मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा और दूरगामी कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने न केवल बस सेवाओं को नई तकनीक और बेहतर सुविधाओं से जोड़ने की योजना बनाई है, बल्कि इस पूरे अभियान को एक मजबूत पहचान देने के लिए आम नागरिकों और रचनात्मक प्रतिभाओं को सीधे भागीदारी का अवसर भी दिया है। इसी क्रम में ‘मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ के लिए एक विशेष लोगो डिजाइन प्रतियोगिता की घोषणा की गई है, जो राज्य की परिवहन व्यवस्था को एक विशिष्ट प्रतीक प्रदान करेगी।

यह प्रतियोगिता केवल एक डिजाइन अभ्यास नहीं है, बल्कि यह उस सोच का प्रतीक है जिसमें सरकार जनता को विकास की प्रक्रिया का सहभागी बनाना चाहती है। एक ऐसा लोगो, जो बस सेवा की आत्मा, यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और विश्वास को दर्शाए, आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश की पहचान बनेगा।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना की पृष्ठभूमि
राज्य में सार्वजनिक परिवहन लंबे समय से सुधार की आवश्यकता महसूस कर रहा था। कई ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में यात्रियों को सुरक्षित और समयबद्ध बस सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही थीं। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक व्यापक योजना तैयार की गई, जिसे मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना नाम दिया गया।
इस योजना का उद्देश्य केवल बसों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि यात्रियों को एक ऐसा अनुभव देना है जिसमें सफर सुरक्षित, आरामदायक और तकनीकी रूप से उन्नत हो। आधुनिक बसें, बेहतर समय प्रबंधन, डिजिटल टिकटिंग, ट्रैकिंग सिस्टम और यात्री सुविधाएं इस योजना की मूल आत्मा हैं। इन्हीं लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक विशेष संस्था का गठन किया गया।
MPYPIL की स्थापना और भूमिका
मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड का गठन इसी उद्देश्य से किया गया है कि राज्य की परिवहन व्यवस्था को एक पेशेवर, पारदर्शी और दीर्घकालिक मॉडल पर संचालित किया जा सके। यह संस्था न केवल बस सेवाओं के संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी, बल्कि परिवहन से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास, रखरखाव और विस्तार में भी अहम भूमिका निभाएगी।
MPYPIL को एक कॉर्पोरेट पहचान देने के लिए यह जरूरी समझा गया कि इसका एक ऐसा लोगो हो, जो जनता के मन में भरोसा पैदा करे और सरकार की सेवा भावना को दर्शाए। इसी सोच से लोगो डिजाइन प्रतियोगिता की परिकल्पना की गई।
लोगो प्रतियोगिता क्यों है खास
यह प्रतियोगिता कई मायनों में अनोखी है। पहली बार राज्य स्तर पर सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी किसी संस्था के लिए इतना बड़ा इनाम रखकर लोगो डिजाइन आमंत्रित किए गए हैं। प्रतियोगिता देशभर के छात्रों, फ्रीलांसर कलाकारों, डिजाइनरों और प्रोफेशनल एजेंसियों के लिए खुली है।
यह पहल रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ यह संदेश भी देती है कि सरकारी संस्थाएं अब पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर आधुनिक ब्रांडिंग और पहचान को महत्व दे रही हैं। एक अच्छा लोगो केवल देखने में सुंदर नहीं होता, बल्कि वह संस्था के मूल्यों, दृष्टि और उद्देश्य को भी दर्शाता है।
पुरस्कार राशि और प्रतिभागियों के लिए अवसर
इस प्रतियोगिता में कुल आठ लाख रुपये तक के पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले डिजाइन को पांच लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा दूसरे और तीसरे स्थान के लिए भी आकर्षक इनाम रखे गए हैं। यह राशि न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि किसी भी डिजाइनर के करियर में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।
इस प्रतियोगिता के माध्यम से चयनित लोगो वर्षों तक राज्य की बस सेवाओं, दस्तावेजों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रचार सामग्री में उपयोग किया जाएगा। इस तरह विजेता का नाम और रचना स्थायी रूप से मध्यप्रदेश के विकास से जुड़ जाएगी।
प्रथम पुरस्कार: ₹5,00,000 (5 लाख रुपये)
द्वितीय पुरस्कार: ₹2,00,000 (2 लाख रुपये)
