दक्षिण एशिया की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय का समापन हो गया है। बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और लंबे समय तक देश की राजनीति की केंद्रीय धुरी रहीं ख़ालिदा ज़िया का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 30 दिसंबर 2025 की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने सोशल मीडिया के माध्यम से की। लंबे समय से बीमार चल रहीं ख़ालिदा ज़िया का जाना न केवल उनके समर्थकों के लिए, बल्कि पूरे बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास के लिए एक गहरी क्षति है।

उनका जीवन संघर्ष, सत्ता, विवाद, लोकप्रियता और कटु राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से भरा रहा। एक साधारण गृहिणी से लेकर देश की सर्वोच्च कार्यकारी पद तक पहुंचने का उनका सफर बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया में महिला नेतृत्व की एक मिसाल माना जाता है।
बीमारी से जूझते हुए अंतिम दिन
ख़ालिदा ज़िया पिछले कई वर्षों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। उम्र के साथ उनकी बीमारियां बढ़ती चली गईं और वे सार्वजनिक जीवन से लगभग दूर हो चुकी थीं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उनकी हालत पिछले कुछ दिनों से लगातार नाजुक बनी हुई थी। 30 दिसंबर की सुबह उनका निधन हो गया, जिससे पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।
उनके निधन की खबर फैलते ही बांग्लादेश की राजनीति से जुड़े हर वर्ग ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। समर्थकों के साथ-साथ उनके राजनीतिक विरोधियों ने भी यह स्वीकार किया कि ख़ालिदा ज़िया ने बांग्लादेश की राजनीति को दशकों तक प्रभावित किया।
एक सामान्य जीवन से राजनीति तक का सफर
ख़ालिदा ज़िया का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। राजनीति से उनका कोई सीधा नाता नहीं था और न ही उन्होंने कभी यह कल्पना की थी कि वे एक दिन देश की प्रधानमंत्री बनेंगी। विवाह के बाद उनका जीवन एक सामान्य गृहिणी का था, जिसमें परिवार और घरेलू जिम्मेदारियां ही केंद्र में थीं।
उनके जीवन में बड़ा मोड़ तब आया, जब उनके पति और बांग्लादेश के तत्कालीन राष्ट्रपति ज़ियाउर रहमान की हत्या कर दी गई। यह घटना न केवल उनके निजी जीवन के लिए बल्कि देश की राजनीति के लिए भी एक निर्णायक क्षण थी। पति की मृत्यु के बाद ख़ालिदा ज़िया राजनीति में सक्रिय हुईं और धीरे-धीरे उन्होंने खुद को एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और नेतृत्व की कमान
पति की मृत्यु के बाद ख़ालिदा ज़िया ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की जिम्मेदारी संभाली। उस दौर में राजनीति पुरुष प्रधान थी और एक महिला नेता के लिए खुद को साबित करना आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने दृढ़ इच्छाशक्ति और राजनीतिक समझ के दम पर पार्टी को एकजुट रखा।
उनका नेतृत्व केवल भावनात्मक सहानुभूति पर आधारित नहीं था, बल्कि उन्होंने संगठनात्मक मजबूती और जनसमर्थन दोनों पर ध्यान दिया। धीरे-धीरे पार्टी देश की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक शक्तियों में से एक बन गई।
बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री
ख़ालिदा ज़िया का सबसे बड़ा राजनीतिक मुकाम तब आया, जब वे बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। यह क्षण केवल उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे देश की महिलाओं के लिए ऐतिहासिक था। एक ऐसे समाज में, जहां राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सीमित थी, उनका प्रधानमंत्री बनना सामाजिक बदलाव का प्रतीक बना।
प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था, प्रशासन और विदेश नीति पर अपनी छाप छोड़ी। उनके कार्यकाल के दौरान कई नीतिगत फैसले लिए गए, जिन्होंने बांग्लादेश की दिशा को प्रभावित किया।
सत्ता, संघर्ष और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता
ख़ालिदा ज़िया का राजनीतिक जीवन सत्ता और संघर्ष का मिश्रण रहा। उन्होंने न केवल सत्ता संभाली, बल्कि सत्ता से बाहर रहकर भी लंबी लड़ाइयां लड़ीं। बांग्लादेश की राजनीति में उनका नाम उस दौर से जुड़ा रहा, जब देश की राजनीति दो महिला नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती थी।
उनकी और उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के बीच की प्रतिस्पर्धा ने बांग्लादेश की राजनीति को दशकों तक परिभाषित किया। यह प्रतिद्वंद्विता कभी-कभी व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप और तीखे राजनीतिक संघर्षों में भी बदल गई।
विवाद और चुनौतियां
अपने लंबे राजनीतिक जीवन में ख़ालिदा ज़िया विवादों से भी अछूती नहीं रहीं। सत्ता में रहते हुए और सत्ता से बाहर रहते हुए उन पर कई आरोप लगे। इन विवादों ने उनके राजनीतिक करियर को कई बार कठिन दौर में पहुंचाया।
हालांकि, उनके समर्थकों का मानना रहा कि वे राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार हुईं, जबकि उनके आलोचक उन्हें सत्ता के दुरुपयोग का जिम्मेदार ठहराते रहे। इन सभी के बावजूद, उनकी राजनीतिक मौजूदगी कभी कमजोर नहीं पड़ी।
महिलाओं के लिए प्रेरणा
ख़ालिदा ज़िया का जीवन उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बना, जो राजनीति या सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ना चाहती थीं। उन्होंने यह साबित किया कि पारिवारिक जीवन से निकलकर भी देश की राजनीति में शीर्ष स्थान हासिल किया जा सकता है।
उनकी सफलता ने बांग्लादेश में महिला नेतृत्व को नई पहचान दी और कई महिलाओं को राजनीति में सक्रिय होने का साहस दिया।
अंतिम विदाई और विरासत
ख़ालिदा ज़िया का निधन एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि एक पूरे राजनीतिक युग का अंत है। उनका नाम बांग्लादेश के इतिहास में हमेशा दर्ज रहेगा। वे पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में, एक संघर्षशील नेता के रूप में और एक प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में याद की जाएंगी।
उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और बहस दोनों का विषय बनी रहेगी।
