मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में एक बार फिर मतांतरण और छेड़छाड़ से जुड़ा मामला सामने आया है। जिला अस्पताल में 20 वर्षीय युवती से छेड़छाड़ करने और उसे धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने वाले दो युवक फैजान और साहिल को खंडवा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह मामला न केवल स्थानीय समाज के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह युवाओं की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति जागरूकता का उदाहरण भी है।
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम और एससी-एसटी (एट्रोसिटी) एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

घटना का प्रारंभ
पीड़िता ने मोघट थाना पुलिस को बताया कि लगभग एक सप्ताह पहले वह अपने रिश्तेदार का हाल जानने जिला अस्पताल गई थी। उसी समय पास के वार्ड में भर्ती एक मरीज से मिलने उसकी मुस्लिम सहेली भी आई थी। सहेली के साथ साहिल नाम का युवक भी मौजूद था।
कुछ समय बाद साहिल वहां से चला गया, लेकिन बाद में सहेली ने युवती के मोबाइल से साहिल को कॉल किया। इस कॉल के बाद साहिल के पास युवती का नंबर पहुंच गया।
साहिल की लगातार परेशानियाँ
इसके बाद साहिल ने युवती को बार-बार फोन करना शुरू किया। उसने कई बार कहा कि वह युवती को पसंद करता है। युवती ने साहिल के प्रस्तावों को ठुकरा दिया और उनसे दूरी बनाने की कोशिश की।
पीड़िता के अनुसार, गुरुवार को वह एक परिचित के साथ फिर से जिला अस्पताल गई। इसी दौरान साहिल और उसका दोस्त फैजान वहां पहुंच गए। दोनों आरोपियों ने युवती से जबरन बातें की और उसे अपने साथ चलने तथा धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव डालना शुरू किया।
युवती ने विरोध किया, लेकिन आरोपियों ने उसका हाथ पकड़ लिया। किसी तरह युवती ने हाथ छुड़ाया और बाहर भागी। इसके बाद उसने अपने परिचित को फोन कर बुलाया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
थाना प्रभारी धीरेश धारवाल ने बताया कि युवती की लिखित शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। आरोपियों को हिरासत में लेकर न्यायालय में पेश किया जाएगा।
पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई युवती की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम और एट्रोसिटी एक्ट
विशेषज्ञों के अनुसार, मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालने से रोकना है। इसी प्रकार, एट्रोसिटी एक्ट समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है और उनके खिलाफ हिंसा या प्रताड़ना को रोकता है।
इस मामले में दोनों कानूनों के तहत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई यह संदेश देती है कि किसी भी व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
युवती की सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता
घटना ने यह स्पष्ट किया कि महिलाओं और युवाओं की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। समाज और प्रशासन को मिलकर ऐसे मामलों से निपटना चाहिए। युवती की त्वरित मदद और पुलिस की सक्रियता ने इसे एक सकारात्मक उदाहरण बना दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता और कड़े कानून दोनों आवश्यक हैं।
भविष्य की दिशा
पुलिस ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई ही समाज में विश्वास बनाए रखती है। इसके अलावा, युवाओं और महिलाओं को अपने अधिकारों और कानूनी उपायों के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है।
यह घटना यह भी दर्शाती है कि शिक्षा, जागरूकता और कानूनी संरक्षण के माध्यम से समाज में बदलाव लाया जा सकता है।
