भारत की जानी-मानी आईवियर कंपनी लेंसकार्ट (Lenskart Solutions Ltd) ने सोमवार, 10 नवम्बर 2025 को शेयर बाजार में अपनी पहली दस्तक दी। लेकिन शुरुआती रुझान उम्मीदों के विपरीत रहे। लेंसकार्ट के शेयरों ने शुरुआत में 3 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹390 प्रति शेयर के स्तर पर कारोबार शुरू किया, जबकि इसका इश्यू प्राइस ₹402 तय किया गया था।

कमजोर शुरुआत, फिर उतार-चढ़ाव और वापसी
सुबह के सत्र में बीएसई पर शेयर ₹355.70 तक गिर गए — यानी 11.52% की गिरावट, लेकिन निवेशकों की रुचि लौटने से दोपहर तक स्टॉक ने तेजी दिखाई और ₹403.80 तक पहुंच गया, जो 0.44% की मामूली बढ़त को दर्शाता है।
एनएसई पर भी यही कहानी दोहराई गई — ₹395 पर लिस्टिंग के बाद शेयर ₹356.10 तक फिसले, लेकिन फिर सुधरकर ₹404 तक पहुंचे। इस स्तर पर कंपनी का बाजार पूंजीकरण लगभग ₹69,091 करोड़ के करीब रहा।
IPO में जबरदस्त उत्साह
हालांकि लिस्टिंग कमजोर रही, मगर लेंसकार्ट का IPO ज़बरदस्त तरीके से सब्सक्राइब हुआ। कंपनी के ₹7,278 करोड़ के आईपीओ को कुल 28.26 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। इसमें सबसे अधिक रुचि संस्थागत निवेशकों की ओर से देखने को मिली।
इस IPO में ₹2,150 करोड़ की नई इक्विटी जारी की गई, जबकि 12.75 करोड़ इक्विटी शेयर प्रमोटरों और मौजूदा निवेशकों द्वारा ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत बेचे गए।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि IPO से जुटाई गई राशि का उपयोग नई कंपनी-स्वामित्व वाली स्टोर्स (CoCo stores) खोलने, तकनीकी ढांचे और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने, ब्रांड मार्केटिंग और प्रमोशन बढ़ाने, और संभावित अधिग्रहणों के लिए किया जाएगा।
लेंसकार्ट की कहानी: ऑनलाइन से ऑफलाइन तक का सफर
लेंसकार्ट की शुरुआत 2008 में हुई थी। हालांकि, कंपनी ने अपना ऑनलाइन प्लेटफॉर्म 2010 में लॉन्च किया, जब भारत में ई-कॉमर्स का दौर बस शुरू ही हुआ था। तीन साल बाद, 2013 में दिल्ली में पहला ऑफलाइन स्टोर खुला और वहीं से कंपनी ने ऑम्नी-चैनल मॉडल (online + offline) की ओर कदम बढ़ाया।
आज लेंसकार्ट की उपस्थिति भारत के मेट्रो, टियर-1 और टियर-2 शहरों के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व के बाज़ारों तक है।
निवेशकों का भरोसा और दिग्गजों की भागीदारी
लेंसकार्ट के प्रति निवेशकों का भरोसा कोई नई बात नहीं है। SBI म्यूचुअल फंड ने प्री-IPO राउंड में ₹100 करोड़, जबकि डीमार्ट के संस्थापक राधाकिशन दमानी ने ₹90 करोड़ का निवेश किया था।
कंपनी के पास पहले से ही SoftBank Vision Fund, KKR, Temasek, ChrysCapital जैसे बड़े निवेशक हैं, जो इसके विस्तार और वैश्विक रणनीति पर दांव लगा रहे हैं।
IPO का मकसद: विकास और विस्तार
लेंसकार्ट के अनुसार, IPO का उद्देश्य केवल पूंजी जुटाना नहीं, बल्कि भारत में आईवियर रिटेलिंग को नई दिशा देना है। कंपनी का प्लान अगले तीन वर्षों में 200 से अधिक नए CoCo स्टोर खोलने का है, जिससे ग्रामीण और सेमी-अर्बन इलाकों में भी पहुंच बढ़ेगी।
इसके अलावा, लेंसकार्ट AI आधारित विज़न टेस्टिंग, स्मार्ट फ्रेम्स, और प्रीमियम आईवियर सेगमेंट पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
डिजिटल इनोवेशन और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर
कंपनी अब अपने AI-पावर्ड प्लेटफॉर्म और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को और मज़बूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत, ग्राहक अपने मोबाइल या वेबसाइट के माध्यम से 3D वर्चुअल ट्राय-ऑन, AI रिकमेंडेशन, और स्मार्ट लेंस टेस्टिंग का अनुभव कर सकते हैं।
ब्रांड मार्केटिंग और वैश्विक रणनीति
IPO से मिले फंड का एक बड़ा हिस्सा ब्रांड मार्केटिंग और ग्लोबल ब्रांड बिल्डिंग पर खर्च किया जाएगा। लेंसकार्ट अब भारतीय बाजार से आगे बढ़कर दक्षिण-पूर्व एशिया, यूएई, सऊदी अरब, और सिंगापुर में भी आक्रामक रूप से विस्तार कर रहा है।
IPO के बाद बाजार की धारणा
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर लिस्टिंग के बावजूद लेंसकार्ट का बिजनेस मॉडल मजबूत है। मार्केट विश्लेषक कहते हैं कि कंपनी का सस्टेनेबल मार्जिन, हाई ब्रांड वैल्यू, और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन स्ट्रक्चर इसे दीर्घकालिक निवेश के लिए आकर्षक बनाता है।
कई विश्लेषक अनुमान लगा रहे हैं कि आने वाले तिमाहियों में लेंसकार्ट 20% से अधिक सालाना ग्रोथ दर्ज कर सकता है, खासकर तब जब यह ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों मोर्चों पर समान रूप से ध्यान दे रहा है।
ग्राहक अनुभव और सामाजिक पहल
लेंसकार्ट केवल मुनाफे पर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी पर भी ध्यान देता है। कंपनी ने पिछले वर्षों में ‘Vision to All’ नामक पहल के तहत लाखों गरीबों को मुफ्त दृष्टि जांच और सस्ते चश्मे उपलब्ध कराए हैं। इसके अलावा, कंपनी अपने रीसायकल प्रोग्राम के तहत पुराने फ्रेम और लेंस को फिर से उपयोग करने योग्य बनाकर पर्यावरण के अनुकूल व्यवसाय मॉडल की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
भविष्य की राह
लेंसकार्ट आने वाले वर्षों में भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत पकड़ बनाना चाहता है। कंपनी की रणनीति है —
- स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का विस्तार,
- AI आधारित उत्पाद डिजाइनिंग,
- ग्राहक सेवा में ऑटोमेशन,
- और फ्रेंचाइज़ पार्टनर नेटवर्क का सशक्तीकरण।
वित्तीय विश्लेषकों के मुताबिक, अगर लेंसकार्ट इन योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू कर पाता है, तो यह भारत का पहला वैश्विक स्तर का आईवियर ब्रांड बन सकता है।
