मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में हाल ही में लोकायुक्त पुलिस की एक कार्रवाई ने प्रदेश भर में हलचल मचा दी है। यह कोई साधारण मामला नहीं, बल्कि एक ऐसे आलीशान साम्राज्य का खुलासा है जिसे देखकर जांच अधिकारी भी दंग रह गए। यह साम्राज्य किसी फिल्मी खलनायक का नहीं, बल्कि प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर जी.पी. मेहरा का है — जिनके ठिकानों से अरबों रुपये की बेहिसाब संपत्ति, शानदार फार्महाउस, मालदीव्स जैसे लग्जरी कॉटेज, 17 टन शहद, और कृषि व फिश फार्मिंग की यूनिटें बरामद हुईं।

यह पूरा मामला नर्मदापुरम से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम सैनी (सेमरी हरचंद के पास) का है, जहां 100 एकड़ से अधिक भूमि पर बना एक फार्महाउस किसी अंतरराष्ट्रीय रिजॉर्ट से कम नहीं। लोकायुक्त की टीम जब यहां पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर हर कोई अवाक रह गया। खूबसूरत सड़कों, हरे-भरे बगीचों, तालाबों और महंगे कॉटेजों से सजा यह परिसर किसी पर्यटन स्थल की तरह चमक रहा था।
भ्रष्टाचार की यह गाथा — एक इंजीनियर से अरबपति तक का सफर
जी.पी. मेहरा, जो कभी सरकारी नौकरी में एक जिम्मेदार इंजीनियर के रूप में काम करते थे, धीरे-धीरे उस भ्रष्ट तंत्र का हिस्सा बन गए जिसने राज्य की सार्वजनिक परियोजनाओं को निजी लाभ का माध्यम बना दिया। सूत्रों के अनुसार, उनके कार्यकाल में करोड़ों रुपये के ठेके बिना उचित प्रक्रिया के मंजूर हुए, कई फर्जी बिल पास किए गए और सरकारी फंड्स को निजी खातों में डायवर्ट किया गया।
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद अब यह साफ हो गया है कि यह भ्रष्टाचार किसी एक-दो साल का नहीं, बल्कि दशकों पुराना खेल था, जिसमें राजनीतिक और प्रशासनिक मिलीभगत की बू साफ महसूस होती है।
फार्महाउस या ‘मिनी मालदीव्स’?
लोकायुक्त टीम ने जब अंदर प्रवेश किया, तो 32 निर्माणाधीन और 7 तैयार कॉटेज देखकर जांचकर्ता भी दंग रह गए। यह फार्महाउस इतना आलीशान था कि स्थानीय लोग इसे अब “मालदीव्स थीम रिजॉर्ट” कहने लगे हैं। यहां कृत्रिम तालाबों के किनारे बने कॉटेज, लक्जरी गार्डन, फिश फार्मिंग यूनिट और शहद उत्पादन केंद्र तक मौजूद हैं। हर कॉटेज में आधुनिक फर्नीचर, इंपोर्टेड फिटिंग्स, और एयर-कंडीशंड कमरे — सब कुछ किसी 5-स्टार रिजॉर्ट जैसा।
टीम को यहां 17 टन शहद, 6 ट्रैक्टर, 2 गौशालाएं, 2 बड़े तालाब, और महंगे कृषि उपकरणों की पूरी यूनिट मिली। इतना ही नहीं, परिसर में बिछी सड़कें, बिजली व्यवस्था और सिंचाई सिस्टम भी निजी स्तर पर किसी सरकारी प्रोजेक्ट से बढ़कर थे।
लोकायुक्त की अब तक की कार्रवाई में सबसे बड़ा खुलासा
लोकायुक्त पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों और संपत्तियों की प्रारंभिक गणना के अनुसार, अरबों रुपये की संपत्ति का खुलासा हुआ है। इनमें कई अघोषित जमीनें, इन्वेस्टमेंट डीड्स, बैंक अकाउंट्स, और कंपनियों में हिस्सेदारी के प्रमाण मिले हैं। जांच टीम अब इस पूरे मामले को अनुपातहीन संपत्ति (Disproportionate Assets Case) के रूप में आगे बढ़ा रही है।
राजनीतिक संरक्षण की चर्चा
