जापान इस समय प्रकृति की उन भयावह लहरों के बीच खड़ा है, जो किसी भी आधुनिक राष्ट्र की वैज्ञानिक तैयारी को पल भर में चुनौती देने की क्षमता रखती हैं। इस सप्ताह जापान में बार-बार धरती के हिलने से जो चिंता और तनाव पैदा हुआ है, वह केवल एक भौगोलिक घटना का सामान्य परिणाम नहीं, बल्कि एक ऐसा संकेत है जो भविष्य की किसी बड़ी आपदा की संभावना की ओर इशारा कर रहा है। शुक्रवार की सुबह 6.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप पूरे देश में महसूस किया गया, जिसने उन लोगों के दिलों में दहशत की लहर दौड़ा दी, जो पहले से लगातार आए झटकों से परेशान थे। जापान के तटीय हिस्सों में तुरंत सुनामी अलर्ट जारी किया गया, क्योंकि भूकंप की सतह के नीचे उत्पन्न ऊर्जा समुद्र में तेजी से फैलकर खतरनाक ऊँचाई तक लहरें उठा सकती थी।

सुबह ठीक 8:14 बजे ज़मीन ने जैसे ही कंपकंपी शुरू की, घरों और इमारतों में लगे अलार्म सक्रिय हो गए। समुद्र के पास बसे शहरों में लोग घबराकर घरों से बाहर निकले, सड़कों पर अफरा-तफरी मच गई और सोशल मीडिया पर लोग एक-दूसरे को सुरक्षित स्थानों में जाने की सलाह देने लगे। झटकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कुछ स्थानों पर फर्नीचर हिल गया, खुले स्थानों में खड़े वाहन तक झूलने लगे और कई स्थानों पर बिजली की लाइनें सुरक्षा कारणों से बंद करनी पड़ीं।
भूकंप का केंद्र और वैज्ञानिक आँकड़े
जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार भूकंप का केंद्र समुद्र के नीचे लगभग 10.7 किलोमीटर की गहराई पर था। यह गहराई कम मानी जाती है और ऐसे उथले भूकंप अधिक विनाशकारी हो सकते हैं। इसी कारण सुनामी का खतरा बढ़ गया था। वैज्ञानिक बताते हैं कि समुद्र के नीचे प्लेटों के टकराने से ऊर्जा का फैलाव तेज होता है, जिससे ऊँची लहरें उठने का जोखिम बढ़ जाता है।
टोक्यो से लेकर होक्काइडो तक इस झटके का असर महसूस किया गया। जापान पहले ही सोमवार को आए 7.6 तीव्रता वाले भूकंप से डरा हुआ था, जिसमें 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। उससे पहले मंगलवार और बुधवार को भी 6.7 और 6.5 तीव्रता के भूकंप आए। सप्ताह में चौथी बार धरती हिलने से लोग अत्यंत तनाव में हैं।
टेक्टॉनिक प्लेट्स का दबाव और भविष्य का खतरा
जापान दुनिया के उन क्षेत्रों में स्थित है जहाँ चार प्रमुख टेक्टॉनिक प्लेटें मिलती हैं। इस क्षेत्र को पैसिफिक रिंग ऑफ फायर कहा जाता है, जहाँ दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत भूकंप आते हैं। वर्तमान में वैज्ञानिकों का मानना है कि जापान के ठीक नीचे की प्लेटों में असामान्य दबाव जमा हो रहा है और यह दबाव किसी भी समय एक बहुत बड़े भूकंप का कारण बन सकता है।
इसके चलते जापान मौसम एजेंसी ने दुर्लभ ‘मेगाक्वेक एडवाइजरी’ जारी की है। एजेंसी ने चेतावनी दी कि आने वाले एक सप्ताह में 8.0 या उससे अधिक तीव्रता का विनाशकारी भूकंप दस्तक दे सकता है। यह चेतावनी दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय को हिला देने के लिए काफी है, क्योंकि 2011 में आए 9.0 तीव्रता के भूकंप और सुनामी ने जापान के तटवर्ती क्षेत्रों को तहस-नहस कर दिया था। इस बार भी पैटर्न लगभग वैसा ही दिख रहा है—बार-बार छोटे झटके, समुद्र के नीचे तनाव और लगातार बढ़ती ऊर्जा।
