महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के शहरी ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत कर दी है। दशकों से विवादों और कानूनी उलझनों में घिरे पगड़ी सिस्टम को समाप्त कर एक बिल्कुल नया नियामक ढांचा (रेगुलेटरी फ्रेमवर्क) लागू किए जाने की तैयारी की जा रही है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधान सभा में यह घोषणा करते हुए साफ कहा कि मुंबई को इस पुराने और जटिल किरायेदारी मॉडल से मुक्त करना समय की मांग है, क्योंकि इसी प्रणाली के कारण रिडेवलपमेंट के हजारों प्रोजेक्ट वर्षों से रुके पड़े हैं।

पगड़ी सिस्टम, जो अपने समय में एक उपयोगी किरायेदारी मॉडल था, आज मुंबई के लिए सबसे बड़ी शहरी समस्या बन चुका है। हजारों इमारतें जर्जर हालत में खड़ी हैं, लेकिन उनमें रहने वाले किरायेदार और मालिक कानूनी अधिकारों को लेकर इस कदर उलझे हैं कि उन्हें तोड़कर पुनर्निर्माण करना लगभग असंभव हो गया है।
सड़कें तंग हो चुकी हैं, इमारतें खतरनाक स्थिति में हैं और कई बार हल्की सी बारिश भी उन मकानों की छतों को गिराने के लिए काफी होती है। ऐसे में सरकार का यह कदम केवल व्यवस्था में बदलाव नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की सुरक्षा और मुंबई के भविष्य से जुड़ा फैसला है।
पगड़ी सिस्टम क्या है और यह कैसे शुरू हुआ?
आज पगड़ी सिस्टम के नाम पर विवाद खड़े हो रहे हैं, लेकिन इसकी शुरुआत का इतिहास बहुत पुराना है। 1940 के दशक में मुंबई का आवास संकट गंभीर था। शहर तेजी से बढ़ रहा था और लोगों को रहने की जगह चाहिए थी। ऐसे में मकान मालिकों ने किरायेदारों से एकमुश्त बड़ी रकम लेकर उन्हें किराये पर मनचाही अवधि तक रहने की अनुमति दी। यह एक तरह का स्थायी किरायेदारी अधिकार था, जिसमें किराया बेहद कम होता था।
यह व्यवस्था बाद में रेंट कंट्रोल एक्ट के तहत सुरक्षित हो गई, जिसके कारण किराया वर्षों तक बढ़ाया ही नहीं जा सका। आज यह किराया इतना कम है कि कई जगह 10 से 50 रुपये प्रति माह तक है, जबकि उन्हीं इलाकों में बाजार मूल्य हजारों या लाखों में होता है।
किरायेदार को यहां लगभग स्थायी अधिकार मिलता था। वह अपार्टमेंट बेच भी सकता था, जिसके बदले उसे एक बड़ी रकम मिलती थी। इसी रकम को पगड़ी कहा जाता था। मकान मालिक को उसका एक हिस्सा मिलता था, और किरायेदार नया किरायेदार खोजकर पगड़ी ले सकता था।
यह मॉडल तब उपयोगी था, जब मुंबई में आधुनिक कानून और हाईराइज इमारतें नहीं थीं। लेकिन अब यही मॉडल शहर के विकास में सबसे बड़ी बाधा बन गया है।
समस्या कैसे गहराई? किरायेदार और मकान मालिक दोनों परेशान
पगड़ी सिस्टम में दोनों पक्षों को समस्याएं हैं, लेकिन अलग-अलग रूपों में।
किरायेदार का डर यह है कि रिडेवलपमेंट के बाद उसे कम जगह मिलेगी या उसे पूरी तरह हटाया जा सकता है।
मकान मालिक की समस्या यह है कि किराया इतना कम है कि रखरखाव के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं। बहुत से मकान मालिक उन इमारतों की मरम्मत तक नहीं करा पाते जिनमें आग लगने या ढहने का खतरा हर समय बना रहता है।
कई मामलों में तो इमारतें इतनी जर्जर हैं कि नगरपालिका ने नोटिस देकर उन्हें तुरंत खाली करने को कहा, लेकिन किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच समझौता न होने के कारण इमारतें आज भी खड़ी हैं।
रिडेवलपमेंट क्यों अटका? यह सबसे बड़ा सवाल
मुंबई में हजारों इमारतें ऐसी हैं जिन्हें पुनर्निर्माण की सख्त जरूरत है। लेकिन रिडेवलपमेंट की राह में दो प्रमुख रुकावटें हैं।
पहली, किरायेदार अपनी जगह नहीं छोड़ना चाहते क्योंकि उन्हें लगता है कि नए फ्लैट में उन्हें वह अधिकार नहीं मिलेगा जो पुराने सिस्टम में है।
दूसरी, मकान मालिकों को रिडेवलपमेंट में मिलने वाला लाभ तय नहीं है, और वे कम किराये की वजह से आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
यह पूरा मॉडल विवाद, मुकदमों और अनिश्चितता से भरा है।
नया नियामक ढांचा क्यों जरूरी था?
सरकार ने स्वीकार किया कि पगड़ी सिस्टम की वजह से
- मुंबई का शहरी ढांचा जर्जर हो रहा है
- रिडेवलपमेंट वर्षो से रुका है
- मालिक व किरायेदार के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है
- निजी डेवलपर्स ऐसे प्रोजेक्ट्स से दूर रहते हैं
- काले धन का लेनदेन बढ़ रहा है
इसलिए सरकार अलग रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लेकर आई है, जो दोनों पक्षों के अधिकार सुरक्षित करेगा।
नया कानून क्या बदलेगा?
नया ढांचा किरायेदारों को अधिकार देगा कि रिडेवलपमेंट के बाद उन्हें मालिकी का दर्जा मिले। यह परिवर्तन ऐतिहासिक है, क्योंकि पहली बार किरायेदारों को वास्तविक मालिकाना अधिकार मिल सकता है।
मकान मालिकों को उचित मुआवजा मिलेगा, जिससे वे रिडेवलपमेंट के लिए सहमत होंगे।
कानूनी स्पष्टता आने से अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम होगा और विकास तेज होगा।
शहर के आवास संकट को हल करने में मदद मिलेगी, क्योंकि हजारों पुरानी इमारतें आधुनिक बिल्डिंग्स में बदल जाएंगी।
नए कानून का मुंबई पर आर्थिक प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय मुंबई के रियल एस्टेट सेक्टर में नई ऊर्जा लाएगा।
- जर्जर इमारतें टूटेंगी
- नई टावरों का निर्माण बढ़ेगा
- सैकड़ों प्रोजेक्ट्स, जो वर्षों से रुके थे, आगे बढ़ेंगे
- रोजगार बढ़ेगा
- बाजार में नए फ्लैट उपलब्ध होंगे
यह परिवर्तन केवल कानूनी सुधार नहीं बल्कि मुंबई के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बढ़ता हुआ कदम है।
