जर्मन फुटबॉल के महान खिलाड़ी और फीफा विश्व कप विजेता लोथर मैथॉस ने कोलकाता दौरे के दौरान भारतीय फुटबॉल के भविष्य के लिए एक स्पष्ट संदेश दिया। मैथॉस ने जोर देकर कहा कि भारतीय फुटबॉल की प्रगति मुख्य रूप से युवाओं की कोचिंग और प्रशिक्षण के स्तर पर निर्भर करती है।
कोलकाता पुलिस महिला मैत्री कप फुटबॉल टूर्नामेंट के फाइनल में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होने पर उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि छोटे देशों की हालिया उपलब्धियाँ, जैसे कि केप वर्डे का फीफा विश्व कप 2026 के लिए क्वालीफाई करना, भारतीय फुटबॉल के लिए एक सबक हो सकता है।

मैथॉस ने कहा, “केप वर्डे केवल 5,00,000 की आबादी वाला देश है। उनकी प्रतिभाएँ भारत के खिलाड़ियों से बेहतर नहीं हैं, लेकिन उन्होंने महासंघ, सरकार, फुटबॉल क्लबों और अकादमियों के साथ मिलकर बेहतरीन काम किया। हमें भी यही करना होगा और युवाओं के लिए सही शिक्षक या कोच ढूँढना होगा। सही कोचिंग के बिना खेल में सफलता असंभव है।”
शिक्षा और फुटबॉल में समानता
मैथॉस ने शिक्षा और खेल के बीच तुलना करते हुए कहा कि जिस प्रकार अच्छे शिक्षक से छात्रों का प्रदर्शन बेहतर होता है, उसी प्रकार अच्छे कोच से युवा खिलाड़ी उत्कृष्ट बनते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवावस्था में अच्छे कोच मिलने से 18 वर्ष से अधिक आयु के खिलाड़ियों की गुणवत्ता भी सुधरती है।
उन्होंने कहा, “जब आपके पास अच्छे खिलाड़ी होंगे, तो आपके पास बेहतर परिणाम होंगे। यही भविष्य में भारतीय फुटबॉल का रास्ता हो सकता है।” उनके अनुसार, कोचिंग और प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारना ही देश की फुटबॉल क्षमता को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की कुंजी है।
फुटबॉल में महान खिलाड़ियों की तुलना
मैथॉस ने अपनी बातचीत में एक पुरानी बहस का जिक्र भी किया – डिएगो माराडोना बनाम लियोनेल मेसी। उन्होंने माना कि यह तुलना लगभग असंभव है। “यह एक बहुत ही कठिन प्रश्न है और मैं इसका उत्तर नहीं दे सकता। फुटबॉल का समय बदल गया है। आज और 35 साल पहले के फुटबॉल की तुलना नहीं की जा सकती।”
उन्होंने कहा कि उनके दौर में उन्होंने रोनाल्डो और माराडोना जैसे खिलाड़ियों के खिलाफ खेला, लेकिन मेसी के खिलाफ कभी नहीं। “फुटबॉल में रोनाल्डो, माराडोना और इन जैसे खिलाड़ियों का होना अच्छा है। ये खिलाड़ी बच्चों को, विशेषकर लड़कियों को प्रेरणा देते हैं। उनकी शैली और खेल भावना युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।”
मेसी और रोनाल्डो की व्यक्तिगत पसंद
मैथॉस ने अपने व्यक्तिगत दृष्टिकोण में कहा कि उनकी पसंद मेसी की ओर झुकी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया, “मेसी तकनीकी रूप से बेहतरीन हैं, जबकि रोनाल्डो अधिक शक्तिशाली हैं। मैं तकनीकी फुटबॉल की ओर अधिक झुका हूँ। यह उनके खेलने की शैली का परिणाम है। इसका मतलब यह नहीं है कि रोनाल्डो के पास तकनीक नहीं है, लेकिन मेसी की तकनीक अधिक प्रभावशाली है।”
भारत में फुटबॉल सुधार के लिए सुझाव
मैथॉस ने भारत में फुटबॉल के लिए कई सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। फुटबॉल क्लबों, अकादमियों और निजी संस्थाओं को मिलकर युवाओं के लिए बेहतरीन प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे देशों की सफलता यह दिखाती है कि यदि सही योजना और प्रशिक्षक हों तो सीमित संसाधनों के बावजूद भी वैश्विक स्तर पर सफलता संभव है।
उन्होंने अपने संदेश को और स्पष्ट करते हुए कहा कि फुटबॉल में सफलता का मूल आधार जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण, कोचिंग और खिलाड़ियों की मानसिक और शारीरिक तैयारी है।
भारतीय फुटबॉल के लिए भविष्य
मैथॉस ने कहा, “भारत में फुटबॉल का भविष्य उज्जवल है, बशर्ते हम जमीनी स्तर पर सुधार करें। सही कोच, मजबूत अकादमी और खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित करने होंगे। खिलाड़ियों का चयन और प्रशिक्षण एकदम वैज्ञानिक तरीके से होना चाहिए। युवा खिलाड़ी तभी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सफल हो सकते हैं।”
उन्होंने युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण भी पेश किए। उनके अनुसार, खेल में सफलता के लिए केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही मार्गदर्शन और अनुशासन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
लोथर मैथॉस का संदेश स्पष्ट है: भारत को फुटबॉल में सफलता पाने के लिए जमीनी स्तर पर कोचिंग सुधारनी होगी, तकनीकी प्रशिक्षण को बढ़ावा देना होगा और युवा खिलाड़ियों में खेल भावना और अनुशासन विकसित करना होगा।
उनकी सलाह पर अमल करने से भारत न केवल एशियाई स्तर पर, बल्कि वैश्विक फुटबॉल मानचित्र पर भी अपनी पहचान बना सकता है।
