बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी क्षेत्र में रहने वाले एमबीबीएस छात्र यशराज उइके की अचानक और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे जिले के साथ-साथ राज्य के जनमानस को झकझोर कर रख दिया है। जिस परिवार ने अपने बेटे को डॉक्टर बनते देखने का सपना संजोया था, आज वही परिवार न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। अब यह मामला केवल एक परिवार के दुःख की कहानी ही नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर चुका है कि आखिर एक मेधावी छात्र की जिंदगी क्यों और कैसे अचानक समाप्त हो गई?

परिवार के आंसुओं में छिपे सवाल
यशराज उइके एक होनहार छात्र था, जिसकी मेडिकल स्टडी में रुचि और आगे बढ़ने की प्रबल इच्छा ने उसे एमबीबीएस जैसे कठिन कोर्स तक पहुंचाया था। परिजनों के अनुसार, यशराज हमेशा खुश रहने वाला, सकारात्मक सोच रखने वाला और अपने करियर को लेकर बेहद गंभीर था। लेकिन उसकी मौत को जिस तरह सामान्य बताया जा रहा है, उससे परिवार और समाज के बीच कई सवाल उठ रहे हैं।
परिवार का आरोप है कि यशराज की मौत की जांच में कई गंभीर कमियां हैं और कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया गया है।
विधायक गंगा उइके ने दी संवेदना और न्याय का भरोसा
घोड़ाडोंगरी से विधायक गंगा उइके ने यशराज के परिजनों से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान परिजनों के भावनाओं को समझते हुए उन्होंने आश्वासन दिया कि यह मामला अब विधानसभा तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा—
“यह किसी एक परिवार का नहीं, बल्कि हमारे पूरे क्षेत्र के बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य का सवाल है। यशराज की मौत के असली कारण सामने आना जरूरी है।”
विधायक ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक इस मामले में सच्चाई उजागर नहीं हो जाती, तब तक वे अपनी आवाज सदन में बुलंदी से उठाती रहेंगी।
सदन में क्यों गूंजेगी यह आवाज?
विधानसभा लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है, जहां जनता की समस्याओं को समाधान के लिए उठाया जाता है। यशराज की मौत का मुद्दा वहां उठाया जाना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि—
- यह छात्र सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है
- जांच की निष्पक्षता पर सवाल हैं
- प्रदेश भर में ऐसे मामलों के प्रति जागरूकता जरूरी है
इस घटना ने राज्य सरकार और मेडिकल शिक्षा विभाग को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या छात्रों की मानसिक, शैक्षणिक और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाया जा रहा है?
मेडिकल छात्रों पर बढ़ता दबाव और आत्महत्या के बढ़ते मामले
आज के समय में मेडिकल क्षेत्र में प्रतियोगिता और पढ़ाई का दबाव किसी से छुपा नहीं है। कई बार छात्र इस दबाव को झेल नहीं पाते और गलत कदम उठा लेते हैं। इसी बीच यदि कोई छात्र संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया जाता है तो जांच होना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि मामला तनाव का है या कुछ और?
मध्यप्रदेश सहित देशभर में ऐसी घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई केस में रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न और संस्थागत दबाव जैसे पहलू भी सामने आए हैं। इसलिए इस घटना के निष्पक्ष सत्य तक पहुंचना प्रदेश की प्रतिष्ठा और छात्र सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक हो जाता है।
पीड़ित परिवार की पीड़ा
यशराज के पिता, माता और परिवार के बाकी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी आंखों में उम्मीद की एक ही किरण बची है—न्याय। वे चाहते हैं कि उनके बेटे की मौत को बिना जांच के यूं ही खत्म मान लेना उचित नहीं है।
परिजनों का कहना है कि—
- यशराज पहले से मानसिक रूप से परेशान नहीं था
- उसके व्यवहार में कोई नकारात्मक बदलाव नहीं था
- उसे किसी तरह की गंभीर बीमारी नहीं थी
- गवाहों और परिस्थितियों की जांच सही तरीके से नहीं की गई
यह सभी बातें जांच को मजबूती देती हैं कि सच्चाई उजागर की जाए।
विधायक की सक्रियता से बढ़ी उम्मीदें
गंगा उइके पहले भी अपने क्षेत्र से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को सदन में उठाती रही हैं। इस बार भी उन्होंने कहा कि वे केवल आवाज ही नहीं उठाएंगी, बल्कि न्याय मिलने तक प्रयास जारी रखेंगी। क्षेत्र के लोगों ने भी विधायक की इस पहल की सराहना की और समर्थन जताया।
संबंधित विभागों की जिम्मेदारी
अब जिम्मेदारी आती है संबंधित प्रशासन और मेडिकल संस्थानों पर—
- क्या वे यशराज की मौत की जांच को पूरी पारदर्शिता के साथ करेंगे?
- क्या किसी भी तरह का दबाव जांच को प्रभावित नहीं करेगा?
- क्या अन्य छात्रों की सुरक्षा को लेकर नए कदम उठाए जाएंगे?
यह वे प्रश्न हैं जिनका उत्तर पूरा प्रदेश चाहता है।
निष्कर्ष: न्याय की राह भले कठिन हो, पर आवश्यक है
यशराज उइके का सपना अधूरा रह गया… पर न्याय की उम्मीद जिंदा है। जब यह मुद्दा सदन में गूंजेगा, तब केवल एक परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा प्रदेश जवाब मांगेगा कि— “आखिर हमारे बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?”
यह मामला न्याय, संवेदनशीलता और सामाजिक ज़िम्मेदारी से जुड़ा है। और अब उम्मीद है कि सच सामने आएगा, दोषी बेनकाब होंगे और यशराज को न्याय अवश्य मिलेगा।