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि मेहरा के राजनीतिक संपर्क बेहद मजबूत थे। कांग्रेस शासनकाल में उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर पदोन्नति मिली और बीजेपी शासन में भी उन्होंने प्रभाव बनाए रखा। उनकी ‘शांत और सौम्य’ छवि ने लंबे समय तक भ्रष्टाचार की परत को ढककर रखा, लेकिन अब लोकायुक्त की जांच ने सारी परतें खोल दी हैं| कहा जा रहा है कि कई राजनेता और ठेकेदार इस नेटवर्क का हिस्सा थे। लोकायुक्त टीम अब उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।
फार्महाउस में मिले गुप्त दस्तावेज और विदेशी निवेश के संकेत
लोकायुक्त को फार्महाउस के ऑफिस कक्ष से दर्जनों फाइलें और पेनड्राइव मिलीं, जिनमें निवेश के रिकॉर्ड दर्ज हैं। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि मेहरा ने न केवल नर्मदापुरम, बल्कि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और यहां तक कि विदेशों में भी निवेश किया है। एक फाइल में मालदीव्स और दुबई की प्रॉपर्टी डीलिंग से संबंधित ईमेल कॉपी भी मिली है, जिससे यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि उन्होंने काला धन विदेशों में भी भेजा।
जनता में गुस्सा और हैरानी
इस खुलासे के बाद नर्मदापुरम समेत पूरे मध्य प्रदेश में चर्चा है कि जब एक सरकारी इंजीनियर इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा कर सकता है, तो बाकी अफसरों का क्या हाल होगा।
सोशल मीडिया पर लोग लगातार सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी संपत्ति बनते-बनते किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद अब आम नागरिकों की उम्मीद है कि इस केस को सिर्फ ‘छापे’ तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि संपत्ति जब्ती और जेल तक कार्रवाई पहुंचेगी।
लोकायुक्त की विस्तृत जांच – क्या होगा आगे?
लोकायुक्त टीम ने फार्महाउस से जब्त दस्तावेजों, जमीनों और बैंक खातों का मूल्यांकन शुरू कर दिया है। इस पूरी जांच के लिए विशेषज्ञों की एक टीम गठित की गई है जिसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट, बैंकिंग अधिकारी और तकनीकी विश्लेषक शामिल हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि अगर प्रारंभिक अनुमान सही निकले, तो यह अब तक की सबसे बड़ी अनुपातहीन संपत्ति का मामला बन सकता है।
भ्रष्टाचार पर जनता की निगाहें
मध्य प्रदेश में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई अफसरों के घरों से करोड़ों की संपत्ति बरामद हो चुकी है। लेकिन जी.पी. मेहरा का मामला इसलिए अलग है क्योंकि यहां सिर्फ संपत्ति ही नहीं, बल्कि भव्यता और दिखावे की हदें पार कर दी गईं। यह पूरा फार्महाउस एक प्रतीक बन गया है कि कैसे सरकारी पद का दुरुपयोग करके कोई व्यक्ति आम जनता के पैसे से अपना “स्वर्ग” बना सकता है।
निष्कर्ष: एक सच्चाई जो सिस्टम को आईना दिखाती है
लोकायुक्त की यह कार्रवाई सिर्फ एक छापा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि अब भ्रष्टाचार को छिपाना आसान नहीं। यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और ईमानदारी की अहमियत को फिर से सामने लाता है। जब तक सिस्टम में सख्त कार्रवाई और निगरानी की व्यवस्था नहीं होती, तब तक ऐसे “मालदीव्स फार्महाउस” देश के हर कोने में खड़े होते रहेंगे।
