बीते कुछ हफ्तों में ईरान की राजधानी तेहरान और देश के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शन की तेज़ लहर ने राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता को बढ़ा दिया है। इस उथल-पुथल का असर केवल आम नागरिकों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके केंद्र में खड़े ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और उनके करीबी सहयोगियों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ईरान में विरोध प्रदर्शन कई स्तरों पर फैले हुए हैं। सरकारी नीतियों, आर्थिक कठिनाइयों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण नागरिक गुस्से और असंतोष में हैं। इस स्थिति को लेकर ईरानी शासन के आंतरिक और बाहरी विश्लेषक चिंतित हैं। इज़राइल की खुफिया रिपोर्ट और ब्रिटिश मीडिया की खबरों के अनुसार, खामेनेई ने संभावित संकट और अस्थिरता के लिए एक आपातकालीन योजना बनाई है।
इस योजना का मूल तत्व यह है कि यदि देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और असंतुलन इस कदर बढ़ते हैं कि शासन अपने नियंत्रण को बनाए रखने में विफल हो जाए, तो सुप्रीम लीडर रूस भाग सकते हैं। बताया गया है कि इस गुप्त योजना में 86 वर्षीय अली खामेनेई, उनका परिवार, लगभग 20 करीबी सहयोगी और उनके उत्तराधिकारी माने जाने वाले बेटे मोज्तबा खामेनेई शामिल हैं।
इस योजना के तहत कथित रूप से अरबों डॉलर भी रूस ले जाने की व्यवस्था की गई है। यह कदम सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद की रूस पलायन रणनीति की याद दिलाता है। नवंबर 2024 में जब सीरियाई सरकार संकट में थी और बशर अल असद देश छोड़कर मॉस्को पहुंचे थे, उन्होंने वहां सुरक्षित जीवन बिताना शुरू कर दिया। इस दृष्टांत से खामेनेई का प्लान भी संरचनात्मक रूप से समान माना जा रहा है।
सुप्रीम लीडर के करीबी सूत्रों के अनुसार, खामेनेई रूस के लिए इसलिए चयन कर रहे हैं क्योंकि उन्हें रूस की राजनीतिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों में सामंजस्य नजर आता है। रूस और ईरानी संस्कृति के बीच ऐतिहासिक और सामाजिक समानताएं हैं, जो खामेनेई के लिए वहां जीवनयापन और सुरक्षा को आसान बना सकती हैं।
इस बीच ईरान में विरोध प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं। कई हिस्सों में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं और सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध की इस लहर को विदेशी ताकतों द्वारा बढ़ावा देने की भी चर्चा हो रही है। अमेरिका ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया है कि वह इस संकट में किसी तरह की दखलअंदाजी कर सकता है। इससे ईरानी शासन के भीतर असुरक्षा और रणनीतिक चिंताओं की स्थिति और जटिल हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति हाथ से निकल गई तो खामेनेई का रूस जाना उनके लिए एक रणनीतिक कदम होगा। इस योजना में केवल राजनीतिक और पारिवारिक संरक्षण ही शामिल नहीं है, बल्कि आर्थिक और वित्तीय संसाधनों की सुरक्षा भी प्रमुख है। अरबों डॉलर की राशि कथित रूप से रूस ले जाई जाएगी, ताकि शासन अस्थिर होने पर वित्तीय स्थिरता बनी रहे।
इस तरह के आपातकालीन प्लानिंग की चर्चा ईरान और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में लंबे समय से हो रही थी, लेकिन हाल की रिपोर्टों के अनुसार इसे और अधिक ठोस रूप दिया गया है। इजरायली खुफिया अधिकारी बेनी सबती का कहना है कि रूस ही खामेनेई का अंतिम गंतव्य होगा क्योंकि उनके पास अन्य किसी देश में समान सुरक्षा और समर्थन नहीं है।
बशर अल असद की रणनीति से तुलना करने वाले विश्लेषक यह भी कहते हैं कि रूस की भौगोलिक स्थिति और राजनीतिक सुरक्षा खामेनेई के लिए उपयुक्त प्रतीत होती है। वहीं, रूस ने अभी तक इस बारे में कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरानी राजनीतिक संकट बढ़ता जा रहा है।
ईरानी विरोध प्रदर्शन के पीछे मुख्य कारण आर्थिक कठिनाइयां, विदेशी दबाव और घरेलू असंतोष बताये जा रहे हैं। तेल निर्यात में उतार-चढ़ाव, महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक असमानताओं ने आम नागरिकों की नाराजगी को भड़का दिया है। विरोध प्रदर्शन अब मुख्य शहरों के अलावा छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी फैल गए हैं।
खामेनेई की योजना और देश छोड़ने के विकल्प की चर्चा यह संकेत देती है कि ईरानी शासन संभावित राजनीतिक संकट के प्रति सजग है। हालांकि, इस तरह की योजना का खुलासा होने से सरकार के भीतर तनाव बढ़ सकता है और विरोध प्रदर्शनियों को और प्रेरित कर सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच, ईरान के भविष्य पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या खामेनेई अपनी योजना के तहत रूस जाएंगे? क्या उनके जाने से देश में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ जाएगी? या क्या ईरानी प्रशासन इस चुनौती का सामना करते हुए विरोध प्रदर्शन को काबू में कर सकेगा? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में स्पष्ट होंगे।
