मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सबसे प्रमुख सरकारी अस्पतालों में से एक, जय प्रकाश (जेपी) अस्पताल, इन दिनों गंभीर संकट का सामना कर रहा है। अस्पताल के दवा भंडार में जरूरी दवाओं और मेडिकल सामान की भारी कमी के कारण मरीजों और उनके परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
पिछले एक सप्ताह से अस्पताल में एनेस्थीसिया इंजेक्शन, बीपी नियंत्रित करने वाली दवाइयाँ, साधारण सर्जिकल ग्लव्स और प्लास्टर ऑफ पेरिस जैसी जरूरी वस्तुएँ उपलब्ध नहीं हैं। इससे न केवल रोज़मर्रा के छोटे ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि मरीजों को इलाज के लिए बाहर के महंगे मेडिकल स्टोरों पर निर्भर होना पड़ रहा है।

मरीजों और परिजनों की परेशानी
जेपी अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि दवाओं और इंजेक्शनों की कमी के कारण उनकी आर्थिक और मानसिक स्थिति पर भारी असर पड़ रहा है। कई मरीज अपने इलाज के लिए जरूरी आधी दवाइयाँ खुद खरीदने को मजबूर हैं।
अस्पताल में उपचार कराने आए मरीजों का कहना है कि जब अस्पताल में ही जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो सरकारी अस्पताल पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है। वे बताते हैं कि दवा और मेडिकल उपकरण बाहर से खरीदने में उन्हें प्रति व्यक्ति कई हजार रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ की चुनौती
अस्पताल के डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ भी इस कमी से जूझ रहे हैं। स्टाफ के अनुसार, एनेस्थीसिया इंजेक्शन की कमी छोटे ऑपरेशन और डेंटल प्रक्रियाओं में गंभीर समस्या पैदा कर रही है। ऐसे में डॉक्टरों को ऑपरेशन शेड्यूल में बदलाव करने पड़ रहे हैं और मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
सर्जिकल ग्लव्स और अन्य जरूरी उपकरण की कमी के कारण सफाई और संक्रमण रोकथाम में भी समस्या उत्पन्न हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि स्टॉक की कमी से अस्पताल की कार्यकुशलता प्रभावित हो रही है और मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया
जेपी अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दवाओं की कमी सप्लाई चैन की समस्या और मध्यप्रदेश सरकार की मेडिकल स्टॉक वितरण प्रक्रिया में देरी के कारण हुई है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही दवा और मेडिकल सामान की आपूर्ति पूरी की जाएगी।
हालांकि मरीज और परिजन प्रशासन के इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि तत्काल सुधार नहीं किया गया तो अस्पताल की प्रतिष्ठा और मरीजों की सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
दवा और मेडिकल सामान की कमी का प्रभाव
इस कमी का सबसे बड़ा असर अस्पताल में आपातकालीन सेवाओं और छोटे ऑपरेशन पर पड़ रहा है।
- एनेस्थीसिया इंजेक्शन खत्म होने के कारण मरीजों को ऑपरेशन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
- बीपी नियंत्रित करने वाली दवाओं की कमी गंभीर मरीजों के लिए खतरा बन रही है।
- सर्जिकल ग्लव्स और साधारण मेडिकल उपकरण की कमी अस्पताल में संक्रमण रोकने की प्रक्रिया को कमजोर कर रही है।
इस स्थिति में मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोग इलाज से वंचित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में दवा और मेडिकल उपकरण की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्टॉक की कमी बनी रही, तो अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण और भी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा, रोगियों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा और उनकी स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच भी सीमित होगी।
निष्कर्ष
भोपाल का जेपी अस्पताल, जो राजधानी का प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य संस्थान है, आज दवाओं और मेडिकल उपकरण की कमी की वजह से मरीजों और स्टाफ दोनों के लिए चुनौतियों का सामना कर रहा है। अस्पताल प्रशासन और राज्य सरकार को मिलकर इस स्थिति का तत्काल समाधान करना आवश्यक है।
यदि यह संकट लंबे समय तक बना रहा, तो यह न केवल मरीजों के जीवन के लिए खतरा होगा, बल्कि राज्य में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठेगा।