तृतीय पुरस्कार: ₹1,00,000 (1 लाख रुपये)
संस्कृत टैगलाइन की अनिवार्यता और उसका महत्व
इस प्रतियोगिता की सबसे विशिष्ट शर्त यह है कि लोगो के साथ संस्कृत भाषा में एक प्रभावशाली टैगलाइन अनिवार्य रूप से शामिल होनी चाहिए। संस्कृत भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा की प्रतीक भाषा है। इसके प्रयोग से यह संदेश देना चाहा गया है कि आधुनिक तकनीक और विकास के साथ-साथ राज्य अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ा हुआ है।
टैगलाइन ऐसी होनी चाहिए जो यात्रियों के प्रति सेवा, सुरक्षा और उत्तरदायित्व की भावना को दर्शाए। यह आदर्श वाक्य संस्था के उद्देश्य को संक्षेप में व्यक्त करे और लोगों के मन में विश्वास जगाए। संस्कृत की गरिमा और संक्षिप्तता इसे और अधिक प्रभावी बनाती है।
डिजाइन में किन बातों का रखा जाए ध्यान
लोगो डिजाइन करते समय प्रतिभागियों को यह समझना होगा कि यह केवल एक ग्राफिक नहीं है, बल्कि यह एक सार्वजनिक सेवा की पहचान है। इसमें मध्यप्रदेश की भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विशेषताओं की झलक होनी चाहिए। रंग संयोजन ऐसा हो जो विश्वास, गति और सुरक्षा का भाव उत्पन्न करे।
डिजाइन सरल, यादगार और हर माध्यम में उपयोग योग्य होना चाहिए। चाहे वह बस के बाहरी हिस्से पर हो, मोबाइल एप पर हो या किसी आधिकारिक दस्तावेज पर, लोगो हर जगह प्रभावी दिखना चाहिए। टैगलाइन और प्रतीक चिन्ह के बीच संतुलन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आवेदन प्रक्रिया और समयसीमा
प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए इच्छुक प्रतिभागियों को अपना डिजाइन निर्धारित ईमेल पते पर भेजना होगा। डिजाइन के साथ आवश्यक विवरण और घोषणा पत्र भी संलग्न किया जाना आवश्यक है। आवेदन की अंतिम तिथि जनवरी 2026 के अंत तक निर्धारित की गई है, जिससे प्रतिभागियों को पर्याप्त समय मिल सके।
आधिकारिक वेबसाइट पर प्रतियोगिता से संबंधित सभी नियम और शर्तें उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे। चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी जाएगी और विशेषज्ञों की समिति द्वारा सर्वश्रेष्ठ डिजाइनों का मूल्यांकन किया जाएगा।
ईमेल आईडी: admin.mpypil@mp.gov.in
अंतिम तिथि: 30 जनवरी 2026 (शाम 5:00 बजे तक)।
विस्तृत जानकारी: नियम, शर्तें और आवेदन फॉर्म के लिए परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.transport.mp.gov.in पर जाएं।
मध्यप्रदेश के युवाओं और कलाकारों के लिए सुनहरा अवसर
यह प्रतियोगिता विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। कला, डिजाइन और रचनात्मकता से जुड़े छात्रों को अपनी प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर दिखाने का यह एक दुर्लभ अवसर है। एक सरकारी संस्था के लिए लोगो डिजाइन करना किसी भी कलाकार के पोर्टफोलियो में एक मजबूत उपलब्धि मानी जाती है।
इसके साथ ही यह पहल यह भी दर्शाती है कि सरकार नवाचार और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए तैयार है। हरिगीत प्रवाह की तरह यह अवसर भी प्रतिभा को सही दिशा में आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।
सार्वजनिक परिवहन और पहचान का संबंध
किसी भी सार्वजनिक सेवा की पहचान जनता के विश्वास से जुड़ी होती है। जब लोग किसी बस को दूर से देखते हैं और उसके लोगो से ही सुरक्षा और भरोसे का अनुभव करते हैं, तभी वह सेवा सफल मानी जाती है। एक मजबूत प्रतीक चिन्ह लोगों के मन में सकारात्मक छवि बनाता है और सेवा के प्रति अपनापन पैदा करता है।
मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल इसी दिशा में एक मजबूत कदम है, जिसमें परिवहन को केवल साधन नहीं, बल्कि एक सम्मानजनक सेवा के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
भविष्य की परिवहन व्यवस्था की झलक
इस लोगो प्रतियोगिता के पीछे एक व्यापक दृष्टि छिपी है। आने वाले समय में जब नई बसें सड़कों पर उतरेंगी, डिजिटल प्लेटफॉर्म सक्रिय होंगे और यात्री सुविधाएं बढ़ेंगी, तब यह लोगो उस परिवर्तन का प्रतीक बनेगा। यह केवल वर्तमान की नहीं, बल्कि भविष्य की पहचान होगी।
इस तरह यह प्रतियोगिता केवल एक इनाम जीतने का मौका नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के विकास की कहानी का हिस्सा बनने का अवसर है।
