टेस्ट क्रिकेट का सौंदर्य उसकी निरंतरता, धैर्य और आंकड़ों से कहीं आगे जाकर बनने वाली विरासत में छिपा होता है। ऑस्ट्रेलिया की सरज़मीं पर खेले जा रहे एशेज सीरीज के पांचवें और अंतिम टेस्ट के दूसरे दिन इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज जो रूट ने एक ऐसी पारी खेली, जिसने न केवल मौजूदा मैच का रुख बदला, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में भी एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया। सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में रूट के बल्ले से निकले 41वें टेस्ट शतक ने उन्हें ऑस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज रिकी पोंटिंग के बराबर खड़ा कर दिया और अब उनके सामने केवल दो नाम रह गए हैं, जिनमें सबसे ऊपर भारत के महान सचिन तेंदुलकर हैं।

सिडनी की पिच पर धैर्य और क्लास का प्रदर्शन
सिडनी टेस्ट की शुरुआत इंग्लैंड के लिए आसान नहीं रही। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला तो किया गया, लेकिन शुरुआती ओवरों में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने इंग्लिश बल्लेबाजी क्रम को दबाव में ला दिया। ऐसे समय में जब टीम को एक संभले हुए और भरोसेमंद बल्लेबाज की जरूरत थी, जो रूट ने अपने अनुभव और तकनीक का पूरा प्रदर्शन किया।
रूट ने शुरुआत में पूरी तरह से जोखिम से दूरी बनाए रखी। गेंद को उसकी मेरिट पर खेलते हुए उन्होंने स्ट्राइक रोटेट की और खराब गेंदों पर ही रन बटोरने की रणनीति अपनाई। 146 गेंदों में शतक पूरा करना यह दर्शाता है कि यह पारी आक्रामकता से ज्यादा नियंत्रण और संतुलन की मिसाल थी। उनकी इस पारी में लगाए गए 11 चौके केवल रन बटोरने का जरिया नहीं थे, बल्कि गेंदबाजों पर मानसिक दबाव बनाने का भी माध्यम बने।
ऑस्ट्रेलिया में जो रूट का दूसरा टेस्ट शतक
जो रूट के करियर को देखें तो ऑस्ट्रेलिया की धरती पर रन बनाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। तेज और उछालभरी पिचों पर बल्लेबाजों की तकनीक की असली परीक्षा होती है। सिडनी टेस्ट में लगाया गया यह शतक ऑस्ट्रेलिया में उनका दूसरा टेस्ट शतक है, जो इस बात को रेखांकित करता है कि रूट ने समय के साथ अपनी बल्लेबाजी को हर परिस्थिति के अनुसार ढाल लिया है।
इस शतक से पहले ब्रिस्बेन में खेले गए दूसरे टेस्ट की पहली पारी में रूट ने नाबाद 138 रन बनाए थे। हालांकि, वह पारी इंग्लैंड को जीत नहीं दिला सकी, लेकिन व्यक्तिगत रूप से रूट के फॉर्म और आत्मविश्वास का संकेत जरूर थी। सिडनी में आया यह शतक उसी निरंतरता का परिणाम माना जा रहा है।
41वां टेस्ट शतक और रिकी पोंटिंग की बराबरी
टेस्ट क्रिकेट में शतकों की संख्या केवल आंकड़ा नहीं होती, यह खिलाड़ी की लंबी अवधि की निरंतरता, फिटनेस और मानसिक मजबूती का प्रमाण होती है। जो रूट ने अपने 41वें टेस्ट शतक के साथ रिकी पोंटिंग की बराबरी कर ली है। इस उपलब्धि के साथ वह टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले खिलाड़ियों की सूची में संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं।
रिकी पोंटिंग को ऑस्ट्रेलिया के सबसे महान बल्लेबाजों में गिना जाता है और उनके बराबर पहुंचना किसी भी बल्लेबाज के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। रूट की यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि वह आधुनिक युग के सबसे सफल टेस्ट बल्लेबाजों में शामिल हो चुके हैं।
सचिन तेंदुलकर और जैक कालिस के रिकॉर्ड पर नजर
टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतकों का रिकॉर्ड भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के नाम दर्ज है, जिन्होंने अपने करियर में 51 टेस्ट शतक लगाए थे। उनके बाद दूसरे स्थान पर साउथ अफ्रीका के दिग्गज ऑलराउंडर जैक कालिस हैं, जिनके नाम 45 टेस्ट शतक दर्ज हैं।
अब जो रूट के सामने यही दो नाम हैं। 41 शतकों के साथ वह जैक कालिस से केवल चार शतक दूर हैं, जबकि सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड अब भी एक बड़ा लक्ष्य बना हुआ है। क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या जो रूट आने वाले वर्षों में सचिन के इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड को चुनौती दे पाएंगे।
