राजस्थान के जोधपुर में कथावाचक और साध्वी प्रेम बाईसा की अचानक हुई मौत अब एक साधारण घटना नहीं रह गई है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे सवालों की संख्या बढ़ती जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला और ज्यादा उलझ गया है, क्योंकि उसमें मौत की स्पष्ट वजह सामने नहीं आ सकी। मेडिकल जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने जहर, दवा की अधिक मात्रा और संभावित साजिश जैसी आशंकाओं को जन्म दे दिया है।

यह मामला अब केवल एक संदिग्ध मृत्यु तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें चिकित्सा लापरवाही, संभावित षड्यंत्र और कई अनुत्तरित सवाल जुड़ते चले जा रहे हैं। पूरे जोधपुर सहित आसपास के इलाकों में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है और हर किसी की निगाहें अब एफएसएल रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिसे इस मामले का निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत तक की पूरी कहानी
साध्वी प्रेम बाईसा अपने धार्मिक प्रवचनों और कथाओं के लिए जानी जाती थीं। उनका जीवन सादा, अनुशासित और आध्यात्मिक माना जाता था। ऐसे में उनकी अचानक हुई मौत ने हर किसी को चौंका दिया। शुरुआत में इसे सामान्य स्वास्थ्य समस्या से जोड़कर देखा गया, लेकिन जैसे-जैसे घटनाक्रम सामने आया, वैसे-वैसे संदेह गहराने लगा।
बताया जा रहा है कि मौत से पहले उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी थी। इलाज से जुड़ी कुछ जानकारियां सामने आने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि उन्हें इंजेक्शन दिए गए थे। यही बिंदु बाद में पूरे मामले की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने क्यों बढ़ा दिया शक
मौत के बाद जब पोस्टमार्टम किया गया, तो डॉक्टर किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कॉज ऑफ डेथ स्पष्ट नहीं लिखा जा सका। यही बात पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए चिंता का कारण बन गई।
मेडिकल सूत्रों के अनुसार पोस्टमार्टम के दौरान साध्वी प्रेम बाईसा की छोटी और बड़ी आंत असामान्य रूप से लाल पाई गईं। चिकित्सा विज्ञान में यह स्थिति कई बार शरीर में जहर जाने पर भी देखी जाती है। हालांकि डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आंतों के लाल होने के आधार पर जहर की पुष्टि नहीं की जा सकती।
इसी वजह से विसरा सुरक्षित कर लिया गया और उसे केमिकल जांच के लिए भेजा गया है। अब पूरा मामला प्रयोगशाला रिपोर्ट पर निर्भर करता है।
विसरा जांच और एफएसएल रिपोर्ट का महत्व
विसरा की केमिकल जांच इस मामले में सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है। एफएसएल रिपोर्ट यह साफ करेगी कि साध्वी के शरीर में किसी प्रकार का विषैला पदार्थ मौजूद था या नहीं। अगर जहर की पुष्टि होती है, तो यह मामला पूरी तरह आपराधिक साजिश की ओर मुड़ सकता है।
वहीं अगर जहर नहीं पाया जाता है, तो जांच का फोकस दवाओं, इंजेक्शन और मेडिकल ट्रीटमेंट पर आ जाएगा। पुलिस दोनों ही परिस्थितियों के लिए अपनी जांच की दिशा तैयार कर रही है।
डेक्सोना इंजेक्शन और उससे जुड़े सवाल
जांच के दौरान सामने आया कि साध्वी प्रेम बाईसा को डेक्सोना इंजेक्शन दिया गया था। एक कंपाउंडर के बयान के अनुसार, साध्वी पहले भी कई बार यह इंजेक्शन ले चुकी थीं। डेक्सोना एक स्टेरॉयड दवा है, जिसका उपयोग आमतौर पर अस्थमा और सूजन से जुड़ी समस्याओं में किया जाता है।
मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा सही मात्रा में दी जाए तो लाभकारी होती है, लेकिन अधिक मात्रा या गलत परिस्थिति में इसका इस्तेमाल शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि साध्वी को यह इंजेक्शन किस मात्रा में दिया गया था और क्या यह किसी योग्य डॉक्टर की सलाह पर दिया गया था।
आश्रम के बाहर मिली अस्थालाइन की सीसी
मामले को और पेचीदा बनाने वाला एक और तथ्य सामने आया, जब जांच के दौरान आश्रम के बाहर से अस्थालाइन की दो सीसी बरामद की गईं। अस्थालाइन भी सांस संबंधी बीमारियों में इस्तेमाल की जाने वाली दवा है।
इस खोज के बाद कई नए सवाल खड़े हो गए। क्या साध्वी प्रेम बाईसा अस्थमा की मरीज थीं। अगर हां, तो उनका नियमित इलाज कौन कर रहा था। अगर नहीं, तो यह दवाएं वहां कैसे पहुंचीं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दवाओं का इस्तेमाल किसने किया और किस उद्देश्य से किया गया।
इंजेक्शन किसने लगाया और क्यों
जांच का एक अहम बिंदु यह भी है कि साध्वी को इंजेक्शन किसने लगाया। क्या यह किसी मेडिकल प्रोफेशनल द्वारा किया गया या किसी अनधिकृत व्यक्ति ने। इंजेक्शन कब लगाया गया, किस हालात में लगाया गया और उस वक्त साध्वी की स्थिति क्या थी, इन सभी सवालों के जवाब अभी अधूरे हैं।
अगर यह साबित होता है कि इंजेक्शन बिना डॉक्टर की सलाह के दिया गया था, तो यह गंभीर लापरवाही का मामला बन सकता है। वहीं अगर जानबूझकर गलत मात्रा दी गई, तो साजिश की आशंका और मजबूत हो जाएगी।
साजिश का एंगल और पुलिस की पड़ताल
पुलिस इस मामले को केवल मेडिकल एंगल से नहीं देख रही है। जांच इस दिशा में भी चल रही है कि कहीं यह पूरी घटना किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं थी। साध्वी प्रेम बाईसा का सामाजिक और धार्मिक प्रभाव था, ऐसे में उनके जीवन से जुड़े हर पहलू को खंगाला जा रहा है।
पुलिस उनके संपर्कों, हालिया गतिविधियों और इलाज से जुड़े लोगों से लगातार पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि कोई भी तथ्य नजरअंदाज न हो।
क्षेत्र में फैली सनसनी और लोगों की प्रतिक्रिया
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की खबर फैलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में शोक के साथ-साथ आक्रोश भी देखा गया। लोग इस बात की मांग कर रहे हैं कि मौत की सच्चाई पूरी तरह सामने लाई जाए और अगर कोई दोषी है तो उसे सख्त सजा मिले।
यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल बन गया है।
एफएसएल रिपोर्ट के बाद क्या होगा अगला कदम
अब पूरा मामला एफएसएल रिपोर्ट पर टिका हुआ है। यही रिपोर्ट तय करेगी कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी। जहर की पुष्टि होने पर पुलिस हत्या या साजिश की धाराओं में मामला दर्ज कर सकती है। वहीं अगर जहर नहीं मिलता है, तो मेडिकल लापरवाही और दवा से हुई प्रतिक्रिया की जांच तेज होगी।
जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या इस घटना से जुड़े किसी सबूत को मिटाने की कोशिश की गई या नहीं।
एक मौत, कई सवाल
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत ने यह साफ कर दिया है कि सच्चाई तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, इंजेक्शन, दवाइयां और संदिग्ध परिस्थितियां, सब मिलकर इस मामले को रहस्य बना रही हैं।
अब देखना यह है कि वैज्ञानिक जांच और पुलिस की पड़ताल इस रहस्य से कब पर्दा उठाती है। तब तक यह मामला लोगों के मन में सवाल बनकर बना रहेगा।