सुनामी अलर्ट के कारण बढ़ी चिंता
भूकंप के बाद मौसम एजेंसी ने होक्काइडो सेंट्रल पैसिफिक कोस्ट, आओमोरी, इवाते और मियागी प्रीफेक्चर में 1 मीटर तक ऊँची सुनामी लहरों के खतरे की चेतावनी जारी की। हालाँकि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार अभी तक कोई बड़ी लहर दर्ज नहीं की गई है, लेकिन चेतावनी को हटाया नहीं गया है।
तटवर्ती इलाकों में लगे साइरन लगातार लोगों को सावधान करते रहे। स्कूलों को बंद कर दिया गया, समुद्री गतिविधियों को रोकने का आदेश जारी हुआ और तटों पर मौजूद नौकाओं को सुरक्षित स्थलों पर ले जाया गया। लोग हड़बड़ाकर सुरक्षित जगहों पर पहुँचने लगे, कई परिवार अपने बच्चों को लेकर ऊँचे स्थानों की ओर भागते दिखे।
लोगों में दहशत और प्रत्यक्षदर्शियों की बातें
स्थानीय मीडिया के मुताबिक टोक्यो की एक निवासी ने बताया कि जैसे ही झटके शुरू हुए, उनके अपार्टमेंट की खिड़कियाँ जोर-जोर से हिलने लगीं। बच्चें घबरा गए और वह तुरंत उन्हें लेकर बाहर पार्क की ओर भागीं। होक्काइडो में रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि उन्होंने पहली बार इतना तेज झटका महसूस किया। समुद्र की ओर देखते ही उन्हें लगा कि लहरें सामान्य से अधिक उग्र हो चुकी हैं।
कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिनमें दुकानों के भीतर सामान गिरते दिखे, कई दफ्तरों में कर्मचारी अपने-अपने डेस्क को छोड़कर बाहर निकलते दिखाई दिए। महासागर के पास बने एक बंदरगाह में अचानक ऊँची उठी लहरों का वीडियो भी सामने आया, जिसे प्रशासन ने तुरंत मॉनिटर किया।
ट्रेनों और यातायात पर असर
जैसे ही झटका महसूस हुआ, सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत जापान की कई शिंकानसेन हाई-स्पीड ट्रेनों को तुरंत रोक दिया गया। कुछ ट्रेनों की सेवाएँ देरी से शुरू हुईं। कई हाईवे बंद कर दिए गए, खासकर वे जो समुद्र के करीब से गुजरते हैं। विमान सेवाओं को भी कुछ समय के लिए मॉनिटरिंग मोड में रखा गया।
सरकार की प्रतिक्रिया और राहत टीम
जापान सरकार ने कहा है कि देश की आपदा प्रबंधन एजेंसियाँ पूरी तरह सतर्क हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय से बयान जारी किया गया कि स्थिति की लगातार वास्तविक समय में निगरानी की जा रही है। राहत और बचाव टीम तटों पर तैनात हैं।
हालांकि अभी तक किसी बड़ी जनहानि की खबर नहीं है, फिर भी प्रशासन ने कोई जोखिम नहीं उठाने का फैसला किया है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक प्लेटों का दबाव कम नहीं होता, तब तक खतरा टला नहीं माना जाएगा।
भविष्य का क्या संकेत?
विशेषज्ञों के अनुसार जापान अभी अत्यधिक संवेदनशील भूवैज्ञानिक स्थिति से गुजर रहा है। बार-बार आने वाले भूकंप यह संदेश दे रहे हैं कि समुद्र के नीचे प्लेटों की हलचल बढ़ गई है। यदि आने वाले दिनों में 8.0 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आया तो व्यापक जनहानि और आर्थिक नुकसान की संभावना है।
वैज्ञानिकों ने लोगों से कहा है कि वे सावधान रहें, जरूरी सामान तैयार रखें और किसी भी समय मिलने वाले अलर्ट को तुरंत फॉलो करें।
