपी की स्वीकृति के, और बिना जिला प्रशासन की अनुमति के कॉलोनियों का निर्माण कर रहे थे।
जिला प्रशासन और नगर निगम ने अभियान के निष्कर्षों को गंभीरता से लिया और सोमवार को निर्णय लिया कि जिले की सीमा में आने वाली 98 कॉलोनियों को अवैध घोषित किया जाए। इन कॉलोनियों में न तो रेरा की अनुमति थी और न ही किसी सरकारी संस्था की स्वीकृति। इसके बाद कॉलोनी सेल ने जिला पंजीयक को पत्र लिखकर इन कॉलोनियों की रजिस्ट्री पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए।
अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री और नामांतरण पर रोक
जिले में अब तक बिक चुके भूखंडों के नामांतरण पर भी रोक लगा दी गई है। यदि किसी भूखंड का मालिक अभी तक उसका नामांतरण नहीं कर पाया है, तो प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि अब नामांतरण नहीं होंगे। यह कदम मप्र नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 339 (ड) (2) और मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 61 (च) (2) के अंतर्गत उठाया गया है।
इस कार्रवाई का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में कोई भी कॉलोनाइजर नियमों का उल्लंघन करके भूखंड न बेच सके। साथ ही प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग पहले से भूखंड खरीद चुके हैं, उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। उनके लिए बेहतर व्यवस्थाओं की सुविधा सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे।
कॉलोनाइजर और भूमाफिया पर एफआईआर की तैयारी
जिले में 98 अवैध कॉलोनियों की पहचान के बाद प्रशासन ने यह भी निर्णय लिया कि अब कॉलोनाइजर और भूमाफिया की गतिविधियों की जांच की जाएगी। इसके तहत यह पता लगाया जाएगा कि उन्होंने और कहां-कहां भूमि खरीदी और कॉलोनियों का निर्माण किया। जांच पूरी होने के बाद उन पर एफआईआर दर्ज की जाएगी।
पहले से ही तीन अवैध कॉलोनाइजरों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। इसके अलावा लगभग 15 और कॉलोनियों पर एफआईआर दर्ज करने की तैयारी चल रही है। नगर निगम भी शहरी सीमा में आने वाली अवैध कॉलोनियों की जांच में सक्रिय है। प्रशासन और नगर निगम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में कोई भी भू-माफिया या कॉलोनाइजर नियमों का उल्लंघन न कर सके।
जनता की सुरक्षा और प्रशासन की पहल
जबलपुर में प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल कॉलोनाइजरों और भूमाफियाओं को रोकना है, न कि भूखंड मालिकों को परेशान करना। अभियान ‘भू-माफिया मगरूर, जनता मजबूर’ के माध्यम से जनता की समस्याओं को उजागर किया गया और प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया।
प्रशासन ने यह भी कहा कि जो लोग पहले से भूखंड खरीद चुके हैं, उनके लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। यह कदम मध्यप्रदेश में भूमि संबंधी विवादों और अवैध कॉलोनियों पर एक मिसाल स्थापित करेगा। भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से जिले में भू-माफिया की गतिविधियों पर रोक लगेगी और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया कि अभियान और जांच जारी रहेगी ताकि किसी भी अवैध कॉलोनाइजर को नियमों से बचने का मौका न मिले।
