मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल, जिसे झीलों का शहर कहा जाता है, अब एक अन्य जलधारा के पुनर्जीवन का बड़ा गवाह बनने जा रही है। कालियासोत नदी, जिसने लंबे समय से शहर की पहचान का हिस्सा रहते हुए भी लगातार सूखे और प्रदूषण की मार सही है, उसे अब एक नई सांस दी जाने वाली है। नगर निगम भोपाल की इस परिवर्तनकारी परियोजना का मकसद है कि नदी पूरे साल बहती रहे, उसका अस्तित्व फिर से मजबूत हो और वह भविष्य में भोपाल की सुंदरता और जलसंसाधन दोनों को संबल प्रदान करे।

इस महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण के लिए 31 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी प्रदान की गई है। साथ ही नदी के कैचमेंट क्षेत्र को विकसित करने के लिए दो साल की समय सीमा भी निर्धारित की गई है। नगर निगम इस पूरी योजना को अन्य विभागों के सहयोग से आगे बढ़ाएगा।
योजना का मूल आधार
प्रस्तावित योजना के केंद्र में तीन स्टॉप डैम निर्माण का निर्णय है, जो नदी में जल संरक्षण की क्षमता को मजबूत करेगा। इसके निर्माण के बाद लगभग 30 लाख घनमीटर पानी रोककर रखा जा सकेगा।
कालियासोत नदी का ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व
भोपाल और आसपास के वन क्षेत्रों से उत्पन्न यह नदी लगभग 36 किलोमीटर तक बहती है। इसका बहाव भोजपुर की पहाड़ियों से प्रारंभ होकर मिसरोद, शाहपुरा, टीटी नगर और विभिन्न आबादी वाले क्षेत्रों से गुज़रता हुआ भदभदा और आगे मंडीदीप की दिशा में अग्रसर होता है।
लेकिन यह नदी अपने अस्तित्व की लड़ाई कई वर्षों से लड़ रही है। बढ़ते शहरीकरण, नालों और घरेलू कचरे के लगातार प्रवाह ने नदी की संरचना और उसकी प्राकृतिक धड़कन को बुरी तरह प्रभावित किया। कभी सालभर बहने वाली यह जलधारा, बरसात के दिनों तक ही सीमित होती चली गई। नदी किनारे अतिक्रमण और अवैध निर्माण ने उसके जल ग्रहण क्षेत्र को संकुचित कर दिया।
इन सारी समस्याओं के समाधान का स्वरूप है यह नया रिवर फ्रंट विकास प्रोजेक्ट।
पहले चरण के मुख्य कार्य
स्टॉप डैम निर्माण परियोजना को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला स्टॉप डैम सर्वधर्म पुल की निकटता में बनाया जाएगा, जो लगभग ढाई किलोमीटर की दूरी पर नदी के प्रवाह को नियंत्रित करेगा। दूसरा स्टॉप डैम जेके अस्पताल पुल और दानिश कुंज ब्रिज के बीच बनाया जाएगा।
तीसरी जगह सलैया ब्रिज से आगे चुनी गई है, जहां मौजूदा पुल डूब जाने की संभावना के कारण नया पुल भी निर्मित करना होगा।
इन तीनों संरचनाओं के निर्माण से नदी में पानी पूरे वर्ष रुका रहेगा और यह सदानीरा रूप प्राप्त करेगी।
अवैध निर्माण और कब्जों के विरुद्ध साहसिक कदम
विकास के साथ व्यवस्था भी जरूरी है। इस योजना का सबसे चुनौतीपूर्ण पक्ष है नदी के बफर जोन को पूरी तरह मुक्त कराना। नदी किनारे लगभग 33 मीटर क्षेत्र में 100 से ज्यादा पक्के निर्माण अवैध रूप से खड़े हैं। साथ ही करीब 700 अतिक्रमण नदी के दोनों किनारों पर कब्जा जमाए हुए हैं।
नगर निगम के आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि सभी अतिक्रमणों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। यह कदम नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बहाल करने के लिए अनिवार्य माना गया है।
नदी का सौंदर्यीकरण और पर्यटन की संभावना
विकास के बाद इस रिवर फ्रंट क्षेत्र को एक मनोरम पर्यटन स्थल के रूप में भी उभारा जाएगा। नदी किनारे वॉकवे, बैठने की आधुनिक व्यवस्था, घाटों का निर्माण, प्रकाश व्यवस्था, हरियाली और सफाई पर विशेष ध्यान देने की योजना है। इससे आसपास के क्षेत्र की रियल एस्टेट और व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ होगा।
इस योजना को साबरमती मॉडल से प्रेरणा
नगर निगम का मानना है कि अहमदाबाद की साबरमती नदी को विकसित कर जिस तरह पूरे शहर की तस्वीर बदल दी गई, उसी तरह भोपाल भी इस नई पहचान को अपनाने को तैयार है। शहर की जीवनशैली भी इससे बेहतर होगी। पानी के संरक्षण से भविष्य का जल संकट टल सकेगा।
नदी प्रदूषण रोकने पर भी रहेगा फोकस
शाहपुरा, टीटी नगर, मैनिट, पंचशील नगर, चार इमली और चूनाभट्टी क्षेत्र से निकलने वाले नाले सीधे नदी में प्रदूषण फैला रहे हैं। अब इन नालों को ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा जाएगा ताकि नदी में बहने वाला पानी स्वच्छ रहे और जीवनदायिनी धारा को कोई नुकसान न पहुंचे।
कालियासोत का पुनर्जीवन अभियान
पत्रिका समाचार पत्र ने नदी को मरते हुए देखकर एक बड़ा अभियान चलाया था। लगातार इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। इसी के सकारात्मक परिणाम स्वरूप नगर निगम परिषद ने रिवर फ्रंट योजना पर सहमति जताई और इसे अमृत 2.0 योजना में सम्मिलित किया गया।
स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिका
हुजूर विधायक ने भी इस विषय को विधानसभा और प्रशासन स्तर तक मजबूती से उठाया। उन्होंने कालियासोत को सदानीरा बनाने के लिए पूरा प्रयास करने का वादा किया था, जो अब जमीन पर दिखने लगा है।
लोगों की अपेक्षा
भोपाल के निवासियों को उम्मीद है कि जिस तरह बड़ा तालाब पूरे शहर की पहचान है, उसी तरह कालियासोत नदी भी एक गौरवशाली रूप फिर प्राप्त करेगी। नदी न सिर्फ सुंदरता, बल्कि जीवन का प्रतीक है। उसका पुनर्जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय सौगात साबित होगा।
परियोजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
यह योजना शहर में रोजगार, पर्यटन और जल संसाधन विकास को प्रोत्साहित करेगी। अवैध कब्जों के हटने से नदी किनारा खुले और सुरक्षित क्षेत्र के रूप में उभरेगा। स्वच्छ जलधारा नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करेगी।
