कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के भीतर लंबे समय से जारी तनाव और अंदरूनी खींचतान अब आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरों में है। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्दरमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता और पावर-शेयरिंग को लेकर लगातार मतभेद सामने आ रहे हैं। दोनों नेताओं के समर्थक और पार्टी के वरिष्ठ सदस्य इस खींचतान के प्रभाव को गंभीरता से देख रहे हैं।

कांग्रेस आलाकमान ने भी स्थिति को गंभीरता से लिया और दोनों नेताओं को विवाद को जल्द सुलझाने के निर्देश दिए। खींचतान के कारण पार्टी की छवि और शासन कार्यों पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए हाईलेवल मीटिंग और समन्वय की आवश्यकता महसूस की गई।
पहली ब्रेकफास्ट बैठक
29 नवंबर को पहली ब्रेकफास्ट मुलाकात सीएम सिद्दरमैया के कावेरी घर पर हुई थी। इस दौरान परोसे गए व्यंजन इडली-सांभर और उपमा थे। बैठक का उद्देश्य केवल सौहार्द्र स्थापित करना और दोनों नेताओं के बीच संवाद बढ़ाना था। इस बैठक में कई विधायक और पार्टी के वरिष्ठ सदस्य मौजूद थे।
हालांकि, पहली बैठक के बाद भी नेताओं के रुख में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आया। दोनों नेता अपने अपने विचारों पर अडिग रहे। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पावर-शेयरिंग और राज्य प्रशासन के कार्यों को लेकर मतभेद गहरे हैं।
दूसरी ब्रेकफास्ट बैठक
2 दिसंबर 2025 को डीके शिवकुमार के निवास पर दूसरी ब्रेकफास्ट बैठक आयोजित की गई। इस बार मेन्यू में नाटी चिकन और इडली परोसी गई। बैठक में कुनिगल विधायक रंगनाथ और डीके शिवकुमार के भाई एवं पूर्व सांसद डीके सुरेश भी मौजूद रहे।
बैठक के बाद डीके शिवकुमार ने कहा कि दोनों नेता राज्य में अच्छा शासन जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के विज़न और राज्य की जनता के लिए सुधारकारी नीतियों को लागू करना हमारी प्राथमिकता है।
पावर-शेयरिंग का मुद्दा
डीके शिवकुमार के समर्थक बार-बार पावर-शेयरिंग समझौते का हवाला देते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही इस समझौते की याद दिलाई जाती रही है। सिद्दरमैया और डीके शिवकुमार के बीच यह मतभेद लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्टी आलाकमान ने इसे सुलझाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन बैठकों का उद्देश्य केवल सियासी समन्वय और पार्टी के अंदरूनी कलह को नियंत्रित करना है। जनता और मीडिया के सामने दोनों नेता सामान्य दिखने का प्रयास करते हैं, लेकिन पावर डायनामिक्स में बदलाव की संभावना कम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेकफास्ट जैसी अनौपचारिक बैठकें नेताओं को शांतिपूर्ण माहौल में विचार-विमर्श करने का अवसर देती हैं। यह रणनीति लंबे समय तक पार्टी की स्थिरता बनाए रखने में मदद कर सकती है।
सियासी भविष्य और संभावनाएं
सिद्दरमैया और डीके शिवकुमार की यह बैठक कांग्रेस के अंदरूनी संघर्ष को कम कर सकती है या बढ़ा भी सकती है। दोनों नेता अपने-अपने समर्थकों के दबाव में हैं। यदि दोनों नेताओं ने समझौता किया, तो यह राज्य प्रशासन और विकास कार्यों के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है।
वहीं, यदि मतभेद कायम रहते हैं, तो यह कांग्रेस की स्थिति को कमजोर कर सकता है और विपक्ष को लाभ पहुंचा सकता है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले कुछ महीनों में पार्टी आलाकमान को इस मसले पर निर्णायक कदम उठाना होगा।
निष्कर्ष
कर्नाटक में सियासी खींचतान और ब्रेकफास्ट पर हुई दोनों बैठकों ने यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी के अंदर समन्वय और संवाद अत्यंत आवश्यक हैं। पावर-शेयरिंग, प्रशासनिक नीतियों और राज्य के विकास कार्यों को लेकर नेताओं के रुख में संतुलन लाना महत्वपूर्ण है। भविष्य में ऐसे बैठकें पार्टी को स्थिरता प्रदान कर सकती हैं और राज्य प्रशासन की छवि को मजबूत कर सकती हैं।