2021 के बाद जो रूट का दबदबा
आंकड़े बताते हैं कि साल 2021 के बाद से जो रूट टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज रहे हैं। इस अवधि में उन्होंने कुल 24 टेस्ट शतक लगाए हैं, जो उनकी असाधारण निरंतरता को दर्शाता है। इस सूची में ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ दूसरे स्थान पर हैं, जिन्होंने 2021 के बाद से 10 टेस्ट शतक लगाए हैं।
संयुक्त रूप से केन विलियमसन, हैरी ब्रूक और शुभमन गिल भी इसी अवधि में 10-10 टेस्ट शतक लगा चुके हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि रूट इस दौर में बाकी सभी बल्लेबाजों से काफी आगे निकल चुके हैं।
हैरी ब्रूक के साथ अहम साझेदारी
सिडनी टेस्ट में जो रूट की पारी अकेले की नहीं थी। दूसरे छोर पर युवा बल्लेबाज हैरी ब्रूक ने भी शानदार संयम दिखाया और रूट के साथ मिलकर इंग्लैंड की पारी को स्थिरता प्रदान की। दोनों के बीच हुई साझेदारी ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की धार को कुंद किया और इंग्लैंड को सम्मानजनक स्थिति में पहुंचाया।
इस साझेदारी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इंग्लैंड की शुरुआती विकेट जल्दी गिर गए थे। ऐसे समय में अनुभव और युवा ऊर्जा का यह संयोजन टीम के लिए बेहद अहम साबित हुआ।
एशेज सीरीज 2025-26 में रूट की भूमिका
एशेज सीरीज हमेशा से ही टेस्ट क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन श्रृंखलाओं में से एक मानी जाती रही है। 2025-26 की इस सीरीज में भी मुकाबले बेहद प्रतिस्पर्धी रहे हैं। जो रूट इस सीरीज में इंग्लैंड के लिए सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में उभरे हैं।
सिडनी टेस्ट में लगाया गया यह शतक इस सीरीज में उनका दूसरा शतक है। इससे पहले ब्रिस्बेन में आई पारी ने भी यह संकेत दे दिया था कि रूट ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के खिलाफ पूरी तरह तैयार हैं।
तकनीक, धैर्य और अनुभव का संगम
जो रूट की बल्लेबाजी को अगर शब्दों में परिभाषित किया जाए तो उसमें तकनीकी सटीकता, मानसिक संतुलन और परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता साफ नजर आती है। वह न तो जरूरत से ज्यादा आक्रामक होते हैं और न ही अत्यधिक रक्षात्मक। यही संतुलन उन्हें लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने में मदद करता है।
सिडनी टेस्ट की पारी भी इसी दर्शन का उदाहरण थी। उन्होंने गेंद को देर से खेला, ऑफ स्टंप के बाहर जाती गेंदों को छोड़ने में धैर्य दिखाया और जब भी मौका मिला, रन बटोरने से पीछे नहीं हटे।
इंग्लैंड के लिए उम्मीद की किरण
हाल के वर्षों में इंग्लैंड की टेस्ट टीम ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। कभी आक्रामक ‘बैज़बॉल’ शैली की चर्चा होती है तो कभी पारंपरिक टेस्ट क्रिकेट की वापसी की। इन सबके बीच जो रूट टीम के लिए स्थिरता का प्रतीक बने हुए हैं।
उनकी मौजूदगी न केवल रन दिलाती है, बल्कि ड्रेसिंग रूम में आत्मविश्वास भी भरती है। युवा बल्लेबाजों के लिए वह एक रोल मॉडल की तरह हैं, जिनसे सीखकर वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।
क्या टूटेगा सचिन का रिकॉर्ड
यह सवाल अब क्रिकेट जगत में बार-बार उठने लगा है। जो रूट की उम्र, फिटनेस और फॉर्म को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि उनके पास अभी कई साल का टेस्ट क्रिकेट बचा हुआ है। अगर वह इसी निरंतरता के साथ खेलते रहे, तो जैक कालिस का रिकॉर्ड तो उनके लिए काफी नजदीक नजर आता है।
सचिन तेंदुलकर का 51 टेस्ट शतकों का रिकॉर्ड अब भी एक बड़ी चुनौती है, लेकिन रूट की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए इसे पूरी तरह असंभव भी नहीं कहा जा सकता।
निष्कर्ष: एक महानता की ओर बढ़ता सफर
सिडनी टेस्ट में जो रूट का 41वां शतक केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, मेहनत और जुनून का प्रतीक है। रिकी पोंटिंग की बराबरी करना अपने आप में बड़ी बात है और अब उनके सामने इतिहास रचने का मौका है।
जो रूट का यह सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले वर्षों में वह कितने रिकॉर्ड तोड़ेंगे और कितनी नई ऊंचाइयों को छुएंगे, यह देखना क्रिकेट प्रेमियों के लिए बेहद रोमांचक होगा।
