मंगलवार की रात तुर्किये के आसमान में जो हुआ, उसने न सिर्फ एक विमान को निगल लिया बल्कि लीबिया की सैन्य और राजनीतिक दिशा को भी गहरे सवालों में डाल दिया। अंकारा के पास हायमाना क्षेत्र में हुए विमान हादसे में लीबिया के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अल-हद्दाद समेत आठ लोगों की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। यह सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं थी, बल्कि वह क्षण था जब रणनीति, कूटनीति और सत्ता की कई परतें एक साथ टूट गईं।

रात के अंधेरे में अचानक आसमान में तेज रोशनी दिखाई दी, उसके बाद एक जोरदार धमाका और फिर सन्नाटा। स्थानीय लोगों के लिए यह एक डरावना दृश्य था, जबकि लीबिया के लिए यह सैन्य नेतृत्व के एक अहम स्तंभ का अंत।
उड़ान, जो मिशन से लौटी थी लेकिन मंज़िल तक नहीं पहुंच सकी
यह फाल्कन-50 निजी जेट अंकारा के एसनबोगा एयरपोर्ट से उड़ान भर चुका था। इसमें सवार सभी लोग लीबिया और तुर्किये के बीच रक्षा सहयोग से जुड़ी उच्चस्तरीय बातचीत पूरी कर लौट रहे थे। उड़ान भरने के लगभग तीस मिनट बाद ही विमान में तकनीकी गड़बड़ी के संकेत मिलने लगे।
पायलट ने आपात लैंडिंग का संदेश भेजा, लेकिन इसके कुछ ही मिनटों बाद विमान से संपर्क पूरी तरह टूट गया। इसके बाद जो हुआ, वह अब जांच का विषय है, लेकिन घटनास्थल से मिले मलबे और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान बताते हैं कि विमान हवा में ही असंतुलित हो गया था।
हादसे के बाद का मंजर और राहत कार्य
विमान का मलबा अंकारा से लगभग 70 किलोमीटर दक्षिण हायमाना जिले के एक ग्रामीण इलाके में मिला। चारों ओर बिखरे धातु के टुकड़े, जली हुई जमीन और दूर तक फैली गंध यह बताने के लिए काफी थी कि हादसा कितना भीषण था।
तुर्किये की राहत और बचाव टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। हालांकि, विमान में सवार किसी भी व्यक्ति को बचाया नहीं जा सका। सभी की मौत घटनास्थल पर ही हो चुकी थी। सुरक्षा कारणों से अंकारा एयरपोर्ट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया और कई उड़ानों को अन्य शहरों की ओर मोड़ना पड़ा।
कौन थे मोहम्मद अल-हद्दाद और क्यों था उनका महत्व
मोहम्मद अल-हद्दाद अगस्त 2020 से लीबिया की सेना के चीफ ऑफ स्टाफ थे। उन्हें उस दौर में नियुक्त किया गया था जब लीबिया गृहयुद्ध, राजनीतिक बिखराव और विदेशी हस्तक्षेप से जूझ रहा था। अल-हद्दाद को एक संतुलनकारी चेहरा माना जाता था, जो सेना को एकीकृत रखने की कोशिश कर रहे थे।
उनकी मौजूदगी सिर्फ सैन्य निर्णयों तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे राजनीतिक स्थिरता के लिए भी अहम माने जाते थे। उनके नेतृत्व में तुर्किये के साथ रक्षा सहयोग मजबूत हुआ और लीबिया की सेना को आधुनिक प्रशिक्षण और रणनीतिक समर्थन मिला।
हादसे में जान गंवाने वाले अन्य वरिष्ठ अधिकारी
इस हादसे में सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि लीबिया के सैन्य ढांचे का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो गया। थल सेना प्रमुख, ब्रिगेडियर जनरल, वरिष्ठ सैन्य सलाहकार, सैन्य फोटोग्राफर और विमान के तीन क्रू मेंबर सभी इस दुर्घटना का शिकार बने।
इन मौतों का असर केवल व्यक्तिगत क्षति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में लीबिया की सैन्य कमान और नीति निर्धारण पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा।
तुर्किये और लीबिया के रिश्तों पर असर
तुर्किये और लीबिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में सैन्य और रणनीतिक रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं। तुर्किये ने लीबिया की UN समर्थित सरकार को राजनीतिक और सैन्य समर्थन दिया है। इस हादसे ने इन रिश्तों को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया है।
तुर्किये सरकार ने जांच के लिए विशेष टीम गठित की है और लीबिया सरकार को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है। दोनों देशों ने संयुक्त जांच की दिशा में कदम बढ़ाने का फैसला किया है।
लीबिया की आंतरिक राजनीति पर संभावित प्रभाव
लीबिया पहले ही राजनीतिक विभाजन से जूझ रहा है। एक ओर त्रिपोली में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार है और दूसरी ओर पूर्वी लीबिया में अलग सैन्य सत्ता का प्रभाव है। अल-हद्दाद की मौत उस संतुलन को कमजोर कर सकती है, जिसे बनाए रखने की कोशिश लंबे समय से की जा रही थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हादसा सत्ता संघर्ष को और तेज कर सकता है। सेना के भीतर नेतृत्व को लेकर नए समीकरण उभर सकते हैं, जिससे देश की स्थिरता पर असर पड़ना तय है।
जांच, सवाल और भविष्य
तुर्किये के न्याय मंत्रालय ने हादसे की जांच के लिए अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। तकनीकी खराबी की वजह क्या थी, क्या यह सिर्फ मशीनरी फेल्योर था या इसके पीछे कोई और कारण, यह सभी सवाल अब जांच का हिस्सा हैं।
लीबिया सरकार ने भी अपनी जांच टीम तुर्किये भेजने का निर्णय लिया है। दोनों देशों के लिए यह जरूरी है कि हादसे की सच्चाई सामने आए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
