लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। यह मामला एक फरार जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर रमीजुद्दीन नायक से संबंधित है, जिस पर जांच एजेंसियों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस का कहना है कि उसके मोबाइल फोन और डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच में ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे उसके संपर्कों और गतिविधियों का दायरा केवल लखनऊ तक सीमित न रहकर आगरा, नोएडा और अन्य जिलों तक फैलता हुआ दिखाई देता है।

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, मोबाइल डेटा में कई चैट, कॉल रिकॉर्ड और संपर्क सूची सामने आई हैं। इन्हीं रिकॉर्ड्स के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि रमीजुद्दीन 15 से अधिक युवतियों के संपर्क में था और उनसे लगातार संवाद कर रहा था। पुलिस का यह भी कहना है कि बातचीत के कुछ अंश ऐसे हैं, जिन्हें वे कथित दबाव और मानसिक प्रताड़ना की दिशा में जांच रहे हैं। इस पूरे मामले में पुलिस ने आरोपों की पुष्टि के लिए तकनीकी साक्ष्यों, बयान और अन्य डिजिटल सुरागों को एक साथ जोड़कर देखा है।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह जांच प्राथमिक स्तर से आगे बढ़ चुकी है और कई कोणों से तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है। इसी क्रम में रमीजुद्दीन पर पहले घोषित 25 हजार रुपये के इनाम को बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि उसकी गिरफ्तारी को शीघ्र सुनिश्चित किया जा सके और मामले की कड़ियां आपस में जोड़ी जा सकें।

जांच एजेंसियों के अनुसार, रमीजुद्दीन के माता-पिता को भी इस कथित साजिश के एक हिस्से के रूप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर यह कार्रवाई की गई। हालांकि, अधिकारी यह भी दोहराते हैं कि सभी आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत ही होगी और अंतिम निर्णय अदालत के अधिकार क्षेत्र में है।
उपायुक्त पुलिस पश्चिमी क्षेत्र विश्वजीत श्रीवास्तव ने मीडिया को बताया कि प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि रमीजुद्दीन का नेटवर्क केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं था। उनके अनुसार, विभिन्न शहरों से जुड़े संपर्कों के डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस टीम अलग-अलग जिलों के अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही है ताकि सूचनाओं का मिलान किया जा सके और तथ्यात्मक तस्वीर सामने लाई जा सके।
इस मामले में एक अहम पहलू यह भी है कि जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर कई सिम कार्ड, डिजिटल डिवाइस और ऑनलाइन प्रोफाइल्स से जुड़े सुराग मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल युग में अपराध की प्रकृति बदल गई है और ऐसे मामलों में तकनीकी जांच की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। मोबाइल डेटा ने इस केस में वही भूमिका निभाई है, क्योंकि उसी के जरिए कथित नेटवर्क की परतें खुलने का दावा किया जा रहा है।
पुलिस का यह भी कहना है कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है। यह कदम कानून के प्रावधानों के तहत तब उठाया जाता है जब आरोपी लंबे समय तक फरार रहता है और जांच में सहयोग नहीं करता। हालांकि, इस प्रक्रिया को लागू करने से पहले कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा, मानसिक दबाव के मामलों और डिजिटल निगरानी जैसे विषयों पर भी बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आरोप को अंतिम सत्य मानने से पहले जांच पूरी होना आवश्यक है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और पीड़ितों को कानूनी संरक्षण मिले।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी के पास इस मामले से जुड़ी कोई भी प्रासंगिक जानकारी हो, तो वह आगे आए और जांच में सहयोग करे। अधिकारियों का कहना है कि सहयोग करने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और कानून के दायरे में उन्हें सुरक्षा दी जाएगी।
इस बीच, रमीजुद्दीन की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। विभिन्न संभावित ठिकानों पर निगरानी रखी जा रही है और तकनीकी माध्यमों से उसकी लोकेशन ट्रैक करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, इनाम बढ़ाने का उद्देश्य केवल गिरफ्तारी को गति देना है, न कि किसी पूर्वाग्रह को बढ़ावा देना।
कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में संयमित भाषा और तथ्यपरक रिपोर्टिंग आवश्यक होती है। आरोप, जांच और न्यायिक निर्णय तीनों अलग-अलग चरण हैं और इन्हें आपस में गड्डमड्ड नहीं किया जाना चाहिए। पुलिस भी इसी सिद्धांत के तहत आगे बढ़ने की बात कह रही है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की अफवाह या भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री पर भी नजर रखी जा रही है ताकि जांच प्रभावित न हो।
फिलहाल, यह मामला जांच के अधीन है और आने वाले दिनों में जैसे-जैसे साक्ष्य एकत्र होंगे, तस्वीर और स्पष्ट होगी। पुलिस का कहना है कि कानून के तहत जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि निर्दोषों के अधिकारों की भी पूरी रक्षा की जाएगी।
