आज की राजनीति में हर कदम, हर चेहरे और हर स्वागत-अस्वागत के पीछे कोई न कोई संदेश छिपा होता है। ऐसा ही दृश्य शुक्रवार, 21 नवंबर 2025 को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में देखने को मिला, जब देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भोपाल पहुंचे — लेकिन एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने कोई भी भाजपा नेता नहीं पहुंचा।

जहाँ प्रोटोकॉल और राजनीतिक मर्यादाएँ इस बात की अपेक्षा रखती हैं कि इतने उच्च पद पर रह चुके व्यक्ति के स्वागत के लिए सरकार और सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेता उपस्थित रहें, वहीं इस घटना ने नए राजनीतिक सवालों को जन्म दे दिया है। लोगों की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि यह मात्र संयोग था या फिर इसका संबंध हाल के राजनीतिक समीकरणों से है।
एयरपोर्ट से सीधे राजभवन — चुप्पी भी एक संदेश!
धनखड़ जब भोपाल एयरपोर्ट पर उतरे तो सुरक्षा और प्रोटोकॉल अधिकारी तो मौजूद थे, परंतु राजनीतिक स्वागत-समारोह का पूरा दृश्य गायब था। बिना किसी राजनीतिक नेता की उपस्थित के, धनखड़ एयरपोर्ट से सीधे राजभवन रवाना हो गए। इस घटना ने यह साफ कर दिया कि राजनीतिक संबंधों में कहीं न कहीं असहजता की लकीर खिंच चुकी है। विशेष रूप से तब, जब:
- धनखड़ पूर्व में संविधान की रक्षा, न्यायपालिका के अधिकार और मीडिया स्वतंत्रता जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर मुखर रहे हैं।
- उन्होंने उपराष्ट्रपति पद से 21 जुलाई 2025 को इस्तीफा भी दे दिया था, जिसने कई तरह के राजनीतिक कयासों को हवा दी थी।
दिग्विजय सिंह का सीधा हमला — भाजपा की ‘यूज एंड थ्रो’ नीति
इस घटना पर सबसे तेज़ प्रतिक्रिया आई कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की ओर से।
उन्होंने खुलकर कहा:
“भाजपा के लिए वही व्यक्ति महत्वपूर्ण है, जो उनके काम आए।
भाजपा की नीति है — यूज एंड थ्रो।”
उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा—
“चूंकि धनखड़ संघ के कार्यक्रम में आए हैं, इसलिए संघ के संदर्भ में ऐसा नहीं कह सकते।”
दिग्विजय ने बताया कि उन्होंने स्वयं भी धनखड़ से मिलने के लिए समय माँगा है। उनके इस बयान से साफ है कि वह इस मौके को पूरी ताकत से भाजपा के खिलाफ राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
संघ के बड़े मंच पर धनखड़ — ‘हम और यह विश्व’ का विमोचन
धनखड़ जिस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता बनने आए हैं, वह कोई सामान्य आयोजन नहीं है। यह विचारधारा के वैश्विक विस्तार से जुड़े विमर्श का मंच है। कार्यक्रम की विशेषताएँ:
- किताब: ‘हम और यह विश्व’
- लेखक: मनमोहन वैद्य
(संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य) - आयोजक: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)
- मुख्य वक्ता: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़
इस कार्यक्रम में भारत की बदलती विदेश नीति, वैश्विक पहचान और हिंदुत्व-आधारित सांस्कृतिक मान्यताओं पर गहन विमर्श होने वाला है| धनखड़ का मुख्य वक्ता होना दर्शाता है कि राजनीतिक पद छोड़ने के बावजूद वे वैचारिक रूप से केंद्र में बने हुए हैं।
क्या उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा और यह घटना—एक ही कहानी के हिस्से?
धनखड़ ने जब संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन इस्तीफा दिया था, तब कई तरह की चर्चाएँ सामने आई थीं:
- क्या वे भाजपा नेतृत्व से असहमत थे?
- क्या उनकी भूमिका सीमित की जा रही थी?
- क्या न्यायपालिका पर उनके बयानों से पार्टी असहज थी?
- क्या वे भविष्य में किसी वैकल्पिक राजनीतिक भूमिका की तैयारी कर रहे हैं?
इन प्रश्नों ने अब नई जान पकड़ ली है। एयरपोर्ट पर स्वागत-नहीं-स्वागत की यह घटना उन सवालों को और गहरा कर रही है।
भाजपा की चुप्पी — रणनीति या अनदेखी?
भाजपा के किसी नेता का एयरपोर्ट पर न पहुँचना कई संभावनाओं को जन्म देता है—
| संभावना | राजनीतिक संकेत |
|---|---|
| यह एक प्रोटोकॉल की चूक थी | संगठनात्मक असंतुलन दिखती है |
| जानबूझकर ऐसा किया गया | रिश्तों में दूरी का स्पष्ट संकेत |
| संघ और भाजपा की भूमिकाएँ अलग दिखाने का प्रयास | सत्ता और संगठन के बीच दूरी |
राजनीतिक गलियारों में इस समय चर्चाओं का बड़ा बाजार गर्म है।
2026-27 की राजनीति में धनखड़ की भूमिका?
राजनीति के अनुभवी विश्लेषकों का मानना है:
- धनखड़ एक राजनयिक, संवैधानिक और कानूनी व्यक्तित्व हैं
- भाजपा के अलावा अन्य दल भी भविष्य में उनके उपयोग की संभावनाएँ तलाश सकते हैं
- संघ भी उन्हें वैचारिक राजदूत के रूप में आगे रख सकता है
कई विशेषज्ञ यह तक कह रहे हैं कि वह आने वाले वर्षों में:
- किसी बड़े राष्ट्रीय पद पर वापसी कर सकते हैं
या - राजनीति में स्वतंत्र प्रतिष्ठा स्थापित करने का प्रयास करेंगे
निष्कर्ष: मौन का भी अपना एक शोर होता है
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति में अनुपस्थिति भी एक उपस्थिति होती है। पूर्व उपराष्ट्रपति जैसे सम्मानित व्यक्ति को स्वागत-हीन देखकर:
- विपक्ष सक्रिय हो गया
- मीडिया मुखर हो गया
- जनता प्रश्न पूछने लगी
अब देश यह देख रहा है कि:
क्या यह घटना एक अस्थायी राजनीतिक उपेक्षा है
या
भविष्य की राजनीतिक कहानी की भूमिका?
आने वाले दिनों में धनखड़ की हर गतिविधि और भाजपा की हर प्रतिक्रिया— इस घटना की कहानी को और स्पष्ट कर देगी।
